471. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
40 · ग़ाफिर
وَلَقَدْ جَٓاءَكُمْ يُوسُفُ مِنْ قَبْلُ بِالْبَيِّنَاتِ فَمَا زِلْتُمْ ف۪ي شَكٍّ مِمَّا جَٓاءَكُمْ بِه۪ۜ حَتّٰٓى اِذَا هَلَكَ قُلْتُمْ لَنْ يَبْعَثَ اللّٰهُ مِنْ بَعْدِه۪ رَسُولًاۜ كَذٰلِكَ يُضِلُّ اللّٰهُ مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ مُرْتَابٌۚ34
हमने पहले भी तुम्हारे पास यूसुफ़ खुले प्रमाण लेकर आ चुके है, किन्तु जो कुछ वे लेकर तुम्हारे पास आए थे, उसके बारे में तुम बराबर सन्देह में पड़े रहे, यहाँ तक कि जब उनकी मृत्यु हो गई तो तुम कहने लगे, "अल्लाह उनके पश्चात कदापि कोई रसूल न भेजेगा।" इसी प्रकार अल्लाह उसे गुमराही में डाल देता है जो मर्यादाहीन, सन्देहों में पड़नेवाला हो। -
اَلَّذ۪ينَ يُجَادِلُونَ ف۪ٓي اٰيَاتِ اللّٰهِ بِغَيْرِ سُلْطَانٍ اَتٰيهُمْۜ كَبُرَ مَقْتًا عِنْدَ اللّٰهِ وَعِنْدَ الَّذ۪ينَ اٰمَنُواۜ كَذٰلِكَ يَطْبَعُ اللّٰهُ عَلٰى كُلِّ قَلْبِ مُتَكَبِّرٍ جَبَّارٍ35
ऐसे लोगो को (गुमराही में डालता है) जो अल्लाह की आयतों में झगड़ते है, बिना इसके कि उनके पास कोई प्रमाण आया हो, अल्लाह की दृष्टि) में और उन लोगों की दृष्टि में जो ईमान लाए यह (बात) अत्यन्त अप्रिय है। इसी प्रकार अल्लाह हर अहंकारी, निर्दय- अत्याचारी के दिल पर मुहर लगा देता है। -
وَقَالَ فِرْعَوْنُ يَا هَامَانُ ابْنِ ل۪ي صَرْحًا لَعَلّ۪ٓي اَبْلُغُ الْاَسْبَابَۙ36
फ़िरऔन ने कहा, "ऐ हामान! मेरे एक उच्च भवन बना, ताकि मैं साधनों तक पहुँच सकूँ,
اَسْبَابَ السَّمٰوَاتِ فَاَطَّلِعَ اِلٰٓى اِلٰهِ مُوسٰى وَاِنّ۪ي لَاَظُنُّهُ كَاذِبًاۜ وَكَذٰلِكَ زُيِّنَ لِفِرْعَوْنَ سُٓوءُ عَمَلِه۪ وَصُدَّ عَنِ السَّب۪يلِۜ وَمَا كَيْدُ فِرْعَوْنَ اِلَّا ف۪ي تَبَابٍ۟37
आकाशों को साधनों (और क्षत्रों) तक। फिर मूसा के पूज्य को झाँककर देखूँ। मैं तो उसे झूठा ही समझता हूँ।" इस प्रकार फ़िरऔन को लिए उसका दुष्कर्म सुहाना बना दिया गया और उसे मार्ग से रोक दिया गया। फ़िरऔन की चाल तो बस तबाही के सिलसिले में रही
وَقَالَ الَّذ۪ٓي اٰمَنَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُونِ اَهْدِكُمْ سَب۪يلَ الرَّشَادِۚ38
उस व्यक्ति ने, जो ईमान लाया था, कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मेरा अनुसरण करो, मैं तुम्हे भलाई का ठीक रास्ता दिखाऊँगा
يَا قَوْمِ اِنَّمَا هٰذِهِ الْحَيٰوةُ الدُّنْيَا مَتَاعٌۘ وَاِنَّ الْاٰخِرَةَ هِيَ دَارُ الْقَرَارِ39
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यह सांसारिक जीवन तो बस अस्थायी उपभोग है। निश्चय ही स्थायी रूप से ठहरनेका घर तो आख़िरत ही है
مَنْ عَمِلَ سَيِّئَةً فَلَا يُجْزٰٓى اِلَّا مِثْلَهَاۚ وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِنْ ذَكَرٍ اَوْ اُنْثٰى وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَاُو۬لٰٓئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ يُرْزَقُونَ ف۪يهَا بِغَيْرِ حِسَابٍ40
जिस किसी ने बुराई की तो उसे वैसा ही बदला मिलेगा, किन्तु जिस किसी ने अच्छा कर्म किया, चाहे वह पुरुष हो या स्त्री, किन्तु हो वह मोमिन, तो ऐसे लोग जन्नत में प्रवेश करेंगे। वहाँ उन्हें बेहिसाब दिया जाएगा