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527. पृष्ठ
53 · अन-नज्म
اِنَّ الَّذ۪ينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْاٰخِرَةِ لَيُسَمُّونَ الْمَلٰٓئِكَةَ تَسْمِيَةَ الْاُنْثٰى27
जो लोग आख़िरत को नहीं मानते, वे फ़रिश्तों के देवियों के नाम से अभिहित करते है,
وَمَا لَهُمْ بِه۪ مِنْ عِلْمٍۜ اِنْ يَتَّبِعُونَ اِلَّا الظَّنَّۚ وَاِنَّ الظَّنَّ لَا يُغْن۪ي مِنَ الْحَقِّ شَيْـًٔاۚ28
हालाँकि इस विषय में उन्हें कोई ज्ञान नहीं। वे केवल अटकल के पीछे चलते है, हालाँकि सत्य से जो लाभ पहुँचता है वह अटकल से कदापि नहीं पहुँच सकता।
فَاَعْرِضْ عَنْ مَنْ تَوَلّٰى عَنْ ذِكْرِنَا وَلَمْ يُرِدْ اِلَّا الْحَيٰوةَ الدُّنْيَاۜ29
अतः तुम उसको ध्यान में न लाओ जो हमारे ज़िक्र से मुँह मोड़ता है और सांसारिक जीवन के सिवा उसने कुछ नहीं चाहा
ذٰلِكَ مَبْلَغُهُمْ مِنَ الْعِلْمِۜ اِنَّ رَبَّكَ هُوَ اَعْلَمُ بِمَنْ ضَلَّ عَنْ سَب۪يلِه۪ وَهُوَ اَعْلَمُ بِمَنِ اهْتَدٰى30
ऐसे लोगों के ज्ञान की पहुँच बस यहीं तक है। निश्चय ही तुम्हारा रब ही उसे भली-भाँति जानता है जो उसके मार्ग से भटक गया और वही उसे भी भली-भाँति जानता है जिसने सीधा मार्ग अपनाया
وَلِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِۙ لِيَجْزِيَ الَّذ۪ينَ اَسَٓاؤُ۫ا بِمَا عَمِلُوا وَيَجْزِيَ الَّذ۪ينَ اَحْسَنُوا بِالْحُسْنٰىۚ31
अल्लाह ही का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, ताकि जिन लोगों ने बुराई की वह उन्हें उनके किए का बदला दे। और जिन लोगों ने भलाई की उन्हें अच्छा बदला दे;
اَلَّذ۪ينَ يَجْتَنِبُونَ كَبَٓائِرَ الْاِثْمِ وَالْفَوَاحِشَ اِلَّا اللَّمَمَۜ اِنَّ رَبَّكَ وَاسِعُ الْمَغْفِرَةِۜ هُوَ اَعْلَمُ بِكُمْ اِذْ اَنْشَاَكُمْ مِنَ الْاَرْضِ وَاِذْ اَنْتُمْ اَجِنَّةٌ ف۪ي بُطُونِ اُمَّهَاتِكُمْۚ فَلَا تُزَكُّٓوا اَنْفُسَكُمْۜ هُوَ اَعْلَمُ بِمَنِ اتَّقٰى۟32
वे लोग जो बड़े गुनाहों और अश्लील कर्मों से बचते है, यह और बात है कि संयोगबश कोई छोटी बुराई उनसे हो जाए। निश्चय ही तुम्हारा रब क्षमाशीलता मे बड़ा व्यापक है। वह तुम्हें उस समय से भली-भाँति जानता है, जबकि उसने तुम्हें धरती से पैदा किया और जबकि तुम अपनी माँओ के पेटों में भ्रुण अवस्था में थे। अतः अपने मन की पवित्रता और निखार का दावा न करो। वह उस व्यक्ति को भली-भाँति जानता है, जिसने डर रखा
اَفَرَاَيْتَ الَّذ۪ي تَوَلّٰىۙ33
क्या तुमने उस व्यक्ति को देखा जिसने मुँह फेरा,
وَاَعْطٰى قَل۪يلًا وَاَكْدٰى34
और थोड़ा-सा देकर रुक गया;
اَعِنْدَهُ عِلْمُ الْغَيْبِ فَهُوَ يَرٰى35
क्या उसके पास परोक्ष का ज्ञान है कि वह देख रहा है;
اَمْ لَمْ يُنَبَّاْ بِمَا ف۪ي صُحُفِ مُوسٰىۙ36
या उसको उन बातों की ख़बर नहीं पहुँची, जो मूसा की किताबों में है
وَاِبْرٰه۪يمَ الَّذ۪ي وَفّٰىۙ37
और इबराहीम की (किताबों में है), जिसने अल्लाह की बन्दगी का) पूरा-पूरा हक़ अदा कर दिया?
اَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ اُخْرٰىۙ38
यह कि कोई बोझ उठानेवाला किसी दूसरे का बोझ न उठाएगा;
وَاَنْ لَيْسَ لِلْاِنْسَانِ اِلَّا مَا سَعٰىۙ39
और यह कि मनुष्य के लिए बस वही है जिसके लिए उसने प्रयास किया;
وَاَنَّ سَعْيَهُ سَوْفَ يُرٰىۖ40
और यह कि उसका प्रयास शीघ्र ही देखा जाएगा।
ثُمَّ يُجْزٰيهُ الْجَزَٓاءَ الْاَوْفٰىۙ41
फिर उसे पूरा बदला दिया जाएगा;
وَاَنَّ اِلٰى رَبِّكَ الْمُنْتَهٰىۙ42
और यह कि अन्त में पहुँचना तुम्हारे रब ही की ओर है;
وَاَنَّهُ هُوَ اَضْحَكَ وَاَبْكٰىۙ43
और यह कि वही है जो हँसाता और रुलाता है;
وَاَنَّهُ هُوَ اَمَاتَ وَاَحْيَاۙ44
और यह कि वही जो मारता और जिलाता है;