500. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
45 · अल-जासिया
قُلْ لِلَّذ۪ينَ اٰمَنُوا يَغْفِرُوا لِلَّذ۪ينَ لَا يَرْجُونَ اَيَّامَ اللّٰهِ لِيَجْزِيَ قَوْمًا بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ14
जो लोग ईमान लाए उनसे कह दो कि, "वे उन लोगों को क्षमा करें (उनकी करतूतों पर ध्यान न दे) अल्लाह के दिनों की आशा नहीं रखते, ताकि वह इसके परिणामस्वरूप उन लोगों को उनकी अपनी कमाई का बदला दे
مَنْ عَمِلَ صَالِحًا فَلِنَفْسِه۪ۚ وَمَنْ اَسَٓاءَ فَعَلَيْهَاۘ ثُمَّ اِلٰى رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ15
जो कुछ अच्छा कर्म करता है तो अपने ही लिए करेगा और जो कोई बुरा कर्म करता है तो उसका वबाल उसी पर होगा। फिर तुम अपने रब की ओर लौटाये जाओगे
وَلَقَدْ اٰتَيْنَا بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ الْكِتَابَ وَالْحُكْمَ وَالنُّبُوَّةَ وَرَزَقْنَاهُمْ مِنَ الطَّيِّبَاتِ وَفَضَّلْنَاهُمْ عَلَى الْعَالَم۪ينَۚ16
निश्चय ही हमने इसराईल की सन्तान को किताब और हुक्म और पैग़म्बरी प्रदान की थी। और हमने उन्हें पवित्र चीज़ो की रोज़ी दी और उन्हें सारे संसारवालों पर श्रेष्ठता प्रदान की
وَاٰتَيْنَاهُمْ بَيِّنَاتٍ مِنَ الْاَمْرِۚ فَمَا اخْتَلَفُٓوا اِلَّا مِنْ بَعْدِ مَا جَٓاءَهُمُ الْعِلْمُۙ بَغْيًا بَيْنَهُمْۜ اِنَّ رَبَّكَ يَقْض۪ي بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيٰمَةِ ف۪يمَا كَانُوا ف۪يهِ يَخْتَلِفُونَ17
और हमने उन्हें इस मामले के विषय में स्पष्ट निशानियाँ प्रदान कीं। फिर जो भी विभेद उन्होंने किया, वह इसके पश्चात ही किया कि उनके पास ज्ञान आ चुका था और इस कारण कि वे परस्पर एक-दूसरे पर ज़्यादती करना चाहते थे। निश्चय ही तुम्हारा रब क़ियामत के दिन उनके बीच उन चीज़ों के बारे में फ़ैसला कर देगा, जिनमें वे परस्पर विभेद करते रहे है
ثُمَّ جَعَلْنَاكَ عَلٰى شَر۪يعَةٍ مِنَ الْاَمْرِ فَاتَّبِعْهَا وَلَا تَتَّبِعْ اَهْوَٓاءَ الَّذ۪ينَ لَا يَعْلَمُونَ18
फिर हमने तुम्हें इस मामलें में एक खुले मार्ग (शरीअत) पर कर दिया। अतः तुम उसी पर चलो और उन लोगों की इच्छाओं का अनुपालन न करना जो जानते नहीं
اِنَّهُمْ لَنْ يُغْنُوا عَنْكَ مِنَ اللّٰهِ شَيْـًٔاۜ وَاِنَّ الظَّالِم۪ينَ بَعْضُهُمْ اَوْلِيَٓاءُ بَعْضٍۚ وَاللّٰهُ وَلِيُّ الْمُتَّق۪ينَ19
वे अल्लाह के मुक़ाबले में तुम्हारे कदापि कुछ काम नहीं आ सकते। निश्चय ही ज़ालिम लोग एक-दूसरे के साथी है और डर रखनेवालों का साथी अल्लाह है
هٰذَا بَصَٓائِرُ لِلنَّاسِ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِقَوْمٍ يُوقِنُونَ20
वह लोगों के लिए सूझ के प्रकाशों का पुंज है, और मार्गदर्शन और दयालुता है उन लोगों के लिए जो विश्वास करें
اَمْ حَسِبَ الَّذ۪ينَ اجْتَرَحُوا السَّيِّـَٔاتِ اَنْ نَجْعَلَهُمْ كَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِۙ سَوَٓاءً مَحْيَاهُمْ وَمَمَاتُهُمْۜ سَٓاءَ مَا يَحْكُمُونَ۟21
(क्या मार्गदर्शन और पथभ्रष्ट ता समान है) या वे लोग, जिन्होंने बुराइयाँ कमाई है, यह समझ बैठे हैं कि हम उन्हें उन लोगों जैसा कर देंगे जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए कि उनका जीना और मरना समान हो जाए? बहुत ही बुरा है जो निर्णय वे करते है!
وَخَلَقَ اللّٰهُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ بِالْحَقِّ وَلِتُجْزٰى كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ22
अल्लाह ने आकाशों और धरती को हक़ के साथ पैदा किया और इसलिए कि प्रत्येक व्यक्ति को उसकी कमाई का बदला दिया जाए और उनपर ज़ुल्म न किया जाए