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507. पृष्ठ
47 · मुहम्मद
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
اَلَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ اَضَلَّ اَعْمَالَهُمْ1
जिन लोगों ने इनकार किया और अल्लाह के मार्ग से रोका उनके कर्म उसने अकारथ कर दिए
وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَاٰمَنُوا بِمَا نُزِّلَ عَلٰى مُحَمَّدٍ وَهُوَ الْحَقُّ مِنْ رَبِّهِمْۙ كَفَّرَ عَنْهُمْ سَيِّـَٔاتِهِمْ وَاَصْلَحَ بَالَهُمْ2
रहे वे लोग जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए और उस चीज़ पर ईमान लाए जो मुहम्मद पर अवतरित किया गया - और वही सत्य है उनके रब की ओर से - उसने उसकी बुराइयाँ उनसे दूर कर दीं और उनका हाल ठीक कर दिया
ذٰلِكَ بِاَنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا اتَّبَعُوا الْبَاطِلَ وَاَنَّ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا اتَّبَعُوا الْحَقَّ مِنْ رَبِّهِمْۜ كَذٰلِكَ يَضْرِبُ اللّٰهُ لِلنَّاسِ اَمْثَالَهُمْ3
यह इसलिए कि जिन लोगों ने इनकार किया उन्होंने असत्य का अनुसरण किया और यह कि जो लोग ईमान लाए उन्होंने सत्य का अनुसरण किया, जो उनके रब की ओर से है। इस प्रकार अल्लाह लोगों के लिए उनकी मिसालें बयान करता है
فَاِذَا لَق۪يتُمُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا فَضَرْبَ الرِّقَابِۜ حَتّٰٓى اِذَٓا اَثْخَنْتُمُوهُمْ فَشُدُّوا الْوَثَاقَۙ فَاِمَّا مَنًّا بَعْدُ وَاِمَّا فِدَٓاءً حَتّٰى تَضَعَ الْحَرْبُ اَوْزَارَهَاۚۛ ذٰلِكَۜۛ وَلَوْ يَشَٓاءُ اللّٰهُ لَانْتَصَرَ مِنْهُمْۙ وَلٰكِنْ لِيَبْلُوَ۬ا بَعْضَكُمْ بِبَعْضٍۜ وَالَّذ۪ينَ قُتِلُوا ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ فَلَنْ يُضِلَّ اَعْمَالَهُمْ4
अतः जब इनकार करनेवालो से तुम्हारी मुठभेड़ हो तो (उनकी) गरदनें मारना है, यहाँ तक कि जब उन्हें अच्छी तरह कुचल दो तो बन्धनों में जकड़ो, फिर बाद में या तो एहसान करो या फ़िदया (अर्थ-दंड) का मामला करो, यहाँ तक कि युद्ध अपने बोझ उतारकर रख दे। यह भली-भाँति समझ लो, यदि अल्लाह चाहे तो स्वयं उनसे निपट ले। किन्तु (उसने या आदेश इसलिए दिया) ताकि तुम्हारी एक-दूसरे की परीक्षा ले। और जो लोग अल्लाह के मार्ग में मारे जाते है उनके कर्म वह कदापि अकारथ न करेगा
سَيَهْد۪يهِمْ وَيُصْلِحُ بَالَهُمْۚ5
वह उनका मार्गदर्शन करेगा और उनका हाल ठीक कर देगा
وَيُدْخِلُهُمُ الْجَنَّةَ عَرَّفَهَا لَهُمْ6
और उन्हें जन्नत में दाख़िल करेगा, जिससे वह उन्हें परिचित करा चुका है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اِنْ تَنْصُرُوا اللّٰهَ يَنْصُرْكُمْ وَيُثَبِّتْ اَقْدَامَكُمْ7
ऐ लोगों, जो ईमान लाए हो, यदि तुम अल्लाह की सहायता करोगे तो वह तुम्हारी सहायता करेगा और तुम्हारे क़दम जमा देगा
وَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا فَتَعْسًا لَهُمْ وَاَضَلَّ اَعْمَالَهُمْ8
रहे वे लोग जिन्होंने इनकार किया, तो उनके लिए तबाही है। और उनके कर्मों को अल्लाह ने अकारथ कर दिया
ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ كَرِهُوا مَٓا اَنْزَلَ اللّٰهُ فَاَحْبَطَ اَعْمَالَهُمْ9
यह इसलिए कि उन्होंने उस चीज़ को नापसन्द किया जिसे अल्लाह ने अवतरित किया, तो उसने उनके कर्म अकारथ कर दिए
اَفَلَمْ يَس۪يرُوا فِي الْاَرْضِ فَيَنْظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْۜ دَمَّرَ اللّٰهُ عَلَيْهِمْۘ وَلِلْكَافِر۪ينَ اَمْثَالُهَا10
क्या वे धरती में चले-फिरे नहीं कि देखते कि उन लोगों का कैसा परिणाम हुआ जो उनसे पहले गुज़र चुके है? अल्लाह ने उन्हें तहस-नहस कर दिया और इनकार करनेवालों के लिए ऐसे ही मामले होने है
ذٰلِكَ بِاَنَّ اللّٰهَ مَوْلَى الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَاَنَّ الْكَافِر۪ينَ لَا مَوْلٰى لَهُمْ۟11
यह इसलिए कि जो लोग ईमान लाए उनका संरक्षक अल्लाह है और यह कि इनकार करनेवालों को कोई संरक्षक नहीं