516. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
49 · अल-हुजरात
وَلَوْ اَنَّهُمْ صَبَرُوا حَتّٰى تَخْرُجَ اِلَيْهِمْ لَكَانَ خَيْرًا لَهُمْۜ وَاللّٰهُ غَفُورٌ رَح۪يمٌ5
यदि वे धैर्य से काम लेते यहाँ तक कि तुम स्वयं निकलकर उनके पास आ जाते तो यह उनके लिए अच्छा होता। किन्तु अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اِنْ جَٓاءَكُمْ فَاسِقٌ بِنَبَاٍ فَتَبَيَّنُٓوا اَنْ تُص۪يبُوا قَوْمًا بِجَهَالَةٍ فَتُصْبِحُوا عَلٰى مَا فَعَلْتُمْ نَادِم۪ينَ6
ऐ लोगों, जो ईमान लाए हो! यदि कोई अवज्ञाकारी तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर आए तो उसकी छानबीन कर लिया करो। कहीं ऐसा न हो कि तुम किसी गिरोह को अनजाने में तकलीफ़ और नुक़सान पहुँचा बैठो, फिर अपने किए पर पछताओ
وَاعْلَمُٓوا اَنَّ ف۪يكُمْ رَسُولَ اللّٰهِۜ لَوْ يُط۪يعُكُمْ ف۪ي كَث۪يرٍ مِنَ الْاَمْرِ لَعَنِتُّمْ وَلٰكِنَّ اللّٰهَ حَبَّبَ اِلَيْكُمُ الْا۪يمَانَ وَزَيَّنَهُ ف۪ي قُلُوبِكُمْ وَكَرَّهَ اِلَيْكُمُ الْكُفْرَ وَالْفُسُوقَ وَالْعِصْيَانَۜ اُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الرَّاشِدُونَۙ7
जान लो कि तुम्हारे बीच अल्लाह का रसूल मौजूद है। बहुत-से मामलों में यदि वह तुम्हारी बात मान ले तो तुम कठिनाई में पड़ जाओ। किन्तु अल्लाह ने तुम्हारे लिए ईमान को प्रिय बना दिया और उसे तुम्हारे दिलों में सुन्दरता दे दी और इनकार, उल्लंघन और अवज्ञा को तुम्हारे लिए बहुत अप्रिय बना दिया।
فَضْلًا مِنَ اللّٰهِ وَنِعْمَةًۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ حَك۪يمٌ8
ऐसे ही लोग अल्लाह के उदार अनुग्रह और अनुकम्पा से सूझबूझवाले है। और अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, तत्वदर्शी है
وَاِنْ طَٓائِفَتَانِ مِنَ الْمُؤْمِن۪ينَ اقْتَتَلُوا فَاَصْلِحُوا بَيْنَهُمَاۚ فَاِنْ بَغَتْ اِحْدٰيهُمَا عَلَى الْاُخْرٰى فَقَاتِلُوا الَّت۪ي تَبْغ۪ي حَتّٰى تَف۪ٓيءَ اِلٰٓى اَمْرِ اللّٰهِۚ فَاِنْ فَٓاءَتْ فَاَصْلِحُوا بَيْنَهُمَا بِالْعَدْلِ وَاَقْسِطُواۜ اِنَّ اللّٰهَ يُحِبُّ الْمُقْسِط۪ينَ9
यदि मोमिनों में से दो गिरोह आपस में लड़ पड़े तो उनके बीच सुलह करा दो। फिर यदि उनमें से एक गिरोह दूसरे पर ज़्यादती करे, तो जो गिरोह ज़्यादती कर रहा हो उससे लड़ो, यहाँ तक कि वह अल्लाह के आदेश की ओर पलट आए। फिर यदि वह पलट आए तो उनके बीच न्याय के साथ सुलह करा दो, और इनसाफ़ करो। निश्चय ही अल्लाह इनसाफ़ करनेवालों को पसन्द करता है
اِنَّمَا الْمُؤْمِنُونَ اِخْوَةٌ فَاَصْلِحُوا بَيْنَ اَخَوَيْكُمْ وَاتَّقُوا اللّٰهَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ۟10
मोमिन तो भाई-भाई ही है। अतः अपने दो भाईयो के बीच सुलह करा दो और अल्लाह का डर रखो, ताकि तुमपर दया की जाए
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا لَا يَسْخَرْ قَوْمٌ مِنْ قَوْمٍ عَسٰٓى اَنْ يَكُونُوا خَيْرًا مِنْهُمْ وَلَا نِسَٓاءٌ مِنْ نِسَٓاءٍ عَسٰٓى اَنْ يَكُنَّ خَيْرًا مِنْهُنَّۚ وَلَا تَلْمِزُٓوا اَنْفُسَكُمْ وَلَا تَنَابَزُوا بِالْاَلْقَابِۜ بِئْسَ الِاسْمُ الْفُسُوقُ بَعْدَ الْا۪يمَانِۚ وَمَنْ لَمْ يَتُبْ فَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الظَّالِمُونَ11
ऐ लोगो, जो ईमान लाए हो! न पुरुषों का कोई गिरोह दूसरे पुरुषों की हँसी उड़ाए, सम्भव है वे उनसे अच्छे हों और न स्त्रियाँ स्त्रियों की हँसी उड़ाए, सम्भव है वे उनसे अच्छी हों, और न अपनों पर ताने कसो और न आपस में एक-दूसरे को बुरी उपाधियों से पुकारो। ईमान के पश्चात अवज्ञाकारी का नाम जुडना बहुत ही बुरा है। और जो व्यक्ति बाज़ न आए, तो ऐसे ही व्यक्ति ज़ालिम है