513. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

513. पृष्ठ
48 · अल-फतह
قُلْ لِلْمُخَلَّف۪ينَ مِنَ الْاَعْرَابِ سَتُدْعَوْنَ اِلٰى قَوْمٍ اُو۬ل۪ي بَاْسٍ شَد۪يدٍ تُقَاتِلُونَهُمْ اَوْ يُسْلِمُونَۚ فَاِنْ تُط۪يعُوا يُؤْتِكُمُ اللّٰهُ اَجْرًا حَسَنًاۚ وَاِنْ تَتَوَلَّوْا كَمَا تَوَلَّيْتُمْ مِنْ قَبْلُ يُعَذِّبْكُمْ عَذَابًا اَل۪يمًا16
पीछे रह जानेवाले बद्‌दूओं से कहना, "शीघ्र ही तुम्हें ऐसे लोगों की ओर बुलाया जाएगा जो बड़े युद्धवीर है कि तुम उनसे लड़ो या वे आज्ञाकारी हो जाएँ। तो यदि तुम आज्ञाकारी हो जाएँ। तो यदि तुम आज्ञापालन करोगे तो अल्लाह तुम्हें अच्छा बदला प्रदान करेगा। किन्तु यदि तुम फिर गए, जैसे पहले फिर गए थे, तो वह तुम्हें दुखद यातना देगा।"
لَيْسَ عَلَى الْاَعْمٰى حَرَجٌ وَلَا عَلَى الْاَعْرَجِ حَرَجٌ وَلَا عَلَى الْمَر۪يضِ حَرَجٌۜ وَمَنْ يُطِعِ اللّٰهَ وَرَسُولَهُ يُدْخِلْهُ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُۚ وَمَنْ يَتَوَلَّ يُعَذِّبْهُ عَذَابًا اَل۪يمًا۟17
न अन्धे के लिए कोई हरज है, न लँगडे के लिए कोई हरज है और न बीमार के लिए कोई हरज है। जो भी अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करेगा, उसे वह ऐसे बाग़ों में दाख़िल करके, जिनके नीचे नहरे बह रही होगी, किन्तु जो मुँह फेरेगा उसे वह दुखद यातना देगा
لَقَدْ رَضِيَ اللّٰهُ عَنِ الْمُؤْمِن۪ينَ اِذْ يُبَايِعُونَكَ تَحْتَ الشَّجَرَةِ فَعَلِمَ مَا ف۪ي قُلُوبِهِمْ فَاَنْزَلَ السَّك۪ينَةَ عَلَيْهِمْ وَاَثَابَهُمْ فَتْحًا قَر۪يبًاۙ18
निश्चय ही अल्लाह मोमिनों से प्रसन्न हुआ, जब वे वृक्ष के नीचे तुमसे बैअत कर रहे थे। उसने जान लिया जो कुछ उनके दिलों में था। अतः उनपर उसने सकीना (प्रशान्ति) उतारी और बदले में उन्हें मिलनेवाली विजय निश्चित कर दी;
وَمَغَانِمَ كَث۪يرَةً يَاْخُذُونَهَاۜ وَكَانَ اللّٰهُ عَز۪يزًا حَك۪يمًا19
और बहुत-सी ग़नीमतें भी, जिन्हें वे प्राप्त करेंगे। अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
وَعَدَكُمُ اللّٰهُ مَغَانِمَ كَث۪يرَةً تَاْخُذُونَهَا فَعَجَّلَ لَكُمْ هٰذِه۪ وَكَفَّ اَيْدِيَ النَّاسِ عَنْكُمْۚ وَلِتَكُونَ اٰيَةً لِلْمُؤْمِن۪ينَ وَيَهْدِيَكُمْ صِرَاطًا مُسْتَق۪يمًاۙ20
अल्लाह ने तुमसे बहुत-सी गंनीमतों का वादा किया हैं, जिन्हें तुम प्राप्त करोगे। यह विजय तो उसने तुम्हें तात्कालिक रूप से निश्चित कर दी। और लोगों के हाथ तुमसे रोक दिए (कि वे तुमपर आक्रमण करने का साहस न कर सकें) और ताकि ईमानवालों के लिए एक निशानी हो। और वह सीधे मार्ग की ओर तुम्हारा मार्गदर्शन करे
وَاُخْرٰى لَمْ تَقْدِرُوا عَلَيْهَا قَدْ اَحَاطَ اللّٰهُ بِهَاۜ وَكَانَ اللّٰهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرًا21
इसके अतिरिक्त दूसरी और विजय का भी वादा है, जिसकी सामर्थ्य अभी तुम्हे प्राप्त नहीं, उन्हें अल्लाह ने घेर रखा है। अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
وَلَوْ قَاتَلَكُمُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا لَوَلَّوُا الْاَدْبَارَ ثُمَّ لَا يَجِدُونَ وَلِيًّا وَلَا نَص۪يرًا22
यदि (मक्का के) इनकार करनेवाले तुमसे लड़ते तो अवश्य ही पीठ फेर जाते। फिर यह भी कि वे न तो कोई संरक्षक पाएँगे और न कोई सहायक
سُنَّةَ اللّٰهِ الَّت۪ي قَدْ خَلَتْ مِنْ قَبْلُۚ وَلَنْ تَجِدَ لِسُنَّةِ اللّٰهِ تَبْد۪يلًا23
यह अल्लाह की उस रीति के अनुकूल है जो पहले से चली आई है, और तुम अल्लाह की रीति में कदापि कोई परिवर्तन न पाओगे