499. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
45 · अल-जासिया
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
حٰمٓۜ1
हा॰ मीम॰
تَنْز۪يلُ الْكِتَابِ مِنَ اللّٰهِ الْعَز۪يزِ الْحَك۪يمِ2
इस किताब का अवतरण अल्लाह की ओर से है, जो अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है। -
اِنَّ فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ لَاٰيَاتٍ لِلْمُؤْمِن۪ينَ3
निस्संदेह आकाशों और धरती में ईमानवालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ है
وَف۪ي خَلْقِكُمْ وَمَا يَبُثُّ مِنْ دَٓابَّةٍ اٰيَاتٌ لِقَوْمٍ يُوقِنُونَۜ4
और तुम्हारी संरचना में, और उनकी भी जो जानवर वह फैलाता रहता है, निशानियाँ है उन लोगों के लिए जो विश्वास करें
وَاخْتِلَافِ الَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَمَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ مِنَ السَّمَٓاءِ مِنْ رِزْقٍ فَاَحْيَا بِهِ الْاَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا وَتَصْر۪يفِ الرِّيَاحِ اٰيَاتٌ لِقَوْمٍ يَعْقِلُونَۙ5
और रात और दिन के उलट-फेर में भी, और उस रोज़ी (पानी) में भी जिसे अल्लाह ने आकाश से उतारा, फिर उसके द्वारा धरती को उसके उन मुर्दा हो जाने के पश्चात जीवित किया और हवाओं की गर्दिश में भीलोगों के लिए बहुत-सी निशानियाँ है जो बुद्धि से काम लें
تِلْكَ اٰيَاتُ اللّٰهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِالْحَقِّۚ فَبِاَيِّ حَد۪يثٍ بَعْدَ اللّٰهِ وَاٰيَاتِه۪ يُؤْمِنُونَ6
ये अल्लाह की आयतें हैं, हम उन्हें हक़ के साथ तुमको सुना रहे हैं। अब आख़िर अल्लाह और उसकी आयतों के पश्चात और कौन-सी बात है जिसपर वे ईमान लाएँगे?
وَيْلٌ لِكُلِّ اَفَّاكٍ اَث۪يمٍۙ7
तबाही है हर झूठ घड़नेवाले गुनहगार के लिए,
يَسْمَعُ اٰيَاتِ اللّٰهِ تُتْلٰى عَلَيْهِ ثُمَّ يُصِرُّ مُسْتَكْبِرًا كَاَنْ لَمْ يَسْمَعْهَاۚ فَبَشِّرْهُ بِعَذَابٍ اَل۪يمٍ8
जो अल्लाह की उन आयतों को सुनता है जो उसे पढ़कर सुनाई जाती है। फिर घमंड के साथ अपनी (इनकार की) नीति पर अड़ा रहता है मानो उसने उनको सुना ही नहीं। अतः उसको दुखद यातना की शुभ सूचना दे दो
وَاِذَا عَلِمَ مِنْ اٰيَاتِنَا شَيْـًٔاۨ اتَّخَذَهَا هُزُوًاۜ اُو۬لٰٓئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُه۪ينٌۜ9
जब हमारी आयतों में से कोई बात वह जान लेता है तो वह उनका परिहास करता है, ऐसे लोगों के लिए रुसवा कर देनेवाली यातना है
مِنْ وَرَٓائِهِمْ جَهَنَّمُۚ وَلَا يُغْن۪ي عَنْهُمْ مَا كَسَبُوا شَيْـًٔا وَلَا مَا اتَّخَذُوا مِنْ دُونِ اللّٰهِ اَوْلِيَٓاءَۚ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظ۪يمٌۜ10
उनके आगे जहन्नम है, जो उन्होंने कमाया वह उनके कुछ काम न आएगा और न यही कि उन्होंने अल्लाह को छोड़कर अपने संरक्षक ठहरा रखे है। उनके लिए तो बड़ी यातना है
هٰذَا هُدًىۚ وَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِاٰيَاتِ رَبِّهِمْ لَهُمْ عَذَابٌ مِنْ رِجْزٍ اَل۪يمٍ۟11
यह सर्वथा मार्गदर्शन है। और जिन लोगों ने अपने रब की आयतों को इनकार किया, उनके लिए हिला देनेवाली दुखद यातना है
اَللّٰهُ الَّذ۪ي سَخَّرَ لَكُمُ الْبَحْرَ لِتَجْرِيَ الْفُلْكُ ف۪يهِ بِاَمْرِه۪ وَلِتَبْتَغُوا مِنْ فَضْلِه۪ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَۚ12
वह अल्लाह ही है जिसने समुद्र को तुम्हारे लिए वशीभूत कर दिया है, ताकि उसके आदेश से नौकाएँ उसमें चलें; और ताकि तुम उसका उदार अनुग्रह तलाश करो; और इसलिए कि तुम कृतज्ञता दिखाओ
وَسَخَّرَ لَكُمْ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِ جَم۪يعًا مِنْهُۜ اِنَّ ف۪ي ذٰلِكَ لَاٰيَاتٍ لِقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ13
जो चीज़ें आकाशों में है और जो धरती में हैं, उसने उन सबको अपनी ओर से तुम्हारे काम में लगा रखा है। निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ है जो सोच-विचार से काम लेते है