530. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

530. पृष्ठ
54 · अल-क़मर
وَنَبِّئْهُمْ اَنَّ الْمَٓاءَ قِسْمَةٌ بَيْنَهُمْۚ كُلُّ شِرْبٍ مُحْتَضَرٌ28
"और उन्हें सूचित कर दो कि पानी उनके बीच बाँट दिया गया है। हर एक पीने की बारी पर बारीवाला उपस्थित होगा।"
فَنَادَوْا صَاحِبَهُمْ فَتَعَاطٰى فَعَقَرَ29
अन्ततः उन्होंने अपने साथी को पुकारा, तो उसने ज़िम्मा लिया फिर उसने उसकी कूचें काट दी
فَكَيْفَ كَانَ عَذَاب۪ي وَنُذُرِ30
फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे?
اِنَّٓا اَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ صَيْحَةً وَاحِدَةً فَكَانُوا كَهَش۪يمِ الْمُحْتَظِرِ31
हमने उनपर एक धमाका छोड़ा, फिर वे बाड़ लगानेवाले की रौंदी हुई बाड़ की तरह चूरा होकर रह गए
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْاٰنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ32
हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ بِالنُّذُرِ33
लूत की क़ौम ने भी चेतावनियों को झुठलाया
اِنَّٓا اَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ حَاصِبًا اِلَّٓا اٰلَ لُوطٍۜ نَجَّيْنَاهُمْ بِسَحَرٍۙ34
हमने लूत के घरवालों के सिवा उनपर पथराव करनेवाली तेज़ वायु भेजी।
نِعْمَةً مِنْ عِنْدِنَاۜ كَذٰلِكَ نَجْز۪ي مَنْ شَكَرَ35
हमने अपनी विशेष अनुकम्पा से प्रातःकाल उन्हें बचा लिया। हम इसी तरह उस व्यक्ति को बदला देते है जो कृतज्ञता दिखाए
وَلَقَدْ اَنْذَرَهُمْ بَطْشَتَنَا فَتَمَارَوْا بِالنُّذُرِ36
उसने जो उन्हें हमारी पकड़ से सावधान कर दिया था। किन्तु वे चेतावनियों के विषय में संदेह करते रहे
وَلَقَدْ رَاوَدُوهُ عَنْ ضَيْفِه۪ فَطَمَسْنَٓا اَعْيُنَهُمْ فَذُوقُوا عَذَاب۪ي وَنُذُرِ37
उन्होंने उसे फुसलाकर उसके पास से उसके अतिथियों को बलाना चाहा। अन्ततः हमने उसकी आँखें मेट दीं, "लो, अब चखो मज़ा मेरी यातना और चेतावनियों का!"
وَلَقَدْ صَبَّحَهُمْ بُكْرَةً عَذَابٌ مُسْتَقِرٌّۚ38
सुबह सवेरे ही एक अटल यातना उनपर आ पहुँची,
فَذُوقُوا عَذَاب۪ي وَنُذُرِ39
"लो, अब चखो मज़ा मेरी यातना और चेतावनियों का!"
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْاٰنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ۟40
और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
وَلَقَدْ جَٓاءَ اٰلَ فِرْعَوْنَ النُّذُرُۚ41
और फ़िरऔनियों के पास चेतावनियाँ आई;
كَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَا كُلِّهَا فَاَخَذْنَاهُمْ اَخْذَ عَز۪يزٍ مُقْتَدِرٍ42
उन्होंने हमारी सारी निशानियों को झुठला दिया। अन्ततः हमने उन्हें पकड़ लिया, जिस प्रकार एक ज़बरदस्त प्रभुत्वशाली पकड़ता है
اَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌ مِنْ اُو۬لٰٓئِكُمْ اَمْ لَكُمْ بَرَٓاءَةٌ فِي الزُّبُرِۚ43
क्या तुम्हारे काफ़िर कुछ उन लोगो से अच्छे है या किताबों में तुम्हारे लिए कोई छुटकारा लिखा हुआ है?
اَمْ يَقُولُونَ نَحْنُ جَم۪يعٌ مُنْتَصِرٌ44
या वे कहते है, "और हम मुक़ाबले की शक्ति रखनेवाले एक जत्था है?"
سَيُهْزَمُ الْجَمْعُ وَيُوَلُّونَ الدُّبُرَ45
शीघ्र ही वह जत्था पराजित होकर रहेगा और वे पीठ दिखा जाएँगे
بَلِ السَّاعَةُ مَوْعِدُهُمْ وَالسَّاعَةُ اَدْهٰى وَاَمَرُّ46
नहीं, बल्कि वह घड़ी है, जिसका समय उनके लिए नियत है और वह बड़ी आपदावाली और कटु घड़ी है!
اِنَّ الْمُجْرِم۪ينَ ف۪ي ضَلَالٍ وَسُعُرٍۢ47
निस्संदेह, अपराधी लोग गुमराही और दीवानेपन में पड़े हुए है
يَوْمَ يُسْحَبُونَ فِي النَّارِ عَلٰى وُجُوهِهِمْۜ ذُوقُوا مَسَّ سَقَرَ48
जिस दिन वे अपने मुँह के बल आग में घसीटे जाएँगे, "चखो मज़ा आग की लपट का!"
اِنَّا كُلَّ شَيْءٍ خَلَقْنَاهُ بِقَدَرٍ49
निश्चय ही हमने हर चीज़ एक अंदाज़े के साथ पैदा की है