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515. पृष्ठ
48 · अल-फतह
مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللّٰهِۜ وَالَّذ۪ينَ مَعَهُٓ اَشِدَّٓاءُ عَلَى الْكُفَّارِ رُحَمَٓاءُ بَيْنَهُمْ تَرٰيهُمْ رُكَّعًا سُجَّدًا يَبْتَغُونَ فَضْلًا مِنَ اللّٰهِ وَرِضْوَانًاۘ س۪يمَاهُمْ ف۪ي وُجُوهِهِمْ مِنْ اَثَرِ السُّجُودِۜ ذٰلِكَ مَثَلُهُمْ فِي التَّوْرٰيةِۚۛ وَمَثَلُهُمْ فِي الْاِنْج۪يلِ۠ۛ كَزَرْعٍ اَخْرَجَ شَطْـَٔهُ۫ فَاٰزَرَهُ فَاسْتَغْلَظَ فَاسْتَوٰى عَلٰى سُوقِه۪ يُعْجِبُ الزُّرَّاعَ لِيَغ۪يظَ بِهِمُ الْكُفَّارَۜ وَعَدَ اللّٰهُ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ مِنْهُمْ مَغْفِرَةً وَاَجْرًا عَظ۪يمًا29
अल्लाह के रसूल मुहम्मद और जो लोग उनके साथ हैं, वे इनकार करनेवालों पर भारी हैं, आपस में दयालु है। तुम उन्हें रुकू में, सजदे में, अल्लाह का उदार अनुग्रह और उसकी प्रसन्नता चाहते हुए देखोगे। वे अपने चहरों से पहचाने जाते हैं जिनपर सजदों का प्रभाव है। यही उनकी विशेषता तौरात में और उनकी विशेषता इंजील में उस खेती की तरह उल्लिखित है जिसने अपना अंकुर निकाला; फिर उसे शक्ति पहुँचाई तो वह मोटा हुआ और वह अपने तने पर सीधा खड़ा हो गया। खेती करनेवालों को भा रहा है, ताकि उनसे इनकार करनेवालों का भी जी जलाए। उनमें से जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनसे अल्लाह ने क्षमा और बदले का वादा किया है
49 · अल-हुजरात
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تُقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيِ اللّٰهِ وَرَسُولِه۪ وَاتَّقُوا اللّٰهَۜ اِنَّ اللّٰهَ سَم۪يعٌ عَل۪يمٌ1
ऐ ईमानवालो! अल्लाह और उसके रसूल से आगे न बढो और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह सुनता, जानता है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا تَرْفَعُٓوا اَصْوَاتَكُمْ فَوْقَ صَوْتِ النَّبِيِّ وَلَا تَجْهَرُوا لَهُ بِالْقَوْلِ كَجَهْرِ بَعْضِكُمْ لِبَعْضٍ اَنْ تَحْبَطَ اَعْمَالُكُمْ وَاَنْتُمْ لَا تَشْعُرُونَ2
ऐ लोगो, जो ईमान लाए हो! तुम अपनी आवाज़ों को नबी की आवाज़ से ऊँची न करो। और जिस तरह तुम आपस में एक-दूसरे से ज़ोर से बोलते हो, उससे ऊँची आवाज़ में बात न करो। कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे कर्म अकारथ हो जाएँ और तुम्हें ख़बर भी न हो
اِنَّ الَّذ۪ينَ يَغُضُّونَ اَصْوَاتَهُمْ عِنْدَ رَسُولِ اللّٰهِ اُو۬لٰٓئِكَ الَّذ۪ينَ امْتَحَنَ اللّٰهُ قُلُوبَهُمْ لِلتَّقْوٰىۜ لَهُمْ مَغْفِرَةٌ وَاَجْرٌ عَظ۪يمٌ3
वे लोग जो अल्लाह के रसूल के समक्ष अपनी आवाज़ों को दबी रखते है, वही लोग है जिनके दिलों को अल्लाह ने परहेज़गारी के लिए जाँचकर चुन लिया है। उनके लिए क्षमा और बड़ा बदला है
اِنَّ الَّذ۪ينَ يُنَادُونَكَ مِنْ وَرَٓاءِ الْحُجُرَاتِ اَكْثَرُهُمْ لَا يَعْقِلُونَ4
जो लोग (ऐ नबी) तुम्हें कमरों के बाहर से पुकारते है उनमें से अधिकतर बुद्धि से काम नहीं लेते