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512. पृष्ठ
48 · अल-फतह
اِنَّ الَّذ۪ينَ يُبَايِعُونَكَ اِنَّمَا يُبَايِعُونَ اللّٰهَۜ يَدُ اللّٰهِ فَوْقَ اَيْد۪يهِمْۚ فَمَنْ نَكَثَ فَاِنَّمَا يَنْكُثُ عَلٰى نَفْسِه۪ۚ وَمَنْ اَوْفٰى بِمَا عَاهَدَ عَلَيْهُ اللّٰهَ فَسَيُؤْت۪يهِ اَجْرًا عَظ۪يمًا۟10
(ऐ नबी) वे लोग जो तुमसे बैअत करते है वे तो वास्तव में अल्लाह ही से बैअत करते है। उनके हाथों के ऊपर अल्लाह का हाथ होता है। फिर जिस किसी ने वचन भंग किया तो वह वचन भंग करके उसका बवाल अपने ही सिर लेता है, किन्तु जिसने उस प्रतिज्ञा को पूरा किया जो उसने अल्लाह से की है तो उसे वह बड़ा बदला प्रदान करेगा
سَيَقُولُ لَكَ الْمُخَلَّفُونَ مِنَ الْاَعْرَابِ شَغَلَتْنَٓا اَمْوَالُنَا وَاَهْلُونَا فَاسْتَغْفِرْ لَنَاۚ يَقُولُونَ بِاَلْسِنَتِهِمْ مَا لَيْسَ ف۪ي قُلُوبِهِمْۜ قُلْ فَمَنْ يَمْلِكُ لَكُمْ مِنَ اللّٰهِ شَيْـًٔا اِنْ اَرَادَ بِكُمْ ضَرًّا اَوْ اَرَادَ بِكُمْ نَفْعًاۜ بَلْ كَانَ اللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَب۪يرًا11
जो बद्‌दू पीछे रह गए थे, वे अब तुमसे कहेगे, "हमारे माल और हमारे घरवालों ने हमें व्यस्त कर रखा था; तो आप हमारे लिए क्षमा की प्रार्थना कीजिए।" वे अपनी ज़बानों से वे बातें कहते है जो उनके दिलों में नहीं। कहना कि, "कौन है जो अल्लाह के मुक़ाबले में तुम्हारे किए किसी चीज़ का अधिकार रखता है, यदि वह तुम्हें कोई हानि पहुँचानी चाहे या वह तुम्हें कोई लाभ पहुँचाने का इरादा करे? बल्कि जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसकी ख़बर रखता है। -
بَلْ ظَنَنْتُمْ اَنْ لَنْ يَنْقَلِبَ الرَّسُولُ وَالْمُؤْمِنُونَ اِلٰٓى اَهْل۪يهِمْ اَبَدًا وَزُيِّنَ ذٰلِكَ ف۪ي قُلُوبِكُمْ وَظَنَنْتُمْ ظَنَّ السَّوْءِۚ وَكُنْتُمْ قَوْمًا بُورًا12
"नहीं, बल्कि तुमने यह समझा कि रसूल और ईमानवाले अपने घरवालों की ओर लौटकर कभी न आएँगे और यह तुम्हारे दिलों को अच्छा लगा। तुमने तो बहुत बुरे गुमान किए और तुम्हीं लोग हुए तबाही में पड़नेवाले।"
وَمَنْ لَمْ يُؤْمِنْ بِاللّٰهِ وَرَسُولِه۪ فَاِنَّٓا اَعْتَدْنَا لِلْكَافِر۪ينَ سَع۪يرًا13
और अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान न लाया, तो हमने भी इनकार करनेवालों के लिए भड़कती आग तैयार कर रखी है
وَلِلّٰهِ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ يَغْفِرُ لِمَنْ يَشَٓاءُ وَيُعَذِّبُ مَنْ يَشَٓاءُۜ وَكَانَ اللّٰهُ غَفُورًا رَح۪يمًا14
अल्लाह ही की है आकाशों और धरती की बादशाही। वह जिसे चाहे क्षमा करे और जिसे चाहे यातना दे। और अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
سَيَقُولُ الْمُخَلَّفُونَ اِذَا انْطَلَقْتُمْ اِلٰى مَغَانِمَ لِتَاْخُذُوهَا ذَرُونَا نَتَّبِعْكُمْۚ يُر۪يدُونَ اَنْ يُبَدِّلُوا كَلَامَ اللّٰهِۜ قُلْ لَنْ تَتَّبِعُونَا كَذٰلِكُمْ قَالَ اللّٰهُ مِنْ قَبْلُۚ فَسَيَقُولُونَ بَلْ تَحْسُدُونَنَاۜ بَلْ كَانُوا لَا يَفْقَهُونَ اِلَّا قَل۪يلًا15
जब तुम ग़नीमतों को प्राप्त करने के लिए उनकी ओर चलोगे तो पीछे रहनेवाले कहेंगे, "हमें भी अनुमति दी जाए कि हम तुम्हारे साथ चले।" वे चाहते है कि अल्लाह का कथन को बदल दे। कह देना, "तुम हमारे साथ कदापि नहीं चल सकते। अल्लाह ने पहले ही ऐसा कह दिया है।" इसपर वे कहेंगे, "नहीं, बल्कि तुम हमसे ईर्ष्या कर रहे हो।" नहीं, बल्कि वे लोग समझते थोड़े ही है