479. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
41 · हामीम अस-सजदा
وَقَالُوا لِجُلُودِهِمْ لِمَ شَهِدْتُمْ عَلَيْنَاۜ قَالُٓوا اَنْطَقَنَا اللّٰهُ الَّذ۪ٓي اَنْطَقَ كُلَّ شَيْءٍ وَهُوَ خَلَقَكُمْ اَوَّلَ مَرَّةٍ وَاِلَيْهِ تُرْجَعُونَ21
वे अपनी खालों से कहेंगे, "तुमने हमारे विरुद्ध क्यों गवाही दी?" वे कहेंगी, "हमें उसी अल्लाह ने वाक्-शक्ति प्रदान की है, जिसने प्रत्येक चीज़ को वाक्-शक्ति प्रदान की।" - उसी ने तुम्हें पहली बार पैदा किया और उसी की ओर तुम्हें लौटना है
وَمَا كُنْتُمْ تَسْتَتِرُونَ اَنْ يَشْهَدَ عَلَيْكُمْ سَمْعُكُمْ وَلَٓا اَبْصَارُكُمْ وَلَا جُلُودُكُمْ وَلٰكِنْ ظَنَنْتُمْ اَنَّ اللّٰهَ لَا يَعْلَمُ كَث۪يرًا مِمَّا تَعْمَلُونَ22
तुम इस भय से छिपते न थे कि तुम्हारे कान तुम्हारे विरुद्ध गवाही देंगे, और न इसलिए कि तुम्हारी आँखें गवाही देंगी और न इस कारण से कि तुम्हारी खाले गवाही देंगी, बल्कि तुमने तो यह समझ रखा था कि अल्लाह तुम्हारे बहुत-से कामों को जानता ही नहीं
وَذٰلِكُمْ ظَنُّكُمُ الَّذ۪ي ظَنَنْتُمْ بِرَبِّكُمْ اَرْدٰيكُمْ فَاَصْبَحْتُمْ مِنَ الْخَاسِر۪ينَ23
और तुम्हारे उस गुमान ने तुम्हे बरबाद किया जो तुमने अपने रब के साथ किया; अतः तुम घाटे में पड़कर रहे
فَاِنْ يَصْبِرُوا فَالنَّارُ مَثْوًى لَهُمْۚ وَاِنْ يَسْتَعْتِبُوا فَمَا هُمْ مِنَ الْمُعْتَب۪ينَ24
अब यदि वे धैर्य दिखाएँ तब भी आग ही उनका ठिकाना है। और यदि वे किसी प्रकार (उसके) क्रोध को दूर करना चाहें, तब भी वे ऐसे नहीं कि वे राज़ी कर सकें
وَقَيَّضْنَا لَهُمْ قُرَنَٓاءَ فَزَيَّنُوا لَهُمْ مَا بَيْنَ اَيْد۪يهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَحَقَّ عَلَيْهِمُ الْقَوْلُ ف۪ٓي اُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِنْ قَبْلِهِمْ مِنَ الْجِنِّ وَالْاِنْسِۚ اِنَّهُمْ كَانُوا خَاسِر۪ينَ۟25
हमने उनके लिए कुछ साथी नियुक्त कर दिए थे। फिर उन्होंने उनके आगे और उनके पीछे जो कुछ था उसे सुहाना बनाकर उन्हें दिखाया। अन्ततः उनपर भी जिन्नों और मनुष्यों के उन गिरोहों के साथ फ़ैसला सत्यापित होकर रहा, जो उनसे पहले गुज़र चुके थे। निश्चय ही वे घाटा उठानेवाले थे
وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَا تَسْمَعُوا لِهٰذَا الْقُرْاٰنِ وَالْغَوْا ف۪يهِ لَعَلَّكُمْ تَغْلِبُونَ26
जिन लोगों ने इनकार किया उन्होंने कहा, "इस क़ुरआन को सुनो ही मत और इसके बीच में शोर-गुल मचाओ, ताकि तुम प्रभावी रहो।"
فَلَنُذ۪يقَنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا عَذَابًا شَد۪يدًا وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ اَسْوَاَ الَّذ۪ي كَانُوا يَعْمَلُونَ27
अतः हम अवश्य ही उन लोगों को, जिन्होंने इनकार किया, कठोर यातना का मजा चखाएँगे, और हम अवश्य उन्हें उसका बदला देंगे, जो निकृष्टतम कर्म वे करते रहे है
ذٰلِكَ جَزَٓاءُ اَعْدَٓاءِ اللّٰهِ النَّارُۚ لَهُمْ ف۪يهَا دَارُ الْخُلْدِۜ جَزَٓاءً بِمَا كَانُوا بِاٰيَاتِنَا يَجْحَدُونَ28
वह है अल्लाह के शत्रुओं का बदला - आग। उसी में उसका सदा का घर है, उसके बदले में जो वे हमारी आयतों का इनकार करते रहे
وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا رَبَّنَٓا اَرِنَا الَّذَيْنِ اَضَلَّانَا مِنَ الْجِنِّ وَالْاِنْسِ نَجْعَلْهُمَا تَحْتَ اَقْدَامِنَا لِيَكُونَا مِنَ الْاَسْفَل۪ينَ29
और जिन लोगों ने इनकार किया वे कहेंगे, "ऐ हमारे रब! हमें दिखा दे उन जिन्नों और मनुष्यों को, जिन्होंने हमको पथभ्रष़्ट किया कि हम उन्हें अपने पैरों तले डाल दे ताकि वे सबसे नीचे जा पड़े