472. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
40 · ग़ाफिर
وَيَا قَوْمِ مَا ل۪ٓي اَدْعُوكُمْ اِلَى النَّجٰوةِ وَتَدْعُونَن۪ٓي اِلَى النَّارِۜ41
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यह मेरे साथ क्या मामला है कि मैं तो तुम्हें मुक्ति की ओर बुलाता हूँ और तुम मुझे आग की ओर बुला रहे हो?
تَدْعُونَن۪ي لِاَكْفُرَ بِاللّٰهِ وَاُشْرِكَ بِه۪ مَا لَيْسَ ل۪ي بِه۪ عِلْمٌۘ وَاَنَا۬ اَدْعُوكُمْ اِلَى الْعَز۪يزِ الْغَفَّارِ42
तुम मुझे बुला रहे हो कि मैं अल्लाह के साथ कुफ़्र करूँ और उसके साथ उसे साझी ठहराऊँ जिसका मुझे कोई ज्ञान नहीं, जबकि मैं तुम्हें बुला रहा हूँ उसकी ओर जो प्रभुत्वशाली, अत्यन्त क्षमाशील है
لَا جَرَمَ اَنَّمَا تَدْعُونَن۪ٓي اِلَيْهِ لَيْسَ لَهُ دَعْوَةٌ فِي الدُّنْيَا وَلَا فِي الْاٰخِرَةِ وَاَنَّ مَرَدَّنَٓا اِلَى اللّٰهِ وَاَنَّ الْمُسْرِف۪ينَ هُمْ اَصْحَابُ النَّارِ43
निस्संदेह तुम मुझे जिसकी ओर बुलाते हो उसके लिए न संसार में आमंत्रण है और न आख़िरत (परलोक) में और यह की हमें लौटना भी अल्लाह ही की ओर है और यह कि जो मर्यादाही है, वही आग (में पड़नेवाले) वाले है
فَسَتَذْكُرُونَ مَٓا اَقُولُ لَكُمْۜ وَاُفَوِّضُ اَمْر۪ٓي اِلَى اللّٰهِۜ اِنَّ اللّٰهَ بَص۪يرٌ بِالْعِبَادِ44
अतः शीघ्र ही तुम याद करोगे, जो कुछ मैं तुमसे कह रहा हूँ। मैं तो अपना मामला अल्लाह को सौंपता हूँ। निस्संदेह अल्लाह की दृष्टि सब बन्दों पर है
فَوَقٰيهُ اللّٰهُ سَيِّـَٔاتِ مَا مَكَرُوا وَحَاقَ بِاٰلِ فِرْعَوْنَ سُٓوءُ الْعَذَابِۚ45
अन्ततः जो चाल वे चल रहे थे, उसकी बुराइयों से अल्लाह ने उसे बचा लिया और फ़िरऔनियों को बुरी यातना ने आ घेरा;
اَلنَّارُ يُعْرَضُونَ عَلَيْهَا غُدُوًّا وَعَشِيًّاۚ وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ۠ اَدْخِلُٓوا اٰلَ فِرْعَوْنَ اَشَدَّ الْعَذَابِ46
अर्थात आग ने; जिसके सामने वे प्रातःकाल और सायंकाल पेश किए जाते है। और जिन दिन क़ियामत की घड़ी घटित होगी (कहा जाएगा), "फ़िरऔन के लोगों को निकृष्ट तम यातना में प्रविष्टी कराओ!"
وَاِذْ يَتَحَٓاجُّونَ فِي النَّارِ فَيَقُولُ الضُّعَفٰٓؤُ۬ا لِلَّذ۪ينَ اسْتَكْبَرُٓوا اِنَّا كُنَّا لَكُمْ تَبَعًا فَهَلْ اَنْتُمْ مُغْنُونَ عَنَّا نَص۪يبًا مِنَ النَّارِ47
और सोचो जबकि वे आग के भीतर एक-दूसरे से झगड़ रहे होंगे, तो कमज़ोर लोग उन लोगों से, जो बड़े बनते थे, कहेंगे, "हम तो तुम्हारे पीछे चलनेवाले थे। अब क्या तुम हमपर से आग का कुछ भाग हटा सकते हो?"
قَالَ الَّذ۪ينَ اسْتَكْبَرُٓوا اِنَّا كُلٌّ ف۪يهَٓا اِنَّ اللّٰهَ قَدْ حَكَمَ بَيْنَ الْعِبَادِ48
वे लोग, जो बड़े बनते थे, कहेंगे, "हममें से प्रत्येक इसी में पड़ा है। निश्चय ही अल्लाह बन्दों के बीच फ़ैसला कर चुका।"
وَقَالَ الَّذ۪ينَ فِي النَّارِ لِخَزَنَةِ جَهَنَّمَ ادْعُوا رَبَّكُمْ يُخَفِّفْ عَنَّا يَوْمًا مِنَ الْعَذَابِ49
जो लोग आग में होंगे वे जहन्नम के प्रहरियों से कहेंगे कि "अपने रब को पुकारो कि वह हमपर से एक दिन यातना कुछ हल्की कर दे!"