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535. पृष्ठ
56 · अल-वाकिया
يَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَانٌ مُخَلَّدُونَۙ17
उनके पास किशोर होंगे जो सदैव किशोरावस्था ही में रहेंगे,
بِاَكْوَابٍ وَاَبَار۪يقَ وَكَاْسٍ مِنْ مَع۪ينٍۙ18
प्याले और आफ़ताबे (जग) और विशुद्ध पेय से भरा हुआ पात्र लिए फिर रहे होंगे
لَا يُصَدَّعُونَ عَنْهَا وَلَا يُنْزِفُونَۙ19
- जिस (के पीने) से न तो उन्हें सिर दर्द होगा और न उनकी बुद्धि में विकार आएगा
وَفَاكِهَةٍ مِمَّا يَتَخَيَّرُونَۙ20
और स्वादिष्ट॥ फल जो वे पसन्द करें;
وَلَحْمِ طَيْرٍ مِمَّا يَشْتَهُونَۜ21
और पक्षी का मांस जो वे चाह;
وَحُورٌ ع۪ينٌۙ22
और बड़ी आँखोंवाली हूरें,
كَاَمْثَالِ اللُّؤْلُؤِ۬ الْمَكْنُونِۚ23
मानो छिपाए हुए मोती हो
جَزَٓاءً بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ24
यह सब उसके बदले में उन्हें प्राप्त होगा जो कुछ वे करते रहे
لَا يَسْمَعُونَ ف۪يهَا لَغْوًا وَلَا تَاْث۪يمًاۙ25
उसमें वे न कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न गुनाह की बात;
اِلَّا ق۪يلًا سَلَامًا سَلَامًا26
सिवाय इस बात के कि "सलाम हो, सलाम हो!"
وَاَصْحَابُ الْيَم۪ينِ مَٓا اَصْحَابُ الْيَم۪ينِۜ27
रहे सौभाग्यशाली लोग, तो सौभाग्यशालियों का क्या कहना!
ف۪ي سِدْرٍ مَخْضُودٍۙ28
वे वहाँ होंगे जहाँ बिन काँटों के बेर होंगे;
وَطَلْحٍ مَنْضُودٍۙ29
और गुच्छेदार केले;
وَظِلٍّ مَمْدُودٍۙ30
दूर तक फैली हुई छाँव;
وَمَٓاءٍ مَسْكُوبٍۙ31
बहता हुआ पानी;
وَفَاكِهَةٍ كَث۪يرَةٍۙ32
बहुत-सा स्वादिष्ट; फल,
لَا مَقْطُوعَةٍ وَلَا مَمْنُوعَةٍۙ33
जिसका सिलसिला टूटनेवाला न होगा और न उसपर कोई रोक-टोक होगी
وَفُرُشٍ مَرْفُوعَةٍۜ34
उच्चकोटि के बिछौने होंगे;
اِنَّٓا اَنْشَاْنَاهُنَّ اِنْشَٓاءًۙ35
(और वहाँ उनकी पत्नियों को) निश्चय ही हमने एक विशेष उठान पर उठान पर उठाया
فَجَعَلْنَاهُنَّ اَبْكَارًاۙ36
और हमने उन्हे कुँवारियाँ बनाया;
عُرُبًا اَتْرَابًاۙ37
प्रेम दर्शानेवाली और समायु;
لِاَصْحَابِ الْيَم۪ينِۜ۟38
सौभाग्यशाली लोगों के लिए;
ثُلَّةٌ مِنَ الْاَوَّل۪ينَۙ39
वे अगलों में से भी अधिक होगे
وَثُلَّةٌ مِنَ الْاٰخِر۪ينَۜ40
और पिछलों में से भी अधिक होंगे
وَاَصْحَابُ الشِّمَالِۙ مَٓا اَصْحَابُ الشِّمَالِۜ41
रहे दुर्भाग्यशाली लोग, तो कैसे होंगे दुर्भाग्यशाली लोग!
ف۪ي سَمُومٍ وَحَم۪يمٍۙ42
गर्म हवा और खौलते हुए पानी में होंगे;
وَظِلٍّ مِنْ يَحْمُومٍۙ43
और काले धुएँ की छाँव में,
لَا بَارِدٍ وَلَا كَر۪يمٍ44
जो न ठंडी होगी और न उत्तम और लाभप्रद
اِنَّهُمْ كَانُوا قَبْلَ ذٰلِكَ مُتْرَف۪ينَۚ45
वे इससे पहले सुख-सम्पन्न थे;
وَكَانُوا يُصِرُّونَ عَلَى الْحِنْثِ الْعَظ۪يمِۚ46
और बड़े गुनाह पर अड़े रहते थे
وَكَانُوا يَقُولُونَ اَئِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا ءَاِنَّا لَمَبْعُوثُونَۙ47
कहते थे, "क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी और हड्डियाँ होकर रहे जाएँगे, तो क्या हम वास्तव में उठाए जाएँगे?
اَوَاٰبَٓاؤُ۬نَا الْاَوَّلُونَ48
"और क्या हमारे पहले के बाप-दादा भी?"
قُلْ اِنَّ الْاَوَّل۪ينَ وَالْاٰخِر۪ينَۙ49
कह दो, "निश्चय ही अगले और पिछले भी
لَمَجْمُوعُونَ اِلٰى م۪يقَاتِ يَوْمٍ مَعْلُومٍ50
एक नियत समय पर इकट्ठे कर दिए जाएँगे, जिसका दिन ज्ञात और नियत है