50. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

50. पृष्ठ
3 · आले-इमरान
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
الٓمٓۚ1
अलीफ़॰ लाम॰ मीम॰
اَللّٰهُ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۙ الْحَيُّ الْقَيُّومُۙ2
अल्लाह ही पूज्य हैं, उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। वह जीवन्त हैं, सबको सँम्भालने और क़ायम रखनेवाला
نَزَّلَ عَلَيْكَ الْكِتَابَ بِالْحَقِّ مُصَدِّقًا لِمَا بَيْنَ يَدَيْهِ وَاَنْزَلَ التَّوْرٰيةَ وَالْاِنْج۪يلَۙ3
उसने तुमपर हक़ के साथ किताब उतारी जो पहले की (किताबों की) पुष्टि करती हैं, और उसने तौरात और इंजील उतारी
مِنْ قَبْلُ هُدًى لِلنَّاسِ وَاَنْزَلَ الْفُرْقَانَۜ اِنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا بِاٰيَاتِ اللّٰهِ لَهُمْ عَذَابٌ شَد۪يدٌۜ وَاللّٰهُ عَز۪يزٌ ذُو انْتِقَامٍ4
इससे पहले लोगों के मार्गदर्शन के लिए और उसने कसौटी भी उतारी। निस्संदेह जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों का इनकार किया उनके लिए कठोर यातना हैं और अल्लाह प्रभुत्वशाली भी हैं और (बुराई का) बदला लेनेवाला भी
اِنَّ اللّٰهَ لَا يَخْفٰى عَلَيْهِ شَيْءٌ فِي الْاَرْضِ وَلَا فِي السَّمَٓاءِۜ5
निस्संदेह अल्लाह से कोई चीज़ न धरती में छिपी हैं और न आकाश में
هُوَ الَّذ۪ي يُصَوِّرُكُمْ فِي الْاَرْحَامِ كَيْفَ يَشَٓاءُۜ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ6
वही हैं जो गर्भाशयों में, जैसा चाहता हैं, तुम्हारा रूप देता हैं। उस प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी के अतिरिक्त कोई पूज्य-प्रभु नहीं
هُوَ الَّذ۪ٓي اَنْزَلَ عَلَيْكَ الْكِتَابَ مِنْهُ اٰيَاتٌ مُحْكَمَاتٌ هُنَّ اُمُّ الْكِتَابِ وَاُخَرُ مُتَشَابِهَاتٌۜ فَاَمَّا الَّذ۪ينَ ف۪ي قُلُوبِهِمْ زَيْغٌ فَيَتَّبِعُونَ مَا تَشَابَهَ مِنْهُ ابْتِغَٓاءَ الْفِتْنَةِ وَابْتِغَٓاءَ تَاْو۪يلِه۪ۚ وَمَا يَعْلَمُ تَاْو۪يلَهُٓ اِلَّا اللّٰهُۢ وَالرَّاسِخُونَ فِي الْعِلْمِ يَقُولُونَ اٰمَنَّا بِه۪ۙ كُلٌّ مِنْ عِنْدِ رَبِّنَاۚ وَمَا يَذَّكَّرُ اِلَّٓا اُو۬لُوا الْاَلْبَابِ7
वही हैं जिसने तुमपर अपनी ओर से किताब उतारी, वे सुदृढ़ आयतें हैं जो किताब का मूल और सारगर्भित रूप हैं और दूसरी उपलक्षित, तो जिन लोगों के दिलों में टेढ़ हैं वे फ़ितना (गुमराही) का तलाश और उसके आशय और परिणाम की चाह में उसका अनुसरण करते हैं जो उपलक्षित हैं। जबकि उनका परिणाम बस अल्लाह ही जानता हैं, और वे जो ज्ञान में पक्के हैं, वे कहते हैं, "हम उसपर ईमान लाए, जो हर एक हमारे रब ही की ओर से हैं।" और चेतते तो केवल वही हैं जो बुद्धि और समझ रखते हैं
رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ اِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةًۚ اِنَّكَ اَنْتَ الْوَهَّابُ8
हमारे रब! जब तू हमें सीधे मार्ग पर लगा चुका है तो इसके पश्चात हमारे दिलों में टेढ़ न पैदा कर और हमें अपने पास से दयालुता प्रदान कर। निश्चय ही तू बड़ा दाता है
رَبَّنَٓا اِنَّكَ جَامِعُ النَّاسِ لِيَوْمٍ لَا رَيْبَ ف۪يهِۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يُخْلِفُ الْم۪يعَادَ۟9
हमारे रब! तू लोगों को एक दिन इकट्ठा करने वाला है, जिसमें कोई संदेह नही। निस्सन्देह अल्लाह अपने वचन के विरुद्ध जाने वाला नही है