501. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

501. पृष्ठ
45 · अल-जासिया
اَفَرَاَيْتَ مَنِ اتَّخَذَ اِلٰهَهُ هَوٰيهُ وَاَضَلَّهُ اللّٰهُ عَلٰى عِلْمٍ وَخَتَمَ عَلٰى سَمْعِه۪ وَقَلْبِه۪ وَجَعَلَ عَلٰى بَصَرِه۪ غِشَاوَةًۜ فَمَنْ يَهْد۪يهِ مِنْ بَعْدِ اللّٰهِۜ اَفَلَا تَذَكَّرُونَ23
क्या तुमने उस व्यक्ति को नहीं देखा जिसने अपनी इच्छा ही को अपना उपास्य बना लिया? अल्लाह ने (उसकी स्थिति) जानते हुए उसे गुमराही में डाल दिया, और उसके कान और उसके दिल पर ठप्पा लगा दिया और उसकी आँखों पर परदा डाल दिया। फिर अब अल्लाह के पश्चात कौन उसे मार्ग पर ला सकता है? तो क्या तुम शिक्षा नहीं ग्रहण करते?
وَقَالُوا مَا هِيَ اِلَّا حَيَاتُنَا الدُّنْيَا نَمُوتُ وَنَحْيَا وَمَا يُهْلِكُنَٓا اِلَّا الدَّهْرُۚ وَمَا لَهُمْ بِذٰلِكَ مِنْ عِلْمٍۚ اِنْ هُمْ اِلَّا يَظُنُّونَ24
वे कहते है, "वह तो बस हमारा सांसारिक जीवन ही है। हम मरते और जीते है। हमें तो बस काल (समय) ही विनष्ट करता है।" हालाँकि उनके पास इसका कोई ज्ञान नहीं। वे तो बस अटकलें ही दौड़ाते है
وَاِذَا تُتْلٰى عَلَيْهِمْ اٰيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ مَا كَانَ حُجَّتَهُمْ اِلَّٓا اَنْ قَالُوا ائْتُوا بِاٰبَٓائِنَٓا اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ25
और जब उनके सामने हमारी स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती है, तो उनकी हुज्जत इसके सिवा कुछ और नहीं होती कि वे कहते है, "यदि तुम सच्चे हो तो हमारे बाप-दादा को ले आओ।"
قُلِ اللّٰهُ يُحْي۪يكُمْ ثُمَّ يُم۪يتُكُمْ ثُمَّ يَجْمَعُكُمْ اِلٰى يَوْمِ الْقِيٰمَةِ لَا رَيْبَ ف۪يهِ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ۟26
कह दो, "अल्लाह ही तुम्हें जीवन प्रदान करता है। फिर वहीं तुम्हें मृत्यु देता है। फिर वही तुम्हें क़ियामत के दिन तक इकट्ठा कर रहा है, जिसमें कोई संदेह नहीं। किन्तु अधिकतर लोग जानते नहीं
وَلِلّٰهِ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يَوْمَئِذٍ يَخْسَرُ الْمُبْطِلُونَ27
आकाशों और धरती की बादशाही अल्लाह ही की है। और जिस दिन वह घड़ी घटित होगी उस दिन झूठवाले घाटे में होंगे
وَتَرٰى كُلَّ اُمَّةٍ جَاثِيَةً۠ كُلُّ اُمَّةٍ تُدْعٰٓى اِلٰى كِتَابِهَاۜ اَلْيَوْمَ تُجْزَوْنَ مَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ28
और तुम प्रत्येक गिरोह को घुटनों के बल झुका हुआ देखोगे। प्रत्येक गिरोह अपनी किताब की ओर बुलाया जाएगा, "आज तुम्हें उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम करते थे
هٰذَا كِتَابُنَا يَنْطِقُ عَلَيْكُمْ بِالْحَقِّۜ اِنَّا كُنَّا نَسْتَنْسِخُ مَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ29
"यह हमारी किताब है, जो तुम्हारे मुक़ाबले में ठीक-ठीक बोल रही है। निश्चय ही हम लिखवाते रहे हैं जो कुछ तुम करते थे।"
فَاَمَّا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَيُدْخِلُهُمْ رَبُّهُمْ ف۪ي رَحْمَتِه۪ۜ ذٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْمُب۪ينُ30
अतः जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उन्हें उनका रब अपनी दयालुता में दाख़िल करेगा, यही स्पष्ट सफलता है
وَاَمَّا الَّذ۪ينَ كَفَرُوا۠ اَفَلَمْ تَكُنْ اٰيَات۪ي تُتْلٰى عَلَيْكُمْ فَاسْتَكْبَرْتُمْ وَكُنْتُمْ قَوْمًا مُجْرِم۪ينَ31
रहे वे लोग जिन्होंने इनकार किया (उनसे कहा जाएगा,) "क्या तुम्हें हमारी आयतें पढ़कर नहीं सुनाई जाती थी? किन्तु तुमने घमंड किया और तुम थे ही अपराधी लोग
وَاِذَا ق۪يلَ اِنَّ وَعْدَ اللّٰهِ حَقٌّ وَالسَّاعَةُ لَا رَيْبَ ف۪يهَا قُلْتُمْ مَا نَدْر۪ي مَا السَّاعَةُۙ اِنْ نَظُنُّ اِلَّا ظَنًّا وَمَا نَحْنُ بِمُسْتَيْقِن۪ينَ32
और जब कहा जाता था कि अल्लाह का वादा सच्चा है और (क़ियामत की) घड़ी में कोई संदेह नहीं हैं। तो तुम कहते थे, "हम नहीं जानते कि वह घड़ी क्या हैं? तो तुम कहते थे, 'हम नहीं जानते कि वह घड़ी क्या है? हमें तो बस एक अनुमान-सा प्रतीत होता है और हमें विश्वास नहीं होता।'"