462. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
39 · अज़-ज़ुमर
فَمَنْ اَظْلَمُ مِمَّنْ كَذَبَ عَلَى اللّٰهِ وَكَذَّبَ بِالصِّدْقِ اِذْ جَٓاءَهُۜ اَلَيْسَ ف۪ي جَهَنَّمَ مَثْوًى لِلْكَافِر۪ينَ32
फिर उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी कौन होगा, जिसने झूठ घड़कर अल्लाह पर थोपा और सत्य को झूठला दिया जब वह उसके पास आया। क्या जहन्नम में इनकार करनेवालों का ठिकाना नहीं हैं?
وَالَّذ۪ي جَٓاءَ بِالصِّدْقِ وَصَدَّقَ بِه۪ٓ اُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُتَّقُونَ33
और जो व्यक्ति सच्चाई लेकर आया और उसने उसकी पुष्टि की, ऐसे ही लोग डर रखते है
لَهُمْ مَا يَشَٓاؤُ۫نَ عِنْدَ رَبِّهِمْۜ ذٰلِكَ جَزٰٓؤُا الْمُحْسِن۪ينَۚ34
उनके लिए उनके रब के पास वह सब कुछ है, जो वे चाहेंगे। यह है उत्तमकारों का बदला
لِيُكَفِّرَ اللّٰهُ عَنْهُمْ اَسْوَاَ الَّذ۪ي عَمِلُوا وَيَجْزِيَهُمْ اَجْرَهُمْ بِاَحْسَنِ الَّذ۪ي كَانُوا يَعْمَلُونَ35
ताकि जो निकृष्टतम कर्म उन्होंने किए अल्लाह उन (के बुरे प्रभाव) को उनसे दूर कर दे। औऱ जो उत्तम कर्म वे करते रहे उसका उन्हें बदला प्रदान करे
اَلَيْسَ اللّٰهُ بِكَافٍ عَبْدَهُۜ وَيُخَوِّفُونَكَ بِالَّذ۪ينَ مِنْ دُونِه۪ۜ وَمَنْ يُضْلِلِ اللّٰهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍۚ36
क्या अल्लाह अपने बन्दे के लिए काफ़ी नहीं है, यद्यपि वे तुम्हें उनसे डराते है, जो उसके सिवा (उन्होंने अपने सहायक बना रखे) है? अल्लाह जिसे गुमराही में डाल दे उसे मार्ग दिखानेवाला कोई नही
وَمَنْ يَهْدِ اللّٰهُ فَمَا لَهُ مِنْ مُضِلٍّۜ اَلَيْسَ اللّٰهُ بِعَز۪يزٍ ذِي انْتِقَامٍ37
और जिसे अल्लाह मार्ग दिखाए उसे गुमराह करनेवाला भी कोई नहीं। क्या अल्लाह प्रभुत्वशाली, बदला लेनेवाला नहीं है?
وَلَئِنْ سَاَلْتَهُمْ مَنْ خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ لَيَقُولُنَّ اللّٰهُۜ قُلْ اَفَرَاَيْتُمْ مَا تَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ اِنْ اَرَادَنِيَ اللّٰهُ بِضُرٍّ هَلْ هُنَّ كَاشِفَاتُ ضُرِّه۪ٓ اَوْ اَرَادَن۪ي بِرَحْمَةٍ هَلْ هُنَّ مُمْسِكَاتُ رَحْمَتِه۪ۜ قُلْ حَسْبِيَ اللّٰهُۜ عَلَيْهِ يَتَوَكَّلُ الْمُتَوَكِّلُونَ38
यदि तुम उनसे पूछो कि "आकाशों और धरती को किसने पैदा किया?" को वे अवश्य कहेंगे, "अल्लाह ने।" कहो, "तुम्हारा क्या विचार है? यदि अल्लाह मुझे कोई तकलीफ़ पहुँचानी चाहे तो क्या अल्लाह से हटकर जिनको तुम पुकारते हो वे उसकी पहुँचाई हुई तकलीफ़ को दूर कर सकते है? या वह मुझपर कोई दयालुता दर्शानी चाहे तो क्या वे उसकी दयालुता को रोक सकते है?" कह दो, "मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है। भरोसा करनेवाले उसी पर भरोसा करते है।"
قُلْ يَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلٰى مَكَانَتِكُمْ اِنّ۪ي عَامِلٌۚ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَۙ39
कह दो, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! तुम अपनी जगह काम करो। मैं (अपनी जगह) काम करता हूँ। तो शीघ्र ही तुम जान लोगे
مَنْ يَاْت۪يهِ عَذَابٌ يُخْز۪يهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُق۪يمٌ40
कि किस पर वह यातना आती है जो उसे रुसवा कर देगी और किसपर अटल यातना उतरती है।"