524. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
52 · अत-तूर
اَفَسِحْرٌ هٰذَٓا اَمْ اَنْتُمْ لَا تُبْصِرُونَ15
"अब भला (बताओ) यह कोई जादू है या तुम्हे सुझाई नहीं देता?
اِصْلَوْهَا فَاصْبِرُٓوا اَوْ لَا تَصْبِرُواۚ سَوَٓاءٌ عَلَيْكُمْۜ اِنَّمَا تُجْزَوْنَ مَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ16
"जाओ, झुलसो उसमें! अब धैर्य से काम लो या धैर्य से काम न लो; तुम्हारे लिए बराबर है। तुम वही बदला पा रहे हो, जो तुम करते रहे थे।"
اِنَّ الْمُتَّق۪ينَ ف۪ي جَنَّاتٍ وَنَع۪يمٍۙ17
निश्चय ही डर रखनेवाले बाग़ों और नेमतों में होंगे
فَاكِه۪ينَ بِمَٓا اٰتٰيهُمْ رَبُّهُمْۚ وَوَقٰيهُمْ رَبُّهُمْ عَذَابَ الْجَح۪يمِ18
जो कुछ उनके रब ने उन्हें दिया होगा, उसका आनन्द ले रहे होंगे और इस बात से कि उनके रब ने उन्हें भड़कती हुई आग से बचा लिया -
كُلُوا وَاشْرَبُوا هَن۪ٓيـًٔا بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَۙ19
"मज़े से खाओ और पियो उन कर्मों के बदले में जो तुम करते रहे हो।"
مُتَّكِـ۪ٔينَ عَلٰى سُرُرٍ مَصْفُوفَةٍۚ وَزَوَّجْنَاهُمْ بِحُورٍ ع۪ينٍ20
- पंक्तिबद्ध तख़्तो पर तकिया लगाए हुए होंगे और हम बड़ी आँखोंवाली हूरों (परम रूपवती स्त्रियों) से उनका विवाह कर देंगे
وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَاتَّبَعَتْهُمْ ذُرِّيَّتُهُمْ بِا۪يمَانٍ اَلْحَقْنَا بِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَمَٓا اَلَتْنَاهُمْ مِنْ عَمَلِهِمْ مِنْ شَيْءٍۜ كُلُّ امْرِئٍ بِمَا كَسَبَ رَه۪ينٌ21
जो लोग ईमान लाए और उनकी सन्तान ने भी ईमान के साथ उसका अनुसरण किया, उनकी सन्तान को भी हम उनसे मिला देंगे, और उनके कर्म में से कुछ भी कम करके उन्हें नहीं देंगे। हर व्यक्ति अपनी कमाई के बदले में बन्धक है
وَاَمْدَدْنَاهُمْ بِفَاكِهَةٍ وَلَحْمٍ مِمَّا يَشْتَهُونَ22
और हम उन्हें मेवे और मांस, जिसकी वे इच्छा करेंगे दिए चले जाएँगे
يَتَنَازَعُونَ ف۪يهَا كَاْسًا لَا لَغْوٌ ف۪يهَا وَلَا تَاْث۪يمٌ23
वे वहाँ आपस में प्याले हाथोंहाथ ले रहे होंगे, जिसमें न कोई बेहूदगी होगी और न गुनाह पर उभारनेवाली कोई बात,
وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ غِلْمَانٌ لَهُمْ كَاَنَّهُمْ لُؤْلُؤٌ۬ مَكْنُونٌ24
और उनकी सेवा में सुरक्षित मोतियों के सदृश किशोर दौड़ते फिरते होंगे, जो ख़ास उन्हीं (की सेवा) के लिए होंगे
وَاَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلٰى بَعْضٍ يَتَسَٓاءَلُونَ25
उनमें से कुछ व्यक्ति कुछ व्यक्तियों की ओर हाल पूछते हुए रुख़ करेंगे,
قَالُٓوا اِنَّا كُنَّا قَبْلُ ف۪ٓي اَهْلِنَا مُشْفِق۪ينَ26
कहेंगे, "निश्चय ही हम पहले अपने घरवालों में डरते रहे है,
فَمَنَّ اللّٰهُ عَلَيْنَا وَوَقٰينَا عَذَابَ السَّمُومِ27
"अन्ततः अल्लाह ने हमपर एहसास किया और हमें गर्म विषैली वायु की यातना से बचा लिया
اِنَّا كُنَّا مِنْ قَبْلُ نَدْعُوهُۜ اِنَّهُ هُوَ الْبَرُّ الرَّح۪يمُ۟28
"इससे पहले हम उसे पुकारते रहे है। निश्चय ही वह सदव्यवहार करनेवाला, अत्यन्त दयावान है।"
فَذَكِّرْ فَمَٓا اَنْتَ بِنِعْمَتِ رَبِّكَ بِكَاهِنٍ وَلَا مَجْنُونٍۜ29
अतः तुम याद दिलाते रहो। अपने रब की अनुकम्पा से न तुम काहिन (ढोंगी भविष्यवक्ता) हो और न दीवाना
اَمْ يَقُولُونَ شَاعِرٌ نَتَرَبَّصُ بِه۪ رَيْبَ الْمَنُونِ30
या वे कहते है, "वह कवि है जिसके लिए हम काल-चक्र की प्रतीक्षा कर रहे है?"
قُلْ تَرَبَّصُوا فَاِنّ۪ي مَعَكُمْ مِنَ الْمُتَرَبِّص۪ينَۜ31
कह दो, "प्रतीक्षा करो! मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करता हूँ।"