465. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
39 · अज़-ज़ुमर
اَوْ تَقُولَ لَوْ اَنَّ اللّٰهَ هَدٰين۪ي لَكُنْتُ مِنَ الْمُتَّق۪ينَۙ57
या, कहने लगे कि "यदि अल्लाह मुझे मार्ग दिखाता तो अवश्य ही मैं डर रखनेवालों में से होता।"
اَوْ تَقُولَ ح۪ينَ تَرَى الْعَذَابَ لَوْ اَنَّ ل۪ي كَرَّةً فَاَكُونَ مِنَ الْمُحْسِن۪ينَ58
या, जब वह यातना देखे तो कहने लगे, "काश! मुझे एक बार फिर लौटकर जाना हो, तो मैं उत्तमकारों में सम्मिलित हो जाऊँ।"
بَلٰى قَدْ جَٓاءَتْكَ اٰيَات۪ي فَكَذَّبْتَ بِهَا وَاسْتَكْبَرْتَ وَكُنْتَ مِنَ الْكَافِر۪ينَ59
"क्यों नहीं, मेरी आयतें तेरे पास आ चुकी थीं, किन्तु तूने उनको झूठलाया और घमंड किया और इनकार करनेवालों में सम्मिलित रहा
وَيَوْمَ الْقِيٰمَةِ تَرَى الَّذ۪ينَ كَذَبُوا عَلَى اللّٰهِ وُجُوهُهُمْ مُسْوَدَّةٌۜ اَلَيْسَ ف۪ي جَهَنَّمَ مَثْوًى لِلْمُتَكَبِّر۪ينَ60
और क़ियामत के दिन तुम उन लोगों को देखोगे जिन्होंने अल्लाह पर झूठ घड़कर थोपा है कि उनके चेहरे स्याह है। क्या अहंकारियों का ठिकाना जहन्नम में नहीं हैं?"
وَيُنَجِّي اللّٰهُ الَّذ۪ينَ اتَّقَوْا بِمَفَازَتِهِمْۘ لَا يَمَسُّهُمُ السُّٓوءُ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ61
इसके विपरीत अल्लाह उन लोगों को जिन्होंने डर रखा उन्हें उनकी सफलता के साथ मुक्ति प्रदान करेगा। न तो उन्हें कोई अनिष्ट् छू सकेगा और न वे शोकाकुल होंगे
اَللّٰهُ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍۘ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ وَك۪يلٌ62
अल्लाह हर चीज़ का स्रष्टा है और वही हर चीज़ का ज़िम्मा लेता है
لَهُ مَقَال۪يدُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ وَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِاٰيَاتِ اللّٰهِ اُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ۟63
उसी के पास आकाशों और धरती की कुँजियाँ है। और जिन लोगों ने हमारी आयतों का इनकार किया, वही है जो घाटे में है
قُلْ اَفَغَيْرَ اللّٰهِ تَاْمُرُٓونّ۪ٓي اَعْبُدُ اَيُّهَا الْجَاهِلُونَ64
कहो, "क्या फिर भी तुम मुझसे कहते हो कि मैं अल्लाह के सिवा किसी और की बन्दगी करूँ, ऐ अज्ञानियों?"
وَلَقَدْ اُو۫حِيَ اِلَيْكَ وَاِلَى الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِكَۚ لَئِنْ اَشْرَكْتَ لَيَحْبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِر۪ينَ65
तुम्हारी ओर और जो तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनकी ओर भी वह्यस की जा चुकी है कि "यदि तुमने शिर्क किया तो तुम्हारा किया-धरा अनिवार्यतः अकारथ जाएगा और तुम अवश्य ही घाटे में पड़नेवालों में से हो जाओगे।"
بَلِ اللّٰهَ فَاعْبُدْ وَكُنْ مِنَ الشَّاكِر۪ينَ66
नहीं, बल्कि अल्लाह ही की बन्दगी करो और कृतज्ञता दिखानेवालों में से हो जाओ
وَمَا قَدَرُوا اللّٰهَ حَقَّ قَدْرِه۪ۗ وَالْاَرْضُ جَم۪يعًا قَبْضَتُهُ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ وَالسَّمٰوَاتُ مَطْوِيَّاتٌ بِيَم۪ينِه۪ۜ سُبْحَانَهُ وَتَعَالٰى عَمَّا يُشْرِكُونَ67
उन्होंने अल्लाह की क़द्र न जानी, जैसी क़द्र उसकी जाननी चाहिए थी। हालाँकि क़ियामत के दिन सारी की सारी धरती उसकी मुट्ठी में होगी और आकाश उसके दाएँ हाथ में लिपटे हुए होंगे। महान और उच्च है वह उससे, जो वे साझी ठहराते है