510. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

510. पृष्ठ
47 · मुहम्मद
وَلَوْ نَشَٓاءُ لَاَرَيْنَاكَهُمْ فَلَعَرَفْتَهُمْ بِس۪يمٰيهُمْۜ وَلَتَعْرِفَنَّهُمْ ف۪ي لَحْنِ الْقَوْلِۜ وَاللّٰهُ يَعْلَمُ اَعْمَالَكُمْ30
यदि हम चाहें तो उन्हें तुम्हें दिखा दें, फिर तुम उन्हें उनके लक्षणों से पहचान लो; किन्तु तुम उन्हें उनकी बातचीत के ढब से अवश्य पहचान लोगे। अल्लाह तो तुम्हारे कर्मों को जानता ही है
وَلَنَبْلُوَنَّكُمْ حَتّٰى نَعْلَمَ الْمُجَاهِد۪ينَ مِنْكُمْ وَالصَّابِر۪ينَۙ وَنَبْلُوَ۬ا اَخْبَارَكُمْ31
हम अवश्य तुम्हारी परीक्षा करेंगे, यहाँ तक कि हम तुममें से जो जिहाद करनेवाले है और जो दृढ़तापूर्वक जमे रहनेवाले है उनको जान ले और तुम्हारी हालतों को जाँच लें
اِنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ وَشَٓاقُّوا الرَّسُولَ مِنْ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ الْهُدٰىۙ لَنْ يَضُرُّوا اللّٰهَ شَيْـًٔاۜ وَسَيُحْبِطُ اَعْمَالَهُمْ32
जिन लोगों ने इसके पश्चात कि मार्ग उनपर स्पष्ट हो चुका था, इनकार किया और अल्लाह के मार्ग से रोका और रसूल का विरोध किया, वे अल्लाह को कदापि कोई हानि नहीं पहुँचा सकेंगे, बल्कि वही उनका सब किया-कराया उनकी जान को लागू कर देगा
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اَط۪يعُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُوا الرَّسُولَ وَلَا تُبْطِلُٓوا اَعْمَالَكُمْ33
ऐ ईमान लानेवालों! अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो और अपने कर्मों को विनष्ट न करो
اِنَّ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ ثُمَّ مَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ فَلَنْ يَغْفِرَ اللّٰهُ لَهُمْ34
निश्चय ही जिन लोगों ने इनकार किया और अल्लाह के मार्ग से रोका और इनकार करनेवाले ही रहकर मर गए, अल्लाह उन्हें कदापि क्षमा न करेगा
فَلَا تَهِنُوا وَتَدْعُٓوا اِلَى السَّلْمِۗ وَاَنْتُمُ الْاَعْلَوْنَۗ وَاللّٰهُ مَعَكُمْ وَلَنْ يَتِرَكُمْ اَعْمَالَكُمْ35
अतः ऐसा न हो कि तुम हिम्मत हार जाओ और सुलह का निमंत्रण देने लगो, जबकि तुम ही प्रभावी हो। अल्लाह तुम्हारे साथ है और वह तुम्हारे कर्मों (के फल) में तुम्हें कदापि हानि न पहुँचाएगा
اِنَّمَا الْحَيٰوةُ الدُّنْيَا لَعِبٌ وَلَهْوٌۜ وَاِنْ تُؤْمِنُوا وَتَتَّقُوا يُؤْتِكُمْ اُجُورَكُمْ وَلَا يَسْـَٔلْكُمْ اَمْوَالَكُمْ36
सांसारिक जीवन तो बस एक खेल और तमाशा है। और यदि तुम ईमान लाओ और डर रखो तो वह तुम्हारे कर्मफल तुम्हें प्रदान करेगा और तुमसे धन नही माँगेगा। -
اِنْ يَسْـَٔلْكُمُوهَا فَيُحْفِكُمْ تَبْخَلُوا وَيُخْرِجْ اَضْغَانَكُمْ37
और यदि वह उनको तुमसे माँगे और समेटकर तुमसे माँगे तो तुम कंजूसी करोगे। और वह तुम्हारे द्वेष को निकाल बाहर कर देगा
هَٓا اَنْتُمْ هٰٓؤُ۬لَٓاءِ تُدْعَوْنَ لِتُنْفِقُوا ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِۚ فَمِنْكُمْ مَنْ يَبْخَلُۚ وَمَنْ يَبْخَلْ فَاِنَّمَا يَبْخَلُ عَنْ نَفْسِه۪ۜ وَاللّٰهُ الْغَنِيُّ وَاَنْتُمُ الْفُقَرَٓاءُۚ وَاِنْ تَتَوَلَّوْا يَسْتَبْدِلْ قَوْمًا غَيْرَكُمْۙ ثُمَّ لَا يَكُونُٓوا اَمْثَالَكُمْ38
सुनो! यह तुम्ही लोग हो कि तुम्हें आमंत्रण दिया जा रहा है कि "अल्लाह के मार्ग में ख़र्च करो।" फिर तुमसे कुछ लोग है जो कंजूसी करते है। हालाँकि जो कंजूसी करता है वह वास्तव में अपने आप ही से कंजूसी करता है। अल्लाह तो निस्पृह है, तुम्हीं मुहताज हो। और यदि तुम फिर जाओ तो वह तुम्हारी जगह अन्य लोगों को ले आएगा; फिर वे तुम जैसे न होंगे