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532. पृष्ठ
55 · अर-रहमान
رَبُّ الْمَشْرِقَيْنِ وَرَبُّ الْمَغْرِبَيْنِۚ17
वह दो पूर्व का रब है और दो पश्चिम का रब भी।
فَبِاَيِّ اٰلَٓاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ18
फिर तुम दोनों अपने रब की महानताओं में से किस-किस को झुठलाओगे?
مَرَجَ الْبَحْرَيْنِ يَلْتَقِيَانِۙ19
उसने दो समुद्रो को प्रवाहित कर दिया, जो आपस में मिल रहे होते है।
بَيْنَهُمَا بَرْزَخٌ لَا يَبْغِيَانِۚ20
उन दोनों के बीच एक परदा बाधक होता है, जिसका वे अतिक्रमण नहीं करते
فَبِاَيِّ اٰلَٓاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ21
तो तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे?
يَخْرُجُ مِنْهُمَا اللُّؤْلُؤُ۬ وَالْمَرْجَانُۚ22
उन (समुद्रों) से मोती और मूँगा निकलता है।
فَبِاَيِّ اٰلَٓاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ23
अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे?
وَلَهُ الْجَوَارِ الْمُنْشَاٰتُ فِي الْبَحْرِ كَالْاَعْلَامِۚ24
उसी के बस में है समुद्र में पहाड़ो की तरह उठे हुए जहाज़
فَبِاَيِّ اٰلَٓاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ۟25
तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओग?
كُلُّ مَنْ عَلَيْهَا فَانٍۚ26
प्रत्येक जो भी इस (धरती) पर है, नाशवान है
وَيَبْقٰى وَجْهُ رَبِّكَ ذُو الْجَلَالِ وَالْاِكْرَامِۚ27
किन्तु तुम्हारे रब का प्रतापवान और उदार स्वरूप शेष रहनेवाला है
فَبِاَيِّ اٰلَٓاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ28
अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगं?
يَسْـَٔلُهُ مَنْ فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ ف۪ي شَاْنٍۚ29
आकाशों और धरती में जो भी है उसी से माँगता है। उसकी नित्य नई शान है
فَبِاَيِّ اٰلَٓاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ30
अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे?
سَنَفْرُغُ لَكُمْ اَيُّهَ الثَّقَلَانِۚ31
ऐ दोनों बोझों! शीघ्र ही हम तुम्हारे लिए निवृत हुए जाते है
فَبِاَيِّ اٰلَٓاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ32
तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे?
يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْاِنْسِ اِنِ اسْتَطَعْتُمْ اَنْ تَنْفُذُوا مِنْ اَقْطَارِ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ فَانْفُذُواۜ لَا تَنْفُذُونَ اِلَّا بِسُلْطَانٍۚ33
ऐ जिन्नों और मनुष्यों के गिरोह! यदि तुममें हो सके कि आकाशों और धरती की सीमाओं को पार कर सको, तो पार कर जाओ; तुम कदापि पार नहीं कर सकते बिना अधिकार-शक्ति के
فَبِاَيِّ اٰلَٓاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ34
अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे?
يُرْسَلُ عَلَيْكُمَا شُوَاظٌ مِنْ نَارٍ وَنُحَاسٌ فَلَا تَنْتَصِرَانِۚ35
अतः तुम दोनों पर अग्नि-ज्वाला और धुएँवाला अंगारा (पिघला ताँबा) छोड़ दिया जाएगा, फिर तुम मुक़ाबला न कर सकोगे।
فَبِاَيِّ اٰلَٓاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ36
अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे?
فَاِذَا انْشَقَّتِ السَّمَٓاءُ فَكَانَتْ وَرْدَةً كَالدِّهَانِۚ37
फिर जब आकाश फट जाएगा और लाल चमड़े की तरह लाल हो जाएगा।
فَبِاَيِّ اٰلَٓاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ38
- अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे?
فَيَوْمَئِذٍ لَا يُسْـَٔلُ عَنْ ذَنْبِه۪ٓ اِنْسٌ وَلَا جَٓانٌّۚ39
फिर उस दिन न किसी मनुष्य से उसके गुनाह के विषय में पूछा जाएगा न किसी जिन्न से
فَبِاَيِّ اٰلَٓاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ40
अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे?