505. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
46 · अल-अहक़ाफ़
وَاذْكُرْ اَخَا عَادٍۜ اِذْ اَنْذَرَ قَوْمَهُ بِالْاَحْقَافِ وَقَدْ خَلَتِ النُّذُرُ مِنْ بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِه۪ٓ اَلَّا تَعْبُدُٓوا اِلَّا اللّٰهَۜ اِنّ۪ٓي اَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظ۪يمٍ21
आद के भाई को याद करो, जबकि उसने अपनी क़ौम के लोगों को अहक़ाफ़ में सावधान किया, और उसके आगे और पीछे भी सावधान करनेवाले गुज़र चुके थे - कि, "अल्लाह के सिवा किसी की बन्दगी न करो। मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े दिन की यातना का भय है।"
قَالُٓوا اَجِئْتَنَا لِتَاْفِكَنَا عَنْ اٰلِهَتِنَاۚ فَاْتِنَا بِمَا تَعِدُنَٓا اِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِق۪ينَ22
उन्होंने कहा, "क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि झूठ बोलकर हमको अपने उपास्यों से विमुख कर दे? अच्छा, तो हमपर ले आ, जिसकी तू हमें धमकी देता है, यदि तू सच्चा है।"
قَالَ اِنَّمَا الْعِلْمُ عِنْدَ اللّٰهِۘ وَاُبَلِّغُكُمْ مَٓا اُرْسِلْتُ بِه۪ وَلٰكِنّ۪ٓي اَرٰيكُمْ قَوْمًا تَجْهَلُونَ23
उसने कहा, "ज्ञान तो अल्लाह ही के पास है (कि वह कब यातना लाएगा) । और मैं तो तुम्हें वह संदेश पहुँचा रहा हूँ जो मुझे देकर भेजा गया है। किन्तु मैं तुम्हें देख रहा हूँ कि तुम अज्ञानता से काम ले रहे हो।"
فَلَمَّا رَاَوْهُ عَارِضًا مُسْتَقْبِلَ اَوْدِيَتِهِمْۙ قَالُوا هٰذَا عَارِضٌ مُمْطِرُنَاۜ بَلْ هُوَ مَا اسْتَعْجَلْتُمْ بِه۪ۜ ر۪يحٌ ف۪يهَا عَذَابٌ اَل۪يمٌۙ24
फिर जब उन्होंने उसे बादल के रूप में देखा, जिसका रुख़ उनकी घाटियों की ओर था, तो वे कहने लगे, "यह बादल है जो हमपर बरसनेवाला है!' "नहीं, बल्कि यह तो वही चीज़ है जिसके लिए तुमने जल्दी मचा रखी थी। - यह वायु है जिसमें दुखद यातना है
تُدَمِّرُ كُلَّ شَيْءٍ بِاَمْرِ رَبِّهَا فَاَصْبَحُوا لَا يُرٰٓى اِلَّا مَسَاكِنُهُمْۜ كَذٰلِكَ نَجْزِي الْقَوْمَ الْمُجْرِم۪ينَ25
हर चीज़ को अपने रब के आदेश से विनष्ट- कर देगी।" अन्ततः वे ऐसे हो गए कि उनके रहने की जगहों के सिवा कुछ नज़र न आता था। अपराधी लोगों को हम इसी तरह बदला देते है
وَلَقَدْ مَكَّنَّاهُمْ ف۪يمَٓا اِنْ مَكَّنَّاكُمْ ف۪يهِ وَجَعَلْنَا لَهُمْ سَمْعًا وَاَبْصَارًا وَاَفْـِٔدَةًۘ فَمَٓا اَغْنٰى عَنْهُمْ سَمْعُهُمْ وَلَٓا اَبْصَارُهُمْ وَلَٓا اَفْـِٔدَتُهُمْ مِنْ شَيْءٍ اِذْ كَانُوا يَجْحَدُونَ بِاٰيَاتِ اللّٰهِ وَحَاقَ بِهِمْ مَا كَانُوا بِه۪ يَسْتَهْزِؤُ۫نَ۟26
हमने उन्हें उन चीज़ों में जमाव और सामर्थ्य प्रदान की थी, जिनमें तुम्हें जमाव और सामर्थ्य नहीं प्रदान की। औऱ हमने उन्हें कान, आँखें और दिल दिए थे। किन्तु न तो उनके कान उनके कुछ काम आए औऱ न उनकी आँखे और न उनके दिल ही। क्योंकि वे अल्लाह की आयतों का इनकार करते थे और जिस चीज़ की वे हँसी उड़ाते थे, उसी ने उन्हें आ घेरा
وَلَقَدْ اَهْلَكْنَا مَا حَوْلَكُمْ مِنَ الْقُرٰى وَصَرَّفْنَا الْاٰيَاتِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ27
हम तुम्हारे आस-पास की बस्तियों को विनष्ट कर चुके हैं, हालाँकि हमने तरह-तरह से आयते पेश की थीं, ताकि वे रुजू करें
فَلَوْلَا نَصَرَهُمُ الَّذ۪ينَ اتَّخَذُوا مِنْ دُونِ اللّٰهِ قُرْبَانًا اٰلِهَةًۜ بَلْ ضَلُّوا عَنْهُمْۚ وَذٰلِكَ اِفْكُهُمْ وَمَا كَانُوا يَفْتَرُونَ28
फिर क्यों न उन बस्तियों ने उसकी सहायता की जिनको उन्होंने अपने और अल्लाह का बीच माध्यम ठहराकर सामीप्य प्राप्त करने के लिए उपास्य बना लिया था? बल्कि वे उनसे गुम हो गए, और यह था उनका मिथ्यारोपण और वह कुछ जो वे घड़ते थे