537. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
56 · अल-वाकिया57 · अल-हदीद
اِنَّهُ لَقُرْاٰنٌ كَر۪يمٌۙ77
निश्चय ही यह प्रतिष्ठित क़ुरआन है
ف۪ي كِتَابٍ مَكْنُونٍۙ78
एक सुरक्षित किताब में अंकित है।
لَا يَمَسُّهُٓ اِلَّا الْمُطَهَّرُونَۜ79
उसे केवल पाक-साफ़ व्यक्ति ही हाथ लगाते है
تَنْز۪يلٌ مِنْ رَبِّ الْعَالَم۪ينَ80
उसका अवतरण सारे संसार के रब की ओर से है।
اَفَبِهٰذَا الْحَد۪يثِ اَنْتُمْ مُدْهِنُونَۙ81
फिर क्या तुम उस वाणी के प्रति उपेक्षा दर्शाते हो?
وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمْ اَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَ82
और तुम इसको अपनी वृत्ति बना रहे हो कि झुठलाते हो?
فَلَوْلَٓا اِذَا بَلَغَتِ الْحُلْقُومَۙ83
फिर ऐसा क्यों नहीं होता, जबकि प्राण कंठ को आ लगते है
وَاَنْتُمْ ح۪ينَئِذٍ تَنْظُرُونَۙ84
और उस समय तुम देख रहे होते हो -
وَنَحْنُ اَقْرَبُ اِلَيْهِ مِنْكُمْ وَلٰكِنْ لَا تُبْصِرُونَ85
और हम तुम्हारी अपेक्षा उससे अधिक निकट होते है। किन्तु तुम देखते नहीं –
فَلَوْلَٓا اِنْ كُنْتُمْ غَيْرَ مَد۪ين۪ينَۙ86
फिर ऐसा क्यों नहीं होता कि यदि तुम अधीन नहीं हो
تَرْجِعُونَهَٓا اِنْ كُنْتُمْ صَادِق۪ينَ87
तो उसे (प्राण को) लौटा दो, यदि तुम सच्चे हो
فَاَمَّٓا اِنْ كَانَ مِنَ الْمُقَرَّب۪ينَۙ88
फिर यदि वह (अल्लाह के) निकटवर्तियों में से है;
فَرَوْحٌ وَرَيْحَانٌ وَجَنَّتُ نَع۪يمٍ89
तो (उसके लिए) आराम, सुख-सामग्री और सुगंध है, और नेमतवाला बाग़ है
وَاَمَّٓا اِنْ كَانَ مِنْ اَصْحَابِ الْيَم۪ينِۙ90
और यदि वह भाग्यशालियों में से है,
فَسَلَامٌ لَكَ مِنْ اَصْحَابِ الْيَم۪ينِ91
तो "सलाम है तुम्हें कि तुम सौभाग्यशाली में से हो।"
وَاَمَّٓا اِنْ كَانَ مِنَ الْمُكَذِّب۪ينَ الضَّٓالّ۪ينَۙ92
किन्तु यदि वह झुठलानेवालों, गुमराहों में से है;
فَنُزُلٌ مِنْ حَم۪يمٍۙ93
तो उसका पहला सत्कार खौलते हुए पानी से होगा
وَتَصْلِيَةُ جَح۪يمٍۙ94
फिर भड़कती हुई आग में उन्हें झोंका जाना है
اِنَّ هٰذَا لَهُوَ حَقُّ الْيَق۪ينِۚ95
निस्संदेह यही विश्वसनीय सत्य है
فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ الْعَظ۪يمِ96
अतः तुम अपने महान रब की तसबीह करो
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
سَبَّحَ لِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۚ وَهُوَ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ1
अल्लाह की तसबीह की हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है। वही प्रभुत्वशाली, तत्वशाली है
لَهُ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۚ يُحْي۪ وَيُم۪يتُۚ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ2
आकाशों और धरती की बादशाही उसी की है। वही जीवन प्रदान करता है और मृत्यु देता है, और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
هُوَ الْاَوَّلُ وَالْاٰخِرُ وَالظَّاهِرُ وَالْبَاطِنُۚ وَهُوَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَل۪يمٌ3
वही आदि है और अन्त भी और वही व्यक्त है और अव्यक्त भी। और वह हर चीज़ को जानता है