514. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
48 · अल-फतह
وَهُوَ الَّذ۪ي كَفَّ اَيْدِيَهُمْ عَنْكُمْ وَاَيْدِيَكُمْ عَنْهُمْ بِبَطْنِ مَكَّةَ مِنْ بَعْدِ اَنْ اَظْفَرَكُمْ عَلَيْهِمْۜ وَكَانَ اللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَص۪يرًا24
वही है जिसने उसके हाथ तुमसे और तुम्हारे हाथ उनसे मक्के की घाटी में रोक दिए इसके पश्चात कि वह तुम्हें उनपर प्रभावी कर चुका था। अल्लाह उसे देख रहा था जो कुछ तुम कर रहे थे
هُمُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَصَدُّوكُمْ عَنِ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ وَالْهَدْيَ مَعْكُوفًا اَنْ يَبْلُغَ مَحِلَّهُۜ وَلَوْلَا رِجَالٌ مُؤْمِنُونَ وَنِسَٓاءٌ مُؤْمِنَاتٌ لَمْ تَعْلَمُوهُمْ اَنْ تَطَؤُ۫هُمْ فَتُص۪يبَكُمْ مِنْهُمْ مَعَرَّةٌ بِغَيْرِ عِلْمٍۚ لِيُدْخِلَ اللّٰهُ ف۪ي رَحْمَتِه۪ مَنْ يَشَٓاءُۚ لَوْ تَزَيَّلُوا لَعَذَّبْنَا الَّذ۪ينَ كَفَرُوا مِنْهُمْ عَذَابًا اَل۪يمًا25
ये वही लोग तो है जिन्होंने इनकार किया और तुम्हें मस्जिदे हराम (काबा) से रोक दिया और क़ुरबानी के बँधे हुए जानवरों को भी इससे रोके रखा कि वे अपने ठिकाने पर पहुँचे। यदि यह ख़याल न होता कि बहुत-से मोमिन पुरुष और मोमिन स्त्रियाँ (मक्का में) मौजूद है, जिन्हें तुम नहीं जानते, उन्हें कुचल दोगे, फिर उनके सिलसिले में अनजाने तुमपर इल्ज़ाम आएगा (तो युद्ध की अनुमति दे दी जाती, अनुमति इसलिए नहीं दी गई) ताकि अल्लाह जिसे चाहे अपनी दयालुता में दाख़िल कर ले। यदि वे ईमानवाले अलग हो गए होते तो उनमें से जिन लोगों ने इनकार किया उनको हम अवश्य दुखद यातना देते
اِذْ جَعَلَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا ف۪ي قُلُوبِهِمُ الْحَمِيَّةَ حَمِيَّةَ الْجَاهِلِيَّةِ فَاَنْزَلَ اللّٰهُ سَك۪ينَتَهُ عَلٰى رَسُولِه۪ وَعَلَى الْمُؤْمِن۪ينَ وَاَلْزَمَهُمْ كَلِمَةَ التَّقْوٰى وَكَانُٓوا اَحَقَّ بِهَا وَاَهْلَهَاۜ وَكَانَ اللّٰهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَل۪يمًا۟26
याद करो जब इनकार करनेवाले लोगों ने अपने दिलों में हठ को जगह दी, अज्ञानपूर्ण हठ को; तो अल्लाह ने अपने रसूल पर और ईमानवालो पर सकीना (प्रशान्ति) उतारी और उन्हें परहेज़गारी (धर्मपरायणता) की बात का पाबन्द रखा। वे इसके ज़्यादा हक़दार और इसके योग्य भी थे। अल्लाह तो हर चीज़ जानता है
لَقَدْ صَدَقَ اللّٰهُ رَسُولَهُ الرُّءْيَا بِالْحَقِّۚ لَتَدْخُلُنَّ الْمَسْجِدَ الْحَرَامَ اِنْ شَٓاءَ اللّٰهُ اٰمِن۪ينَۙ مُحَلِّق۪ينَ رُؤُ۫سَكُمْ وَمُقَصِّر۪ينَۙ لَا تَخَافُونَۜ فَعَلِمَ مَا لَمْ تَعْلَمُوا فَجَعَلَ مِنْ دُونِ ذٰلِكَ فَتْحًا قَر۪يبًا27
निश्चय ही अल्लाह ने अपने रसूल को हक़ के साथ सच्चा स्वप्न दिखाया, "यदि अल्लाह ने चाहा तो तुम अवश्य मस्जिदे हराम (काबा) में प्रवेश करोगे बेखटके, अपने सिर के बाल मुड़ाते और कतरवाते हुए, तुम्हें कोई भय न होगा।" हुआ यह कि उसने वह बात जान ली जो तुमने नहीं जानी। अतः इससे पहले उसने शीघ्र प्राप्त होनेवाली विजय तुम्हारे लिए निश्चिंत कर दी
هُوَ الَّذ۪ٓي اَرْسَلَ رَسُولَهُ بِالْهُدٰى وَد۪ينِ الْحَقِّ لِيُظْهِرَهُ عَلَى الدّ۪ينِ كُلِّه۪ۜ وَكَفٰى بِاللّٰهِ شَه۪يدًاۜ28
वही है जिसने अपने रसूल को मार्गदर्शन और सत्यधर्म के साथ भेजा, ताकि उसे पूरे के पूरे धर्म पर प्रभुत्व प्रदान करे और गवाह की हैसियत से अल्लाह काफ़ी है