463. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

463. पृष्ठ
39 · अज़-ज़ुमर
اِنَّٓا اَنْزَلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ لِلنَّاسِ بِالْحَقِّۚ فَمَنِ اهْتَدٰى فَلِنَفْسِه۪ۚ وَمَنْ ضَلَّ فَاِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيْهَاۚ وَمَٓا اَنْتَ عَلَيْهِمْ بِوَك۪يلٍ۟41
निश्चय ही हमने लोगों के लिए हक़ के साथ तुमपर किताब अवतरित की है। अतः जिसने सीधा मार्ग ग्रहण किया तो अपने ही लिए, और जो भटका, तो वह भटककर अपने ही को हानि पहुँचाता है। तुम उनके ज़िम्मेदार नहीं हो
اَللّٰهُ يَتَوَفَّى الْاَنْفُسَ ح۪ينَ مَوْتِهَا وَالَّت۪ي لَمْ تَمُتْ ف۪ي مَنَامِهَاۚ فَيُمْسِكُ الَّت۪ي قَضٰى عَلَيْهَا الْمَوْتَ وَيُرْسِلُ الْاُخْرٰٓى اِلٰٓى اَجَلٍ مُسَمًّىۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ42
अल्लाह ही प्राणों को उनकी मृत्यु के समय ग्रस्त कर लेता है और जिसकी मृत्यु नहीं आई उसे उसकी निद्रा की अवस्था में (ग्रस्त कर लेता है) । फिर जिसकी मृत्यु का फ़ैसला कर दिया है उसे रोक रखता है। और दूसरों को एक नियत समय तक के लिए छोड़ देता है। निश्चय ही इसमें कितनी ही निशानियाँ है सोच-विचार करनेवालों के लिए
اَمِ اتَّخَذُوا مِنْ دُونِ اللّٰهِ شُفَعَٓاءَۜ قُلْ اَوَلَوْ كَانُوا لَا يَمْلِكُونَ شَيْـًٔا وَلَا يَعْقِلُونَ43
(क्या उनके उपास्य प्रभुता में साझीदार है) या उन्होंने अल्लाह से हटकर दूसरों को सिफ़ारिशी बना रखा है? कहो, "क्या यद्यपि वे किसी चीज़ का अधिकार न रखते हों और न कुछ समझते ही हो तब भी?"
قُلْ لِلّٰهِ الشَّفَاعَةُ جَم۪يعًاۜ لَهُ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ ثُمَّ اِلَيْهِ تُرْجَعُونَ44
कहो, "सिफ़ारिश तो सारी की सारी अल्लाह के अधिकार में है। आकाशों और धरती की बादशाही उसी की है। फिर उसी की ओर तुम लौटाए जाओगे।"
وَاِذَا ذُكِرَ اللّٰهُ وَحْدَهُ اشْمَاَزَّتْ قُلُوبُ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِۚ وَاِذَا ذُكِرَ الَّذ۪ينَ مِنْ دُونِه۪ٓ اِذَا هُمْ يَسْتَبْشِرُونَ45
अकेले अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उनके दिल भिंचने लगते है, किन्तु जब उसके सिवा दूसरों का ज़िक्र होता है तो क्या देखते है कि वे खुशी से खिले जा रहे है
قُلِ اللّٰهُمَّ فَاطِرَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ عَالِمَ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ اَنْتَ تَحْكُمُ بَيْنَ عِبَادِكَ ف۪يمَا كَانُوا ف۪يهِ يَخْتَلِفُونَ46
कहो, "ऐ अल्लाह, आकाशो और धरती को पैदा करनेवाले; परोक्ष और प्रत्यक्ष के जाननेवाले! तू ही अपने बन्दों के बीच उस चीज़ का फ़ैसला करेगा, जिसमें वे विभेद कर रहे है।"
وَلَوْ اَنَّ لِلَّذ۪ينَ ظَلَمُوا مَا فِي الْاَرْضِ جَم۪يعًا وَمِثْلَهُ مَعَهُ لَافْتَدَوْا بِه۪ مِنْ سُٓوءِ الْعَذَابِ يَوْمَ الْقِيٰمَةِۜ وَبَدَا لَهُمْ مِنَ اللّٰهِ مَا لَمْ يَكُونُوا يَحْتَسِبُونَ47
जिन लोगों ने ज़ुल्म किया यदि उनके पास वह सब कुछ हो जो धरती में है और उसके साथ उतना ही और भी, तो वे क़ियामत के दिन बुरी यातना से बचने के लिए वह सब फ़िदया (प्राण-मुक्ति के बदले) में दे डाले। बात यह है कि अल्लाह की ओर से उनके सामने वह कुछ आ जाएगा जिसका वे गुमान तक न करते थे