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502. पृष्ठ
45 · अल-जासिया
وَبَدَا لَهُمْ سَيِّـَٔاتُ مَا عَمِلُوا وَحَاقَ بِهِمْ مَا كَانُوا بِه۪ يَسْتَهْزِؤُ۫نَ33
और जो कुछ वे करते रहे उसकी बुराइयाँ उनपर प्रकट हो गई और जिस चीज़ का वे परिहास करते थे उसी ने उन्हें आ घेरा
وَق۪يلَ الْيَوْمَ نَنْسٰيكُمْ كَمَا نَس۪يتُمْ لِقَٓاءَ يَوْمِكُمْ هٰذَا وَمَاْوٰيكُمُ النَّارُ وَمَا لَكُمْ مِنْ نَاصِر۪ينَ34
और कह दिया जाएगा कि "आज हम तुम्हें भुला देते हैं जैसे तुमने इस दिन की भेंट को भुला रखा था। तुम्हारा ठिकाना अब आग है और तुम्हारा कोई सहायक नहीं
ذٰلِكُمْ بِاَنَّكُمُ اتَّخَذْتُمْ اٰيَاتِ اللّٰهِ هُزُوًا وَغَرَّتْكُمُ الْحَيٰوةُ الدُّنْيَاۚ فَالْيَوْمَ لَا يُخْرَجُونَ مِنْهَا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ35
यह इस कारण कि तुमने अल्लाह की आयतों की हँसी उड़ाई थी और सांसारिक जीवन ने तुम्हें धोखे में डाले रखा।" अतः आज वे न तो उससे निकाले जाएँगे और न उनसे यह चाहा जाएगा कि वे किसी उपाय से (अल्लाह के) प्रकोप को दूर कर सकें
فَلِلّٰهِ الْحَمْدُ رَبِّ السَّمٰوَاتِ وَرَبِّ الْاَرْضِ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ36
अतः सारी प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है जो आकाशों का रब और घरती का रब, सारे संसार का रब है
وَلَهُ الْكِبْرِيَٓاءُ فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۖ وَهُوَ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ37
आकाशों और धरती में बड़ाई उसी के लिए है, और वही प्रभुत्वशाली, अत्यन्त तत्वदर्शी है
46 · अल-अहक़ाफ़
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
حٰمٓ1
हा॰ मीम॰
تَنْز۪يلُ الْكِتَابِ مِنَ اللّٰهِ الْعَز۪يزِ الْحَك۪يمِ2
इस किताब का अवतरण अल्लाह की ओर से है, जो प्रभुत्वशाली, अत्यन्त तत्वदर्शी है
مَا خَلَقْنَا السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَٓا اِلَّا بِالْحَقِّ وَاَجَلٍ مُسَمًّىۜ وَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا عَمَّٓا اُنْذِرُوا مُعْرِضُونَ3
हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उन दोनों के मध्य है उसे केवल हक़ के साथ और एक नियत अवधि तक के लिए पैदा किया है। किन्तु जिन लोगों ने इनकार किया है, वे उस चीज़ को ध्यान में नहीं लाते जिससे उन्हें सावधान किया गया है
قُلْ اَرَاَيْتُمْ مَا تَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللّٰهِ اَرُون۪ي مَاذَا خَلَقُوا مِنَ الْاَرْضِ اَمْ لَهُمْ شِرْكٌ فِي السَّمٰوَاتِۜ ا۪يتُون۪ي بِكِتَابٍ مِنْ قَبْلِ هٰذَٓا اَوْ اَثَارَةٍ مِنْ عِلْمٍ اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ4
कहो, "क्या तुमने उनको देखा भी, जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पुकारते हो? मुझे दिखाओ उन्होंने धरती की चीज़ों में से क्या पैदा किया है या आकाशों में उनकी कोई साझेदारी है? मेरे पास इससे पहले की कोई किताब ले आओ या ज्ञान की कोई अवशेष बात ही, यदि तुम सच्चे हो।"
وَمَنْ اَضَلُّ مِمَّنْ يَدْعُوا مِنْ دُونِ اللّٰهِ مَنْ لَا يَسْتَج۪يبُ لَهُٓ اِلٰى يَوْمِ الْقِيٰمَةِ وَهُمْ عَنْ دُعَٓائِهِمْ غَافِلُونَ5
आख़़िर उस व्यक्ति से बढ़कर पथभ्रष्ट और कौन होगा, जो अल्लाह से हटकर उन्हें पुकारता हो जो क़ियामत के दिन तक उसकी पुकार को स्वीकार नहीं कर सकते, बल्कि वे तो उनकी पुकार से भी बेख़बर है;