525. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
52 · अत-तूर
اَمْ تَاْمُرُهُمْ اَحْلَامُهُمْ بِهٰذَٓا اَمْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَۚ32
या उनकी बुद्धियाँ यही आदेश दे रही है, या वे ही है सरकश लोग?
اَمْ يَقُولُونَ تَقَوَّلَهُۚ بَلْ لَا يُؤْمِنُونَۚ33
या वे कहते है, "उसने उस (क़ुरआन) को स्वयं ही कह लिया है?" नहीं, बल्कि वे ईमान नहीं लाते
فَلْيَاْتُوا بِحَد۪يثٍ مِثْلِه۪ٓ اِنْ كَانُوا صَادِق۪ينَۜ34
अच्छा यदि वे सच्चे है तो उन्हें उस जैसी वाणी ले आनी चाहिए
اَمْ خُلِقُوا مِنْ غَيْرِ شَيْءٍ اَمْ هُمُ الْخَالِقُونَۜ35
या वे बिना किसी चीज़ के पैदा हो गए? या वे स्वयं ही अपने स्रष्टाँ है?
اَمْ خَلَقُوا السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَۚ بَلْ لَا يُوقِنُونَۜ36
या उन्होंने आकाशों और धरती को पैदा किया?
اَمْ عِنْدَهُمْ خَزَٓائِنُ رَبِّكَ اَمْ هُمُ الْمُصَيْطِرُونَۜ37
या उनके पास तुम्हारे रब के खज़ाने है? या वही उनके परिरक्षक है?
اَمْ لَهُمْ سُلَّمٌ يَسْتَمِعُونَ ف۪يهِۚ فَلْيَاْتِ مُسْتَمِعُهُمْ بِسُلْطَانٍ مُب۪ينٍۜ38
या उनके पास कोई सीढ़ी है जिसपर चढ़कर वे (कान लगाकर) सुन लेते है? फिर उनमें से जिसने सुन लिया हो तो वह ले आए स्पष्ट प्रमाण
اَمْ لَهُ الْبَنَاتُ وَلَكُمُ الْبَنُونَۜ39
या उस (अल्लाह) के लिए बेटियाँ है और तुम्हारे अपने लिए बेटे?
اَمْ تَسْـَٔلُهُمْ اَجْرًا فَهُمْ مِنْ مَغْرَمٍ مُثْقَلُونَۜ40
या तुम उनसे कोई पारिश्रामिक माँगते हो कि वे तावान के बोझ से दबे जा रहे है?
اَمْ عِنْدَهُمُ الْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَۜ41
या उनके पास परोक्ष (स्पष्ट) है जिसके आधार पर वे लिए रहे हो?
اَمْ يُر۪يدُونَ كَيْدًاۜ فَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا هُمُ الْمَك۪يدُونَۜ42
या वे कोई चाल चलना चाहते है? तो जिन लोगों ने इनकार किया वही चाल की लपेट में आनेवाले है
اَمْ لَهُمْ اِلٰهٌ غَيْرُ اللّٰهِۜ سُبْحَانَ اللّٰهِ عَمَّا يُشْرِكُونَ43
या अल्लाह के अतिरिक्त उनका कोई और पूज्य-प्रभु है? अल्लाह महान और उच्च है उससे जो वे साझी ठहराते है
وَاِنْ يَرَوْا كِسْفًا مِنَ السَّمَٓاءِ سَاقِطًا يَقُولُوا سَحَابٌ مَرْكُومٌ44
यदि वे आकाश का कोई टुकटा गिरता हुआ देखें तो कहेंगे, "यह तो परत पर परत बादल है!"
فَذَرْهُمْ حَتّٰى يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذ۪ي ف۪يهِ يُصْعَقُونَۙ45
अतः छोडो उन्हें, यहाँ तक कि वे अपने उस दिन का सामना करें जिसमें उनपर वज्रपात होगा;
يَوْمَ لَا يُغْن۪ي عَنْهُمْ كَيْدُهُمْ شَيْـًٔا وَلَا هُمْ يُنْصَرُونَۜ46
जिस दिन उनकी चाल उनके कुछ भी काम न आएगी और न उन्हें कोई सहायता ही मिलेगी;
وَاِنَّ لِلَّذ۪ينَ ظَلَمُوا عَذَابًا دُونَ ذٰلِكَ وَلٰكِنَّ اَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ47
और निश्चय ही जिन लोगों ने ज़ुल्म किया उनके लिए एक यातना है उससे हटकर भी, परन्तु उनमें से अधिकतर जानते नहीं
وَاصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ فَاِنَّكَ بِاَعْيُنِنَا وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ ح۪ينَ تَقُومُۙ48
अपने रब का फ़ैसला आने तक धैर्य से काम लो, तुम तो हमारी आँखों में हो, और जब उठो तो अपने रब का गुणगान करो;
وَمِنَ الَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَاِدْبَارَ النُّجُومِ49
रात की कुछ घड़ियों में भी उसकी तसबीह करो, और सितारों के पीठ फेरने के समय (प्रातःकाल) भी