484. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

484. पृष्ठ
42 · अश-शूरा
فَاطِرُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ جَعَلَ لَكُمْ مِنْ اَنْفُسِكُمْ اَزْوَاجًا وَمِنَ الْاَنْعَامِ اَزْوَاجًاۚ يَذْرَؤُ۬كُمْ ف۪يهِۜ لَيْسَ كَمِثْلِه۪ شَيْءٌۚ وَهُوَ السَّم۪يعُ الْبَص۪يرُ11
वह आकाशों और धरती का पैदा करनेवाला है। उसने तुम्हारे लिए तुम्हारी अपनी सहजाति से जोड़े बनाए और चौपायों के जोड़े भी। फैला रहा है वह तुमको अपने में। उसके सदृश कोई चीज़ नहीं। वही सबकुछ सुनता, देखता है
لَهُ مَقَال۪يدُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۚ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَنْ يَشَٓاءُ وَيَقْدِرُۜ اِنَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَل۪يمٌ12
आकाशों और धरती की कुंजियाँ उसी के पास हैं। वह जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और जिसके लिए चाहता है नपी-तुली कर देता है। निस्संदेह उसे हर चीज़ का ज्ञान है
شَرَعَ لَكُمْ مِنَ الدّ۪ينِ مَا وَصّٰى بِه۪ نُوحًا وَالَّذ۪ٓي اَوْحَيْنَٓا اِلَيْكَ وَمَا وَصَّيْنَا بِه۪ٓ اِبْرٰه۪يمَ وَمُوسٰى وَع۪يسٰٓى اَنْ اَق۪يمُوا الدّ۪ينَ وَلَا تَتَفَرَّقُوا ف۪يهِۜ كَبُرَ عَلَى الْمُشْرِك۪ينَ مَا تَدْعُوهُمْ اِلَيْهِۜ اَللّٰهُ يَجْتَب۪ٓي اِلَيْهِ مَنْ يَشَٓاءُ وَيَهْد۪ٓي اِلَيْهِ مَنْ يُن۪يبُ13
उसने तुम्हारे लिए वही धर्म निर्धारित किया जिसकी ताकीद उसने नूह को की थी।" और वह (जीवन्त आदेश) जिसकी प्रकाशना हमने तुम्हारी ओर की है और वह जिसकी ताकीद हमने इबराहीम और मूसा और ईसा को की थी यह है कि "धर्म को क़ायम करो और उसके विषय में अलग-अलग न हो जाओ।" बहुदेववादियों को वह चीज़ बहुत अप्रिय है, जिसकी ओर तुम उन्हें बुलाते हो। अल्लाह जिसे चाहता है अपनी ओर छाँट लेता है और अपनी ओर का मार्ग उसी को दिखाता है जो उसकी ओर रुजू करता है
وَمَا تَفَرَّقُٓوا اِلَّا مِنْ بَعْدِ مَا جَٓاءَهُمُ الْعِلْمُ بَغْيًا بَيْنَهُمْۜ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِنْ رَبِّكَ اِلٰٓى اَجَلٍ مُسَمًّى لَقُضِيَ بَيْنَهُمْۜ وَاِنَّ الَّذ۪ينَ اُو۫رِثُوا الْكِتَابَ مِنْ بَعْدِهِمْ لَف۪ي شَكٍّ مِنْهُ مُر۪يبٍ14
उन्होंने तो परस्पर एक-दूसरे पर ज़्यादती करने के उद्देश्य से इसके पश्चात विभेद किया कि उनके पास ज्ञान आ चुका था। और यदि तुम्हारे रब की ओर से एक नियत अवधि तक के लिए बात पहले निश्चित न हो चुकी होती तो उनके बीच फ़ैसला चुका दिया गया होता। किन्तु जो लोग उनके पश्चात किताब के वारिस हुए वे उसकी ओर से एक उलझन में डाल देनेवाले संदेह में पड़े हुए है
فَلِذٰلِكَ فَادْعُۚ وَاسْتَقِمْ كَمَٓا اُمِرْتَۚ وَلَا تَتَّبِعْ اَهْوَٓاءَهُمْۚ وَقُلْ اٰمَنْتُ بِمَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ مِنْ كِتَابٍۚ وَاُمِرْتُ لِاَعْدِلَ بَيْنَكُمْۜ اَللّٰهُ رَبُّنَا وَرَبُّكُمْۜ لَنَٓا اَعْمَالُنَا وَلَكُمْ اَعْمَالُكُمْۜ لَا حُجَّةَ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْۜ اَللّٰهُ يَجْمَعُ بَيْنَنَاۚ وَاِلَيْهِ الْمَص۪يرُۜ15
अतः इसी लिए (उन्हें सत्य की ओर) बुलाओ, और जैसा कि तुम्हें हुक्म दिया गया है स्वयं क़ायम रहो, और उनकी इच्छाओं का पालन न करना और कह दो, "अल्लाह ने जो किताब अवतरित की है, मैं उसपर ईमान लाया। मुझे तो आदेश हुआ है कि मैं तुम्हारे बीच न्याय करूँ। अल्लाह ही हमारा भी रब है और तुम्हारा भी। हमारे लिए हमारे कर्म है और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म। हममें और तुममें कोई झगड़ा नहीं। अल्लाह हम सबको इकट्ठा करेगा और अन्ततः उसी की ओर जाना है।"