503. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
46 · अल-अहक़ाफ़
وَاِذَا حُشِرَ النَّاسُ كَانُوا لَهُمْ اَعْدَٓاءً وَكَانُوا بِعِبَادَتِهِمْ كَافِر۪ينَ6
और जब लोग इकट्ठे किए जाएँगे तो वे उनके शत्रु होंगे औऱ उनकी बन्दगी का इनकार करेंगे
وَاِذَا تُتْلٰى عَلَيْهِمْ اٰيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ قَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لِلْحَقِّ لَمَّا جَٓاءَهُمْۙ هٰذَا سِحْرٌ مُب۪ينٌۜ7
जब हमारी स्पष्ट आयतें उन्हें पढ़कर सुनाई जाती है तो वे लोग जिन्होंने इनकार किया, सत्य के विषय में, जबकि वह उनके पास आ गया, कहते है कि "यह तो खुला जादू है।"
اَمْ يَقُولُونَ افْتَرٰيهُۜ قُلْ اِنِ افْتَرَيْتُهُ فَلَا تَمْلِكُونَ ل۪ي مِنَ اللّٰهِ شَيْـًٔاۜ هُوَ اَعْلَمُ بِمَا تُف۪يضُونَ ف۪يهِۜ كَفٰى بِه۪ شَه۪يدًا بَيْن۪ي وَبَيْنَكُمْۜ وَهُوَ الْغَفُورُ الرَّح۪يمُ8
(क्या ईमान लाने से उन्हें कोई चीज़ रोक रही है) या वे कहते है, "उसने इसे स्वयं ही घड़ लिया है?" कहो, "यदि मैंने इसे स्वयं घड़ा है तो अल्लाह के विरुद्ध मेरे लिए तुम कुछ भी अधिकार नहीं रखते। जिसके विषय में तुम बातें बनाने में लगे हो, वह उसे भली-भाँति जानता है। और वह मेरे और तुम्हारे बीच गवाह की हैसियत से काफ़ी है। और वही बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है।"
قُلْ مَا كُنْتُ بِدْعًا مِنَ الرُّسُلِ وَمَٓا اَدْر۪ي مَا يُفْعَلُ ب۪ي وَلَا بِكُمْۜ اِنْ اَتَّبِعُ اِلَّا مَا يُوحٰٓى اِلَيَّ وَمَٓا اَنَا۬ اِلَّا نَذ۪يرٌ مُب۪ينٌ9
कह दो, "मैं कोई पहला रसूल तो नहीं हूँ। और मैं नहीं जानता कि मेरे साथ क्या किया जाएगा और न यह कि तुम्हारे साथ क्या किया जाएगा। मैं तो बस उसी का अनुगामी हूँ, जिसकी प्रकाशना मेरी ओर की जाती है और मैं तो केवल एक स्पष्ट सावधान करनेवाला हूँ।"
قُلْ اَرَاَيْتُمْ اِنْ كَانَ مِنْ عِنْدِ اللّٰهِ وَكَفَرْتُمْ بِه۪ وَشَهِدَ شَاهِدٌ مِنْ بَن۪ٓي اِسْرَٓاء۪يلَ عَلٰى مِثْلِه۪ فَاٰمَنَ وَاسْتَكْبَرْتُمْۜ اِنَّ اللّٰهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِم۪ينَ۟10
कहो, "क्या तुमने सोचा भी (कि तुम्हारा क्या परिणाम होगा)? यदि वह (क़ुरआन) अल्लाह के यहाँ से हुआ और तुमने उसका इनकार कर दिया, हालाँकि इसराईल की सन्तान में से एक गवाह ने उसके एक भाग की गवाही भी दी। सो वह ईमान ले आया और तुम घमंड में पड़े रहे। अल्लाह तो ज़ालिम लोगों को मार्ग नहीं दिखाता।"
وَقَالَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لِلَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَوْ كَانَ خَيْرًا مَا سَبَقُونَٓا اِلَيْهِۜ وَاِذْ لَمْ يَهْتَدُوا بِه۪ فَسَيَقُولُونَ هٰذَٓا اِفْكٌ قَد۪يمٌ11
जिन लोगों ने इनकार किया, वे ईमान लानेवालों के बारे में कहते है, "यदि वह अच्छा होता तो वे उसकी ओर (बढ़ने में) हमसे अग्रसर न रहते।" औऱ जब उन्होंने उससे मार्ग ग्रहण नहीं किया तो अब अवश्य कहेंगे, "यह तो पुराना झूठ है!"
وَمِنْ قَبْلِه۪ كِتَابُ مُوسٰٓى اِمَامًا وَرَحْمَةًۜ وَهٰذَا كِتَابٌ مُصَدِّقٌ لِسَانًا عَرَبِيًّا لِيُنْذِرَ الَّذ۪ينَ ظَلَمُواۗ وَبُشْرٰى لِلْمُحْسِن۪ينَ12
हालाँकि इससे पहले मूसा की किताब पथप्रदर्शक और दयालुता रही है। और यह किताब, जो अरबी भाषा में है, उसकी पुष्टि में है, ताकि उन लोगों को सचेत कर दे जिन्होंने ज़ु्ल्म किया और शुभ सूचना हो उत्तमकारों के लिए
اِنَّ الَّذ۪ينَ قَالُوا رَبُّنَا اللّٰهُ ثُمَّ اسْتَقَامُوا فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَۚ13
निश्चय ही जिन लोगों ने कहा, "हमारा रब अल्लाह है।" फिर वे उसपर जमे रहे, तो उन्हें न तो कोई भय होगा और न वे शोकाकुल होगे
اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ الْجَنَّةِ خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۚ جَزَٓاءً بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ14
वही जन्नतवाले है, वहाँ वे सदैव रहेंगे उसके बदले में जो वे करते रहे है