47. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
2 · अल-बक़रा
اَلَّذ۪ينَ يَاْكُلُونَ الرِّبٰوا لَا يَقُومُونَ اِلَّا كَمَا يَقُومُ الَّذ۪ي يَتَخَبَّطُهُ الشَّيْطَانُ مِنَ الْمَسِّۜ ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ قَالُٓوا اِنَّمَا الْبَيْعُ مِثْلُ الرِّبٰواۢ وَاَحَلَّ اللّٰهُ الْبَيْعَ وَحَرَّمَ الرِّبٰواۜ فَمَنْ جَٓاءَهُ مَوْعِظَةٌ مِنْ رَبِّه۪ فَانْتَهٰى فَلَهُ مَا سَلَفَۜ وَاَمْرُهُٓ اِلَى اللّٰهِۜ وَمَنْ عَادَ فَاُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ النَّارِۚ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ275
और लोग ब्याज खाते है, वे बस इस प्रकार उठते है जिस प्रकार वह क्यक्ति उठता है जिसे शैतान ने छूकर बावला कर दिया हो और यह इसलिए कि उनका कहना है, "व्यापार भी तो ब्याज के सदृश है," जबकि अल्लाह ने व्यापार को वैध और ब्याज को अवैध ठहराया है। अतः जिसको उसके रब की ओर से नसीहत पहुँची और वह बाज़ आ गया, तो जो कुछ पहले ले चुका वह उसी का रहा और मामला उसका अल्लाह के हवाले है। और जिसने फिर यही कर्म किया तो ऐसे ही लोग आग (जहन्नम) में पड़नेवाले है। उसमें वे सदैव रहेंगे
يَمْحَقُ اللّٰهُ الرِّبٰوا وَيُرْبِي الصَّدَقَاتِۜ وَاللّٰهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ كَفَّارٍ اَث۪يمٍ276
अल्लाह ब्याज को घटाता और मिटाता है और सदक़ों को बढ़ाता है। और अल्लाह किसी अकृतज्ञ, हक़ मारनेवाले को पसन्द नहीं करता
اِنَّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَاَقَامُوا الصَّلٰوةَ وَاٰتَوُا الزَّكٰوةَ لَهُمْ اَجْرُهُمْ عِنْدَ رَبِّهِمْۚ وَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ277
निस्संदेह जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए और नमाज़ क़ायम की्य और ज़कात दी, उनके लिए उनका बदला उनके रब के पास है, और उन्हें न कोई भय हो और न वे शोकाकुल होंगे
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا اتَّقُوا اللّٰهَ وَذَرُوا مَا بَقِيَ مِنَ الرِّبٰٓوا اِنْ كُنْتُمْ مُؤْمِن۪ينَ278
ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह का डर रखो और जो कुछ ब्याज बाक़ी रह गया है उसे छोड़ दो, यदि तुम ईमानवाले हो
فَاِنْ لَمْ تَفْعَلُوا فَاْذَنُوا بِحَرْبٍ مِنَ اللّٰهِ وَرَسُولِه۪ۚ وَاِنْ تُبْتُمْ فَلَكُمْ رُؤُ۫سُ اَمْوَالِكُمْۚ لَا تَظْلِمُونَ وَلَا تُظْلَمُونَ279
फिर यदि तुमने ऐसा न किया तो अल्लाह और उसके रसूल से युद्ध के लिए ख़बरदार हो जाओ। और यदि तौबा कर लो तो अपना मूलधन लेने का तुम्हें अधिकार है। न तुम अन्याय करो और न तुम्हारे साथ अन्याय किया जाए
وَاِنْ كَانَ ذُو عُسْرَةٍ فَنَظِرَةٌ اِلٰى مَيْسَرَةٍۜ وَاَنْ تَصَدَّقُوا خَيْرٌ لَكُمْ اِنْ كُنْتُمْ تَعْلَمُونَ280
और यदि कोई तंगी में हो तो हाथ खुलने तक मुहलत देनी होगी; और सदक़ा कर दो (अर्थात मूलधन भी न लो) तो यह तुम्हारे लिए अधिक उत्तम है, यदि तुम जान सको
وَاتَّقُوا يَوْمًا تُرْجَعُونَ ف۪يهِ اِلَى اللّٰهِ ثُمَّ تُوَفّٰى كُلُّ نَفْسٍ مَا كَسَبَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ۟281
और उस दिन का डर रखो जबकि तुम अल्लाह की ओर लौटोगे, फिर प्रत्येक व्यक्ति को जो कुछ उसने कमाया पूरा-पूरा मिल जाएगा और उनके साथ कदापि कोई अन्याय न होगा