492. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
43 · अज़-ज़ुख़रुफ़
وَلِبُيُوتِهِمْ اَبْوَابًا وَسُرُرًا عَلَيْهَا يَتَّكِؤُ۫نَۙ34
और उनके घरों के दरवाज़े भी और वे तख़्त भी जिनपर वे टेक लगाते
وَزُخْرُفًاۜ وَاِنْ كُلُّ ذٰلِكَ لَمَّا مَتَاعُ الْحَيٰوةِ الدُّنْيَاۜ وَالْاٰخِرَةُ عِنْدَ رَبِّكَ لِلْمُتَّق۪ينَ۟35
और सोने द्वारा सजावट का आयोजन भी कर देते। यह सब तो कुछ भी नहीं, बस सांसारिक जीवन की अस्थायी सुख-सामग्री है। और आख़िरत तुम्हारे रब के यहाँ डर रखनेवालों के लिए है
وَمَنْ يَعْشُ عَنْ ذِكْرِ الرَّحْمٰنِ نُقَيِّضْ لَهُ شَيْطَانًا فَهُوَ لَهُ قَر۪ينٌ36
जो रहमान के स्मरण की ओर से अंधा बना रहा है, हम उसपर एक शैतान नियुक्त कर देते है तो वही उसका साथी होता है
وَاِنَّهُمْ لَيَصُدُّونَهُمْ عَنِ السَّب۪يلِ وَيَحْسَبُونَ اَنَّهُمْ مُهْتَدُونَ37
औऱ वे (शैतान) उन्हें मार्ग से रोकते है और वे (इनकार करनेवाले) यह समझते है कि वे मार्ग पर है
حَتّٰٓى اِذَا جَٓاءَنَا قَالَ يَا لَيْتَ بَيْن۪ي وَبَيْنَكَ بُعْدَ الْمَشْرِقَيْنِ فَبِئْسَ الْقَر۪ينُ38
यहाँ तक कि जब वह हमारे पास आएगा तो (शैतान से) कहेगा, "ऐ काश, मेरे और तेरे बीच पूरब के दोनों किनारों की दूरी होती! तू तो बहुत ही बुरा साथी निकला!"
وَلَنْ يَنْفَعَكُمُ الْيَوْمَ اِذْ ظَلَمْتُمْ اَنَّكُمْ فِي الْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ39
और जबकि तुम ज़ालिम ठहरे तो आज यह बात तुम्हें कुछ लाभ न पहुँचा सकेगी कि यातना में तुम एक-दूसरे के साझी हो
اَفَاَنْتَ تُسْمِعُ الصُّمَّ اَوْ تَهْدِي الْعُمْيَ وَمَنْ كَانَ ف۪ي ضَلَالٍ مُب۪ينٍ40
क्या तुम बहरों को सुनाओगे या अंधो को और जो खुली गुमराही में पड़ा हुआ हो उसको राह दिखाओगे?
فَاِمَّا نَذْهَبَنَّ بِكَ فَاِنَّا مِنْهُمْ مُنْتَقِمُونَۙ41
फिर यदि तुम्हें उठा भी लें तब भी हम उनसे बदला लेकर रहेंगे
اَوْ نُرِيَنَّكَ الَّذ۪ي وَعَدْنَاهُمْ فَاِنَّا عَلَيْهِمْ مُقْتَدِرُونَ42
या हम तुम्हें वह चीज़ दिखा देंगे जिसका हमने वादा किया है। निस्संदेह हमें उनपर पूरी सामर्थ्य प्राप्त है
فَاسْتَمْسِكْ بِالَّذ۪ٓي اُو۫حِيَ اِلَيْكَۚ اِنَّكَ عَلٰى صِرَاطٍ مُسْتَق۪يمٍ43
अतः तुम उस चीज़ को मज़बूती से थामे रहो जिसकी तुम्हारी ओर प्रकाशना की गई। निश्चय ही तु सीधे मार्ग पर हो
وَاِنَّهُ لَذِكْرٌ لَكَ وَلِقَوْمِكَۚ وَسَوْفَ تُسْـَٔلُونَ44
निश्चय ही वह अनुस्मृति है तुम्हारे लिए और तुम्हारी क़ौम के लिए। शीघ्र ही तुम सबसे पूछा जाएगा
وَسْـَٔلْ مَنْ اَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ مِنْ رُسُلِنَاۗ اَجَعَلْنَا مِنْ دُونِ الرَّحْمٰنِ اٰلِهَةً يُعْبَدُونَ۟45
तुम हमारे रसूलों से, जिन्हें हमने तुमसे पहले भेजा, पूछ लो कि क्या हमने रहमान के सिवा भी कुछ उपास्य ठहराए थे, जिनकी बन्दगी की जाए?
وَلَقَدْ اَرْسَلْنَا مُوسٰى بِاٰيَاتِنَٓا اِلٰى فِرْعَوْنَ وَمَلَا۬ئِه۪ فَقَالَ اِنّ۪ي رَسُولُ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ46
और हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ फ़िरऔन और उसके सरदारों के पास भेजा तो उसने कहा, "मैं सारे संसार के रब का रसूल हूँ।"
فَلَمَّا جَٓاءَهُمْ بِاٰيَاتِنَٓا اِذَا هُمْ مِنْهَا يَضْحَكُونَ47
लेकिन जब वह उनके पास हमारी निशानियाँ लेकर आया तो क्या देखते है कि वे लगे उनकी हँसी उड़ाने