467. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

467. पृष्ठ
39 · अज़-ज़ुमर
وَتَرَى الْمَلٰٓئِكَةَ حَٓافّ۪ينَ مِنْ حَوْلِ الْعَرْشِ يُسَبِّحُونَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْۚ وَقُضِيَ بَيْنَهُمْ بِالْحَقِّ وَق۪يلَ الْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ75
और तुम फ़रिश्तों को देखोगे कि वे सिंहासन के गिर्द घेरा बाँधे हुए, अपने रब का गुणगान कर रहे है। और लोगों के बीच ठीक-ठीक फ़ैसला कर दिया जाएगा और कहा जाएगा, "सारी प्रशंसा अल्लाह, सारे संसार के रब, के लिए है।"
40 · ग़ाफिर
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
حٰمٓۜ1
हा॰ मीम॰
تَنْز۪يلُ الْكِتَابِ مِنَ اللّٰهِ الْعَز۪يزِ الْعَل۪يمِۙ2
इस किताब का अवतरण प्रभुत्वशाली, सर्वज्ञ अल्लाह की ओर से है,
غَافِرِ الذَّنْبِ وَقَابِلِ التَّوْبِ شَد۪يدِ الْعِقَابِ ذِي الطَّوْلِۜ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۜ اِلَيْهِ الْمَص۪يرُ3
जो गुनाह क्षमा करनेवाला, तौबा क़बूल करनेवाला, कठोर दंड देनेवाला, शक्तिमान है। उसके अतिरिक्त कोई पूज्य-प्रभु नहीं। अन्ततः उसी की ओर जाना है
مَا يُجَادِلُ ف۪ٓي اٰيَاتِ اللّٰهِ اِلَّا الَّذ۪ينَ كَفَرُوا فَلَا يَغْرُرْكَ تَقَلُّبُهُمْ فِي الْبِلَادِ4
अल्लाह की आयतों के बारे में बस वही लोग झगड़ते हैं जिन्होंने इनकार किया, तो नगरों में उसकी चलत-फिरत तुम्हें धोखे में न डाले
كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَالْاَحْزَابُ مِنْ بَعْدِهِمْۖ وَهَمَّتْ كُلُّ اُمَّةٍ بِرَسُولِهِمْ لِيَاْخُذُوهُ وَجَادَلُوا بِالْبَاطِلِ لِيُدْحِضُوا بِهِ الْحَقَّ فَاَخَذْتُهُمْ۠ فَكَيْفَ كَانَ عِقَابِ5
उनसे पहले नूह की क़ौम ने और उनके पश्चात दूसरों गिरोहों ने भी झुठलाया और हर समुदाय के लोगों ने अपने रसूलों के बारे में इरादा किया कि उन्हें पकड़ लें और वे सत्य का सहारा लेकर झगडे, ताकि उसके द्वारा सत्य को उखाड़ दें। अन्ततः मैंने उन्हें पकड़ लिया। तौ कैसी रही मेरी सज़ा!
وَكَذٰلِكَ حَقَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اَنَّهُمْ اَصْحَابُ النَّارِۢ6
और (जैसे दुनिया में सज़ा मिली) उसी प्रकार तेरे रब की यह बात भी उन लोगों पर सत्यापित हो गई है, जिन्होंने इनकार किया कि वे आग में पड़नेवाले है;
اَلَّذ۪ينَ يَحْمِلُونَ الْعَرْشَ وَمَنْ حَوْلَهُ يُسَبِّحُونَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْ وَيُؤْمِنُونَ بِه۪ وَيَسْتَغْفِرُونَ لِلَّذ۪ينَ اٰمَنُواۚ رَبَّنَا وَسِعْتَ كُلَّ شَيْءٍ رَحْمَةً وَعِلْمًا فَاغْفِرْ لِلَّذ۪ينَ تَابُوا وَاتَّبَعُوا سَب۪يلَكَ وَقِهِمْ عَذَابَ الْجَح۪يمِ7
जो सिंहासन को उठाए हुए है और जो उसके चतुर्दिक हैं, अपने रब का गुणगान करते है और उस पर ईमान रखते है और उन लोगों के लिए क्षमा की प्रार्थना करते है जो ईमान लाए कि "ऐ हमारे रब! तू हर चीज़ को व्याप्त है। अतः जिन लोगों ने तौबा की और तेरे मार्ग का अनुसरण किया, उन्हें क्षमा कर दे और भड़कती हुई आग की यातना से बचा लें