5. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

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2 · अल-बक़रा
وَبَشِّرِ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ اَنَّ لَهُمْ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُۜ كُلَّمَا رُزِقُوا مِنْهَا مِنْ ثَمَرَةٍ رِزْقًاۙ قَالُوا هٰذَا الَّذ۪ي رُزِقْنَا مِنْ قَبْلُ وَاُتُوا بِه۪ مُتَشَابِهًاۜ وَلَهُمْ ف۪يهَٓا اَزْوَاجٌ مُطَهَّرَةٌ وَهُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ25
जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उन्हें शुभ सूचना दे दो कि उनके लिए ऐसे बाग़ है जिनके नीचे नहरें बह रहीं होगी; जब भी उनमें से कोई फल उन्हें रोजी के रूप में मिलेगा, तो कहेंगे, "यह तो वही हैं जो पहले हमें मिला था," और उन्हें मिलता-जुलता ही (फल) मिलेगा; उनके लिए वहाँ पाक-साफ़ पत्नि याँ होगी, और वे वहाँ सदैव रहेंगे
اِنَّ اللّٰهَ لَا يَسْتَحْي۪ٓ اَنْ يَضْرِبَ مَثَلًا مَا بَعُوضَةً فَمَا فَوْقَهَاۜ فَاَمَّا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا فَيَعْلَمُونَ اَنَّهُ الْحَقُّ مِنْ رَبِّهِمْۚ وَاَمَّا الَّذ۪ينَ كَفَرُوا فَيَقُولُونَ مَاذَٓا اَرَادَ اللّٰهُ بِهٰذَا مَثَلًاۢ يُضِلُّ بِه۪ كَث۪يرًا وَيَهْد۪ي بِه۪ كَث۪يرًاۜ وَمَا يُضِلُّ بِه۪ٓ اِلَّا الْفَاسِق۪ينَۙ26
निस्संदेह अल्लाह नहीं शरमाता कि वह कोई मिसाल पेश करे चाहे वह हो मच्छर की, बल्कि उससे भी बढ़कर किसी तुच्छ चीज़ की। फिर जो ईमान लाए है वे तो जानते है कि वह उनके रब की ओर से सत्य हैं; रहे इनकार करनेवाले तो वे कहते है, "इस मिसाल से अल्लाह का अभिप्राय क्या है?" इससे वह बहुतों को भटकने देता है और बहुतों को सीधा मार्ग दिखा देता है, मगर इससे वह केवल अवज्ञाकारियों ही को भटकने देता है
اَلَّذ۪ينَ يَنْقُضُونَ عَهْدَ اللّٰهِ مِنْ بَعْدِ م۪يثَاقِه۪ۖ وَيَقْطَعُونَ مَٓا اَمَرَ اللّٰهُ بِه۪ٓ اَنْ يُوصَلَ وَيُفْسِدُونَ فِي الْاَرْضِۜ اُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ27
जो अल्लाह की प्रतिज्ञा को उसे सुदृढ़ करने के पश्चात भंग कर देते हैं और जिसे अल्लाह ने जोड़ने का आदेश दिया है उसे काट डालते हैं, और ज़मीन में बिगाड़ पैदा करते हैं, वही हैं जो घाटे में हैं
كَيْفَ تَكْفُرُونَ بِاللّٰهِ وَكُنْتُمْ اَمْوَاتًا فَاَحْيَاكُمْۚ ثُمَّ يُم۪يتُكُمْ ثُمَّ يُحْي۪يكُمْ ثُمَّ اِلَيْهِ تُرْجَعُونَ28
तुम अल्लाह के साथ अविश्वास की नीति कैसे अपनाते हो, जबकि तुम निर्जीव थे तो उसने तुम्हें जीवित किया, फिर वही तुम्हें मौत देता हैं, फिर वही तुम्हें जीवित करेगा, फिर उसी की ओर तुम्हें लौटना हैं?
هُوَ الَّذ۪ي خَلَقَ لَكُمْ مَا فِي الْاَرْضِ جَم۪يعًا ثُمَّ اسْتَوٰٓى اِلَى السَّمَٓاءِ فَسَوّٰيهُنَّ سَبْعَ سَمٰوَاتٍۜ وَهُوَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَل۪يمٌ۟29
वही तो है जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन की सारी चीज़े पैदा की, फिर आकाश की ओर रुख़ किया और ठीक तौर पर सात आकाश बनाए और वह हर चीज़ को जानता है