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478. पृष्ठ
41 · हामीम अस-सजदा
فَقَضٰيهُنَّ سَبْعَ سَمٰوَاتٍ ف۪ي يَوْمَيْنِ وَاَوْحٰى ف۪ي كُلِّ سَمَٓاءٍ اَمْرَهَاۜ وَزَيَّنَّا السَّمَٓاءَ الدُّنْيَا بِمَصَاب۪يحَۗ وَحِفْظًاۜ ذٰلِكَ تَقْد۪يرُ الْعَز۪يزِ الْعَل۪يمِ12
फिर दो दिनों में उनको अर्थात सात आकाशों को बनाकर पूरा किया और प्रत्येक आकाश में उससे सम्बन्धित आदेश की प्रकाशना कर दी औऱ दुनिया के (निकटवर्ती) आकाश को हमने दीपों से सजाया (रात के यात्रियों के दिशा-निर्देश आदि के लिए) और सुरक्षित करने के उद्देश्य से। यह अत्.न्त प्रभुत्वशाली, सर्वज्ञ का ठहराया हुआ है।"
فَاِنْ اَعْرَضُوا فَقُلْ اَنْذَرْتُكُمْ صَاعِقَةً مِثْلَ صَاعِقَةِ عَادٍ وَثَمُودَۜ13
अब यदि वे लोग ध्यान में न लाएँ तो कह दो, "मैं तुम्हें उसी तरह के कड़का (वज्रवात) से डराता हूँ, जैसा कड़का आद और समूद पर हुआ था।"
اِذْ جَٓاءَتْهُمُ الرُّسُلُ مِنْ بَيْنِ اَيْد۪يهِمْ وَمِنْ خَلْفِهِمْ اَلَّا تَعْبُدُٓوا اِلَّا اللّٰهَۜ قَالُوا لَوْ شَٓاءَ رَبُّنَا لَاَنْزَلَ مَلٰٓئِكَةً فَاِنَّا بِمَٓا اُرْسِلْتُمْ بِه۪ كَافِرُونَ14
जब उनके पास रसूल उनके आगे और उनके पीछे से आए कि "अल्लाह के सिवा किसी की बन्दगी न करो।" तो उन्होंने कहा, "यदि हमारा रब चाहता तो फ़रिश्तों को उतार देता। अतः जिस चीज़ के साथ तुम्हें भेजा गया है, हम उसे नहीं मानते।"
فَاَمَّا عَادٌ فَاسْتَكْبَرُوا فِي الْاَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَقَالُوا مَنْ اَشَدُّ مِنَّا قُوَّةًۜ اَوَلَمْ يَرَوْا اَنَّ اللّٰهَ الَّذ۪ي خَلَقَهُمْ هُوَ اَشَدُّ مِنْهُمْ قُوَّةًۜ وَكَانُوا بِاٰيَاتِنَا يَجْحَدُونَ15
रहे आद, तो उन्होंने नाहक़ धरती में घमंड किया और कहा, "कौन हमसे शक्ति में बढ़कर है?" क्या उन्होंने नहीं देखा कि अल्लाह, जिसने उन्हें पैदा किया, वह उनसे शक्ति में बढ़कर है? वे तो हमारी आयतों का इनकार ही करते रहे
فَاَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ ر۪يحًا صَرْصَرًا ف۪ٓي اَيَّامٍ نَحِسَاتٍ لِنُذ۪يقَهُمْ عَذَابَ الْخِزْيِ فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَاۜ وَلَعَذَابُ الْاٰخِرَةِ اَخْزٰى وَهُمْ لَا يُنْصَرُونَ16
अन्ततः हमने कुछ अशुभ दिनों में उनपर एक शीत-झंझावात चलाई, ताकि हम उन्हें सांसारिक जीवन में अपमान और रुसवाई की यातना का मज़ा चखा दें। और आख़िरत की यातना तो इससे कहीं बढ़कर रुसवा करनेवाली है। और उनको कोई सहायता भी न मिल सकेगी
وَاَمَّا ثَمُودُ فَهَدَيْنَاهُمْ فَاسْتَحَبُّوا الْعَمٰى عَلَى الْهُدٰى فَاَخَذَتْهُمْ صَاعِقَةُ الْعَذَابِ الْهُونِ بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَۚ17
और रहे समूद, तो हमने उनके सामने सीधा मार्ग दिखाया, किन्तु मार्गदर्शन के मुक़ाबले में उन्होंने अन्धा रहना ही पसन्द किया। परिणामतः जो कुछ वे कमाई करते रहे थे उसके बदले में अपमानजनक यातना के कड़के ने उन्हें आ पकड़ा
وَنَجَّيْنَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ۟18
और हमने उन लोगों को बचा लिया जो ईमान लाए थे और डर रखते थे
وَيَوْمَ يُحْشَرُ اَعْدَٓاءُ اللّٰهِ اِلَى النَّارِ فَهُمْ يُوزَعُونَ19
और विचार करो जिस दिन अल्लाह के शत्रु आग की ओर एकत्र करके लाए जाएँगे, फिर उन्हें श्रेणियों में क्रमबद्ध किया जाएगा, यहाँ तक की जब वे उसके पास पहुँच जाएँगे
حَتّٰٓى اِذَا مَا جَٓاؤُ۫هَا شَهِدَ عَلَيْهِمْ سَمْعُهُمْ وَاَبْصَارُهُمْ وَجُلُودُهُمْ بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ20
तो उनके कान और उनकी आँखें और उनकी खालें उनके विरुद्ध उन बातों की गवाही देंगी, जो कुछ वे करते रहे होंगे