480. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
41 · हामीम अस-सजदा
اِنَّ الَّذ۪ينَ قَالُوا رَبُّنَا اللّٰهُ ثُمَّ اسْتَقَامُوا تَتَنَزَّلُ عَلَيْهِمُ الْمَلٰٓئِكَةُ اَلَّا تَخَافُوا وَلَا تَحْزَنُوا وَاَبْشِرُوا بِالْجَنَّةِ الَّت۪ي كُنْتُمْ تُوعَدُونَ30
जिन लोगों ने कहा कि "हमारा रब अल्लाह है।" फिर इस पर दृढ़तापूर्वक जमें रहे, उनपर फ़रिश्ते उतरते है कि "न डरो और न शोकाकुल हो, और उस जन्नत की शुभ सूचना लो जिसका तुमसे वादा किया गया है
نَحْنُ اَوْلِيَٓاؤُ۬كُمْ فِي الْحَيٰوةِ الدُّنْيَا وَفِي الْاٰخِرَةِۚ وَلَكُمْ ف۪يهَا مَا تَشْتَه۪ٓي اَنْفُسُكُمْ وَلَكُمْ ف۪يهَا مَا تَدَّعُونَۜ31
हम सांसारिक जीवन में भी तुम्हारे सहचर मित्र है और आख़िरत में भी। और वहाँ तुम्हारे लिए वह सब कुछ है, जिसकी इच्छा तुम्हारे जी को होगी। और वहाँ तुम्हारे लिए वह सब कुछ होगा, जिसका तुम माँग करोगे
نُزُلًا مِنْ غَفُورٍ رَح۪يمٍ۟32
आतिथ्य के रूप में क्षमाशील, दयावान सत्ता की ओर से"
وَمَنْ اَحْسَنُ قَوْلًا مِمَّنْ دَعَٓا اِلَى اللّٰهِ وَعَمِلَ صَالِحًا وَقَالَ اِنَّن۪ي مِنَ الْمُسْلِم۪ينَ33
और उस व्यक्ति से बात में अच्छा कौन हो सकता है जो अल्लाह की ओर बुलाए और अच्छे कर्म करे और कहे, "निस्संदेह मैं मुस्लिम (आज्ञाकारी) हूँ?"
وَلَا تَسْتَوِي الْحَسَنَةُ وَلَا السَّيِّئَةُۜ اِدْفَعْ بِالَّت۪ي هِيَ اَحْسَنُ فَاِذَا الَّذ۪ي بَيْنَكَ وَبَيْنَهُ عَدَاوَةٌ كَاَنَّهُ وَلِيٌّ حَم۪يمٌ34
भलाई और बुराई समान नहीं है। तुम (बुरे आचरण की बुराई को) अच्छे से अच्छे आचरण के द्वारा दूर करो। फिर क्या देखोगे कि वही व्यक्ति तुम्हारे और जिसके बीच वैर पड़ा हुआ था, जैसे वह कोई घनिष्ठ मित्र है
وَمَا يُلَقّٰيهَٓا اِلَّا الَّذ۪ينَ صَبَرُواۚ وَمَا يُلَقّٰيهَٓا اِلَّا ذُو حَظٍّ عَظ۪يمٍ35
किन्तु यह चीज़ केवल उन लोगों को प्राप्त होती है जो धैर्य से काम लेते है, और यह चीज़ केवल उसको प्राप्त होती है जो बड़ा भाग्यशाली होता है
وَاِمَّا يَنْزَغَنَّكَ مِنَ الشَّيْطَانِ نَزْغٌ فَاسْتَعِذْ بِاللّٰهِۜ اِنَّهُ هُوَ السَّم۪يعُ الْعَل۪يمُ36
और यदि शैतान की ओर से कोई उकसाहट तुम्हें चुभे तो अल्लाह की शरण माँग लो। निश्चय ही वह सबकुछ सुनता, जानता है
وَمِنْ اٰيَاتِهِ الَّيْلُ وَالنَّهَارُ وَالشَّمْسُ وَالْقَمَرُۜ لَا تَسْجُدُوا لِلشَّمْسِ وَلَا لِلْقَمَرِ وَاسْجُدُوا لِلّٰهِ الَّذ۪ي خَلَقَهُنَّ اِنْ كُنْتُمْ اِيَّاهُ تَعْبُدُونَ37
रात और दिन और सूर्य और चन्द्रमा उसकी निशानियों में से है। तुम न तो सूर्य को सजदा करो और न चन्द्रमा को, बल्कि अल्लाह को सजदा करो जिसने उन्हें पैदा किया, यदि तुम उसी की बन्दगी करनेवाले हो
فَاِنِ اسْتَكْبَرُوا فَالَّذ۪ينَ عِنْدَ رَبِّكَ يُسَبِّحُونَ لَهُ بِالَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَهُمْ لَا يَسْـَٔمُونَ38
लेकिन यदि वे घमंड करें (और अल्लाह को याद न करें), तो जो फ़रिश्ते तुम्हारे रब के पास है वे तो रात और दिन उसकी तसबीह करते ही रहते है और वे उकताते नहीं