509. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
47 · मुहम्मद
وَيَقُولُ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَوْلَا نُزِّلَتْ سُورَةٌۚ فَاِذَٓا اُنْزِلَتْ سُورَةٌ مُحْكَمَةٌ وَذُكِرَ ف۪يهَا الْقِتَالُۙ رَاَيْتَ الَّذ۪ينَ ف۪ي قُلُوبِهِمْ مَرَضٌ يَنْظُرُونَ اِلَيْكَ نَظَرَ الْمَغْشِيِّ عَلَيْهِ مِنَ الْمَوْتِۜ فَاَوْلٰى لَهُمْۚ20
जो लोग ईमान लाए वे कहते है, "कोई सूरा क्यों नहीं उतरी?" किन्तु जब एक पक्की सूरा अवतरित की जाती है, जिसमें युद्ध का उल्लेख होता है, तो तुम उन लोगों को देखते हो जिनके दिलों में रोग है कि वे तुम्हारी ओर इस प्रकार देखते है जैसे किसी पर मृत्यु की बेहोशी छा गई हो। तो अफ़सोस है उनके हाल पर!
طَاعَةٌ وَقَوْلٌ مَعْرُوفٌ۠ فَاِذَا عَزَمَ الْاَمْرُ۠ فَلَوْ صَدَقُوا اللّٰهَ لَكَانَ خَيْرًا لَهُمْۚ21
उनके लिए उचित है आज्ञापालन और अच्छी-भली बात। फिर जब (युद्ध की) बात पक्की हो जाए (तो युद्ध करना चाहिए) तो यदि वे अल्लाह के लिए सच्चे साबित होते तो उनके लिए ही अच्छा होता
فَهَلْ عَسَيْتُمْ اِنْ تَوَلَّيْتُمْ اَنْ تُفْسِدُوا فِي الْاَرْضِ وَتُقَطِّعُٓوا اَرْحَامَكُمْ22
यदि तुम उल्टे फिर गए तो क्या तुम इससे निकट हो कि धरती में बिगाड़ पैदा करो और अपने नातों-रिश्तों को काट डालो?
اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ لَعَنَهُمُ اللّٰهُ فَاَصَمَّهُمْ وَاَعْمٰٓى اَبْصَارَهُمْ23
ये वे लोग है जिनपर अल्लाह ने लानत की और उन्हें बहरा और उनकी आँखों को अन्धा कर दिया
اَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ الْقُرْاٰنَ اَمْ عَلٰى قُلُوبٍ اَقْفَالُهَا24
तो क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते या उनके दिलों पर ताले लगे हैं?
اِنَّ الَّذ۪ينَ ارْتَدُّوا عَلٰٓى اَدْبَارِهِمْ مِنْ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ الْهُدَىۙ الشَّيْطَانُ سَوَّلَ لَهُمْۜ وَاَمْلٰى لَهُمْ25
वे लोग जो पीठ-फेरकर पलट गए, इसके पश्चात कि उनपर मार्ग स्पष्ट॥ हो चुका था, उन्हें शैतान ने बहका दिया और उसने उन्हें ढील दे दी
ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ قَالُوا لِلَّذ۪ينَ كَرِهُوا مَا نَزَّلَ اللّٰهُ سَنُط۪يعُكُمْ ف۪ي بَعْضِ الْاَمْرِۚ وَاللّٰهُ يَعْلَمُ اِسْرَارَهُمْ26
यह इसलिए कि उन्होंने उन लोगों से, जिन्होंने उस चीज़ को नापसन्द किया जो कुछ अल्लाह ने उतारा है, कहा कि "हम कुछ मामलों में तुम्हारी बात मान लेंगे।" अल्लाह उनकी गुप्त बातों को भली-भाँति जानता है
فَكَيْفَ اِذَا تَوَفَّتْهُمُ الْمَلٰٓئِكَةُ يَضْرِبُونَ وُجُوهَهُمْ وَاَدْبَارَهُمْ27
फिर उस समय क्या हाल होगा जब फ़रिश्तें उनके चहरों और उनकी पीठों पर मारते हुए उनकी रूह क़ब्ज़ करेंगे?
ذٰلِكَ بِاَنَّهُمُ اتَّبَعُوا مَٓا اَسْخَطَ اللّٰهَ وَكَرِهُوا رِضْوَانَهُ فَاَحْبَطَ اَعْمَالَهُمْ۟28
यह इसलिए कि उन्होंने उस चीज़ का अनुसरण किया जो अल्लाह को अप्रसन्न करनेवाली थी और उन्होंने उसकी ख़ुशी को नापसन्द किया तो उसने उनके कर्मों को अकारथ कर दिया
اَمْ حَسِبَ الَّذ۪ينَ ف۪ي قُلُوبِهِمْ مَرَضٌ اَنْ لَنْ يُخْرِجَ اللّٰهُ اَضْغَانَهُمْ29
(क्या अल्लाह से कोई चीज़ छिपी है) या जिन लोगों के दिलों में रोग है वे समझ बैठे है कि अल्लाह उनके द्वेषों को कदापि प्रकट न करेगा?