496. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
44 · अद-दुखान
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
حٰمٓۜ1
हा॰ मीम॰
وَالْكِتَابِ الْمُب۪ينِۙ2
गवाह है स्पष्ट किताब
اِنَّٓا اَنْزَلْنَاهُ ف۪ي لَيْلَةٍ مُبَارَكَةٍ اِنَّا كُنَّا مُنْذِر۪ينَ3
निस्संदेह हमने उसे एक बरकत भरी रात में अवतरित किया है। - निश्चय ही हम सावधान करनेवाले है।-
ف۪يهَا يُفْرَقُ كُلُّ اَمْرٍ حَك۪يمٍۜ4
उस (रात) में तमाम तत्वदर्शिता युक्त मामलों का फ़ैसला किया जाता है,
اَمْرًا مِنْ عِنْدِنَاۜ اِنَّا كُنَّا مُرْسِل۪ينَۚ5
हमारे यहाँ से आदेश के रूप में। निस्संदेह रसूलों को भेजनेवाले हम ही है। -
رَحْمَةً مِنْ رَبِّكَۜ اِنَّهُ هُوَ السَّم۪يعُ الْعَل۪يمُۙ6
तुम्हारे रब की दयालुता के कारण। निस्संदेह वही सब कुछ सुननेवाला, जाननेवाला है
رَبِّ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَاۢ اِنْ كُنْتُمْ مُوقِن۪ينَ7
आकाशों और धरती का रब और जो कुछ उन दोनों के बीच है उसका भी, यदि तुम विश्वास रखनेवाले हो (तो विश्वास करो कि किताब का अवतरण अल्लाह की दयालुता है)
لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَ يُحْي۪ وَيُم۪يتُۜ رَبُّكُمْ وَرَبُّ اٰبَٓائِكُمُ الْاَوَّل۪ينَ8
उसके अतिरिक्त कोई पूज्य-प्रभु नहीं; वही जीवित करता और मारता है; तुम्हारा रब और तुम्हारे अगले बाप-दादों का रब है
بَلْ هُمْ ف۪ي شَكٍّ يَلْعَبُونَ9
बल्कि वे संदेह में पड़े रहे हैं
فَارْتَقِبْ يَوْمَ تَاْتِي السَّمَٓاءُ بِدُخَانٍ مُب۪ينٍۙ10
अच्छा तो तुम उस दिन की प्रतीक्षा करो, जब आकाश प्रत्यक्ष धुँआ लाएगा।
يَغْشَى النَّاسَۜ هٰذَا عَذَابٌ اَل۪يمٌ11
वह लोगों का ढाँक लेगा। यह है दुखद यातना!
رَبَّنَا اكْشِفْ عَنَّا الْعَذَابَ اِنَّا مُؤْمِنُونَ12
वे कहेंगे, "ऐ हमारे रब! हमपर से यातना हटा दे। हम ईमान लाते है।"
اَنّٰى لَهُمُ الذِّكْرٰى وَقَدْ جَٓاءَهُمْ رَسُولٌ مُب۪ينٌۙ13
अब उनके होश में आने का मौक़ा कहाँ बाक़ी रहा। उनका हाल तो यह है कि उनके पास साफ़-साफ़ बतानेवाला एक रसूल आ चुका है।
ثُمَّ تَوَلَّوْا عَنْهُ وَقَالُوا مُعَلَّمٌ مَجْنُونٌۢ14
फिर उन्होंने उसकी ओर से मुँह मोड़ लिया और कहने लगे, "यह तो एक सिखाया-पढ़ाया दीवाना है।"
اِنَّا كَاشِفُوا الْعَذَابِ قَل۪يلًا اِنَّكُمْ عَٓائِدُونَۢ15
"हम यातना थोड़ा हटा देते है तो तुम पुनः फिर जाते हो।
يَوْمَ نَبْطِشُ الْبَطْشَةَ الْكُبْرٰىۚ اِنَّا مُنْتَقِمُونَ16
याद रखो, जिस दिन हम बड़ी पकड़ पकड़ेंगे, तो निश्चय ही हम बदला लेकर रहेंगे
وَلَقَدْ فَتَنَّا قَبْلَهُمْ قَوْمَ فِرْعَوْنَ وَجَٓاءَهُمْ رَسُولٌ كَر۪يمٌۙ17
उनसे पहले हम फ़िरऔन की क़ौम के लोगों को परीक्षा में डाल चुके हैं, जबकि उनके पास एक अत्यन्त सज्जन रसूल आया
اَنْ اَدُّٓوا اِلَيَّ عِبَادَ اللّٰهِۜ اِنّ۪ي لَكُمْ رَسُولٌ اَم۪ينٌۙ18
कि "तुम अल्लाह के बन्दों को मेरे हवाले कर दो। निश्चय ही मै तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूँ