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483. पृष्ठ
42 · अश-शूरा
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
حٰمٓ1
हा॰ मीम॰
عٓسٓقٓ۠2
ऐन॰ सीन॰ क़ाफ़॰
كَذٰلِكَ يُوح۪ٓي اِلَيْكَ وَاِلَى الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِكَۙ اللّٰهُ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ3
इसी प्रकार अल्लाह प्रुभत्वशाली, तत्वदर्शी तुम्हारी ओर और उन लोगों की ओर प्रकाशना (वह्यप) करता रहा है, जो तुमसे पहले गुज़र चुके है
لَهُ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِۜ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظ۪يمُ4
आकाशों और धरती में जो कुछ है उसी का है और वह सर्वोच्च महिमावान है
تَكَادُ السَّمٰوَاتُ يَتَفَطَّرْنَ مِنْ فَوْقِهِنَّ وَالْمَلٰٓئِكَةُ يُسَبِّحُونَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْ وَيَسْتَغْفِرُونَ لِمَنْ فِي الْاَرْضِۜ اَلَٓا اِنَّ اللّٰهَ هُوَ الْغَفُورُ الرَّح۪يمُ5
लगता है कि आकाश स्वयं अपने ऊपर से फट पड़े। हाल यह है कि फ़रिश्ते अपने रब का गुणगान कर रहे, और उन लोगों के लिए जो धरती में है, क्षमा की प्रार्थना करते रहते है। सुन लो! निश्चय ही अल्लाह ही क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
وَالَّذ۪ينَ اتَّخَذُوا مِنْ دُونِه۪ٓ اَوْلِيَٓاءَ اللّٰهُ حَف۪يظٌ عَلَيْهِمْۘ وَمَٓا اَنْتَ عَلَيْهِمْ بِوَك۪يلٍ6
और जिन लोगों ने उससे हटकर अपने कुछ दूसरे संरक्षक बना रखे हैं, अल्लाह उनपर निगरानी रखे हुए है। तुम उनके कोई ज़िम्मेदार नहीं हो
وَكَذٰلِكَ اَوْحَيْنَٓا اِلَيْكَ قُرْاٰنًا عَرَبِيًّا لِتُنْذِرَ اُمَّ الْقُرٰى وَمَنْ حَوْلَهَا وَتُنْذِرَ يَوْمَ الْجَمْعِ لَا رَيْبَ ف۪يهِۜ فَر۪يقٌ فِي الْجَنَّةِ وَفَر۪يقٌ فِي السَّع۪يرِ7
और (जैसे हम स्पष्ट आयतें उतारते है) उसी प्रकार हमने तुम्हारी ओर एक अरबी क़ुरआन की प्रकाशना की है, ताकि तुम बस्तियों के केन्द्र (मक्का) को और जो लोग उसके चतुर्दिक है उनको सचेत कर दो और सचेत करो इकट्ठा होने के दिन से, जिसमें कोई सन्देह नहीं। एक गिरोह जन्नत में होगा और एक गिरोह भड़कती आग में
وَلَوْ شَٓاءَ اللّٰهُ لَجَعَلَهُمْ اُمَّةً وَاحِدَةً وَلٰكِنْ يُدْخِلُ مَنْ يَشَٓاءُ ف۪ي رَحْمَتِه۪ۜ وَالظَّالِمُونَ مَا لَهُمْ مِنْ وَلِيٍّ وَلَا نَص۪يرٍ8
यदि अल्लाह चाहता तो उन्हें एक ही समुदाय बना देता, किन्तु वह जिसे चाहता है अपनी दयालुता में दाख़िल करता है। रहे ज़ालिम, तो उनका न तो कोई निकटवर्ती मित्र है और न कोई (दूर का) सहायक
اَمِ اتَّخَذُوا مِنْ دُونِه۪ٓ اَوْلِيَٓاءَۚ فَاللّٰهُ هُوَ الْوَلِيُّ وَهُوَ يُحْيِ الْمَوْتٰىۘ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ۟9
(क्या उन्होंने अल्लाह से हटकर दूसरे सहायक बना लिए है,) या उन्होंने उससे हटकर दूसरे संरक्षक बना रखे है? संरक्षक तो अल्लाह ही है। वही मुर्दों को जीवित करता है और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
وَمَا اخْتَلَفْتُمْ ف۪يهِ مِنْ شَيْءٍ فَحُكْمُهُٓ اِلَى اللّٰهِۜ ذٰلِكُمُ اللّٰهُ رَبّ۪ي عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُۗ وَاِلَيْهِ اُن۪يبُ10
(रसूल ने कहा,) "जिस चीज़ में तुमने विभेद किया है उसका फ़ैसला तो अल्लाह के हवाले है। वही अल्लाह मेरा रब है। उसी पर मैंने भरोसा किया है, और उसी की ओर में रुजू करता हूँ