476. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

476. पृष्ठ
40 · ग़ाफिर
وَلَقَدْ اَرْسَلْنَا رُسُلًا مِنْ قَبْلِكَ مِنْهُمْ مَنْ قَصَصْنَا عَلَيْكَ وَمِنْهُمْ مَنْ لَمْ نَقْصُصْ عَلَيْكَۜ وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ اَنْ يَاْتِيَ بِاٰيَةٍ اِلَّا بِاِذْنِ اللّٰهِۚ فَاِذَا جَٓاءَ اَمْرُ اللّٰهِ قُضِيَ بِالْحَقِّ وَخَسِرَ هُنَالِكَ الْمُبْطِلُونَ۟78
हम तुमसे पहले कितने ही रसूल भेज चुके है। उनमें से कुछ तो वे है जिनके वृत्तान्त का उल्लेख हमने तुमसे किया है और उनमें ऐसे भी है जिनके वृत्तान्त का उल्लेख हमने तुमसे नहीं किया। किसी रसूल को भी यह सामर्थ्य प्राप्त न थी कि वह अल्लाह की अनुज्ञा के बिना कोई निशानी ले आए। फिर जब अल्लाह का आदेश आ जाता है तो ठीक-ठीक फ़ैसला कर दिया जाता है। और उस समय झूठवाले घाटे में पड़ जाते है
اَللّٰهُ الَّذ۪ي جَعَلَ لَكُمُ الْاَنْعَامَ لِتَرْكَبُوا مِنْهَا وَمِنْهَا تَاْكُلُونَۘ79
अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए चौपाए बनाए ताकि उनमें से कुछ पर तुम सवारी करो और उनमें से कुछ को तुम खाते भी हो
وَلَكُمْ ف۪يهَا مَنَافِعُ وَلِتَبْلُغُوا عَلَيْهَا حَاجَةً ف۪ي صُدُورِكُمْ وَعَلَيْهَا وَعَلَى الْفُلْكِ تُحْمَلُونَۜ80
उनमें तुम्हारे लिए और भी फ़ायदे है - और ताकि उनके द्वारा तुम उस आवश्यकता की पूर्ति कर सको जो तुम्हारे सीनों में हो, और उनपर भी और नौकाओं पर भी सवार होते हो
وَيُر۪يكُمْ اٰيَاتِه۪ۗ فَاَيَّ اٰيَاتِ اللّٰهِ تُنْكِرُونَ81
और वह तुम्हें अपनी निशानियाँ दिखाता है। आख़िर तुम अल्लाह की कौन-सी निशानी को नहीं पहचानते?
اَفَلَمْ يَس۪يرُوا فِي الْاَرْضِ فَيَنْظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْۜ كَانُٓوا اَكْثَرَ مِنْهُمْ وَاَشَدَّ قُوَّةً وَاٰثَارًا فِي الْاَرْضِ فَمَٓا اَغْنٰى عَنْهُمْ مَا كَانُوا يَكْسِبُونَ82
फिर क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं कि देखते कि उन लोगों का कैसा परिणाम हुआ, जो उनसे पहले गुज़र चुके है। वे उनसे अधिक थे और शक्ति और अपनी छोड़ी हुई निशानियों की दृष्टि से भी बढ़-चढ़कर थे। किन्तु जो कुछ वे कमाते थे, वह उनके कुछ भी काम न आया
فَلَمَّا جَٓاءَتْهُمْ رُسُلُهُمْ بِالْبَيِّنَاتِ فَرِحُوا بِمَا عِنْدَهُمْ مِنَ الْعِلْمِ وَحَاقَ بِهِمْ مَا كَانُوا بِه۪ يَسْتَهْزِؤُ۫نَ83
फिर जब उनके रसूल उनके पास स्पष्ट प्रमाणों के साथ आए तो जो ज्ञान उनके अपने पास था वे उसी पर मग्न होते रहे और उनको उसी चीज़ ने आ घेरा जिसका वे परिहास करते थे
فَلَمَّا رَاَوْا بَاْسَنَا قَالُٓوا اٰمَنَّا بِاللّٰهِ وَحْدَهُ وَكَفَرْنَا بِمَا كُنَّا بِه۪ مُشْرِك۪ينَ84
फिर जब उन्होंने हमारी यातना देखी तो कहने लगे, "हम ईमान लाए अल्लाह पर जो अकेला है और उसका इनकार किया जिसे हम उसका साझी ठहराते थे।"
فَلَمْ يَكُ يَنْفَعُهُمْ ا۪يمَانُهُمْ لَمَّا رَاَوْا بَاْسَنَاۜ سُنَّتَ اللّٰهِ الَّت۪ي قَدْ خَلَتْ ف۪ي عِبَادِه۪ۚ وَخَسِرَ هُنَالِكَ الْكَافِرُونَ85
किन्तु उनका ईमान उनको कुछ भी लाभ नहीं पहुँचा सकता था जबकि उन्होंने हमारी यातना को देख लिया - यही अल्लाह की रीति है, जो उसके बन्दों में पहले से चली आई है - और उस समय इनकार करनेवाले घाटे में पड़कर रहे