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470. पृष्ठ
40 · ग़ाफिर
وَقَالَ فِرْعَوْنُ ذَرُون۪ٓي اَقْتُلْ مُوسٰى وَلْيَدْعُ رَبَّهُۚ اِنّ۪ٓي اَخَافُ اَنْ يُبَدِّلَ د۪ينَكُمْ اَوْ اَنْ يُظْهِرَ فِي الْاَرْضِ الْفَسَادَ26
फ़िरऔन ने कहा, "मुझे छोड़ो, मैं मूसा को मार डालूँ और उसे चाहिए कि वह अपने रब को (अपनी सहायता के लिए) पुकारे। मुझे डर है कि ऐसा न हो कि वह तुम्हारे धर्म को बदल डाले या यह कि वह देश में बिगाड़ पैदा करे।"
وَقَالَ مُوسٰٓى اِنّ۪ي عُذْتُ بِرَبّ۪ي وَرَبِّكُمْ مِنْ كُلِّ مُتَكَبِّرٍ لَا يُؤْمِنُ بِيَوْمِ الْحِسَابِ۟27
मूसा ने कहा, "मैंने हर अहंकारी के मुक़ाबले में, जो हिसाब के दिन पर ईमान नहीं रखता, अपने रब और तुम्हारे रब की शरण ले ली है।"
وَقَالَ رَجُلٌ مُؤْمِنٌۗ مِنْ اٰلِ فِرْعَوْنَ يَكْتُمُ ا۪يمَانَهُٓ اَتَقْتُلُونَ رَجُلًا اَنْ يَقُولَ رَبِّيَ اللّٰهُ وَقَدْ جَٓاءَكُمْ بِالْبَيِّنَاتِ مِنْ رَبِّكُمْۜ وَاِنْ يَكُ كَاذِبًا فَعَلَيْهِ كَذِبُهُۚ وَاِنْ يَكُ صَادِقًا يُصِبْكُمْ بَعْضُ الَّذ۪ي يَعِدُكُمْۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يَهْد۪ي مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ كَذَّابٌ28
फ़िरऔन के लोगों में से एक ईमानवाले व्यक्ति ने, जो अपने ईमान को छिपा रहा था, कहा, "क्या तुम एक ऐसे व्यक्ति को इसलिए मार डालोगे कि वह कहता है कि मेरा रब अल्लाह है और वह तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से खुले प्रमाण भी लेकर आया है? यदि वह झूठा है तो उसके झूठ का वबाल उसी पर पड़ेगा। किन्तु यदि वह सच्चा है तो जिस चीज़ की वह तुम्हें धमकी दे रहा है, उसमें से कुछ न कुछ तो तुमपर पड़कर रहेगा। निश्चय ही अल्लाह उसको मार्ग नहीं दिखाता जो मर्यादाहीन, बड़ा झूठा हो
يَا قَوْمِ لَكُمُ الْمُلْكُ الْيَوْمَ ظَاهِر۪ينَ فِي الْاَرْضِۘ فَمَنْ يَنْصُرُنَا مِنْ بَاْسِ اللّٰهِ اِنْ جَٓاءَنَاۜ قَالَ فِرْعَوْنُ مَٓا اُر۪يكُمْ اِلَّا مَٓا اَرٰى وَمَٓا اَهْد۪يكُمْ اِلَّا سَب۪يلَ الرَّشَادِ29
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! आज तुम्हारी बादशाही है। धरती में प्रभावी हो। किन्तु अल्लाह की यातना के मुक़ाबले में कौन हमारी सहायता करेगा, यदि वह हम पर आ जाए?" फ़िरऔन ने कहा, "मैं तो तुम्हें बस वही दिखा रहा हूँ जो मैं स्वयं देख रहा हूँ और मैं तुम्हें बस ठीक रास्ता दिखा रहा हूँ, जो बुद्धिसंगत भी है।"
وَقَالَ الَّذ۪ٓي اٰمَنَ يَا قَوْمِ اِنّ۪ٓي اَخَافُ عَلَيْكُمْ مِثْلَ يَوْمِ الْاَحْزَابِۙ30
उस व्यक्ति ने, जो ईमान ला चुका था, कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मुझे भय है कि तुमपर (विनाश का) ऐसा दिन न आ पड़े, जैसा दूसरे विगत समुदायों पर आ पड़ा था।
مِثْلَ دَاْبِ قَوْمِ نُوحٍ وَعَادٍ وَثَمُودَ وَالَّذ۪ينَ مِنْ بَعْدِهِمْۜ وَمَا اللّٰهُ يُر۪يدُ ظُلْمًا لِلْعِبَادِ31
जैसे नूह की क़ौम और आद और समूद और उनके पश्चात्वर्ती लोगों का हाल हुआ। अल्लाह तो ऐसा नहीं कि बन्दों पर कोई ज़ुल्म करना चाहे
وَيَا قَوْمِ اِنّ۪ٓي اَخَافُ عَلَيْكُمْ يَوْمَ التَّنَادِۙ32
और ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मुझे तुम्हारे बारे में चीख़-पुकार के दिन का भय है,
يَوْمَ تُوَلُّونَ مُدْبِر۪ينَۚ مَا لَكُمْ مِنَ اللّٰهِ مِنْ عَاصِمٍۚ وَمَنْ يُضْلِلِ اللّٰهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍ33
जिस दिन तुम पीठ फेरकर भागोगे, तुम्हें अल्लाह से बचानेवाला कोई न होगा - और जिसे अल्लाह ही भटका दे उसे मार्ग दिखानेवाला कोई नहीं। -