538. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
57 · अल-हदीद
هُوَ الَّذ۪ي خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ ف۪ي سِتَّةِ اَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوٰى عَلَى الْعَرْشِۜ يَعْلَمُ مَا يَلِجُ فِي الْاَرْضِ وَمَا يَخْرُجُ مِنْهَا وَمَا يَنْزِلُ مِنَ السَّمَٓاءِ وَمَا يَعْرُجُ ف۪يهَاۜ وَهُوَ مَعَكُمْ اَيْنَ مَا كُنْتُمْۜ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَص۪يرٌ4
वही है जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में पैदा किया; फिर सिंहासन पर विराजमान हुआ। वह जानता है जो कुछ धरती में प्रवेश करता है और जो कुछ उससे निकलता है और जो कुछ आकाश से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है। और तुम जहाँ कहीं भी हो, वह तुम्हारे साथ है। और अल्लाह देखता है जो कुछ तुम करते हो
لَهُ مُلْكُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ وَاِلَى اللّٰهِ تُرْجَعُ الْاُمُورُ5
आकाशों और धरती की बादशाही उसी की है और अल्लाह ही की है ओर सारे मामले पलटते है
يُولِجُ الَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي الَّيْلِۜ وَهُوَ عَل۪يمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ6
वह रात को दिन में प्रविष्ट कराता है और दिन को रात में प्रविष्ट कराता है। वह सीनों में छिपी बात तक को जानता है
اٰمِنُوا بِاللّٰهِ وَرَسُولِه۪ وَاَنْفِقُوا مِمَّا جَعَلَكُمْ مُسْتَخْلَف۪ينَ ف۪يهِۜ فَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا مِنْكُمْ وَاَنْفَقُوا لَهُمْ اَجْرٌ كَب۪يرٌ7
ईमान लाओ अल्लाह और उसके रसूल पर और उसमें से ख़र्च करो जिसका उसने तु्म्हें अधिकारी बनाया है। तो तुममें से जो लोग ईमान लाए और उन्होंने ख़र्च किया, उसने लिए बड़ा प्रतिदान है
وَمَا لَكُمْ لَا تُؤْمِنُونَ بِاللّٰهِۚ وَالرَّسُولُ يَدْعُوكُمْ لِتُؤْمِنُوا بِرَبِّكُمْ وَقَدْ اَخَذَ م۪يثَاقَكُمْ اِنْ كُنْتُمْ مُؤْمِن۪ينَ8
तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह पर ईमान नहीं लाते; जबकि रसूल तुम्हें निमंत्रण दे रहा है कि तुम अपने रब पर ईमान लाओ और वह तुमसे दृढ़ वचन भी ले चुका है, यदि तुम मोमिन हो
هُوَ الَّذ۪ي يُنَزِّلُ عَلٰى عَبْدِه۪ٓ اٰيَاتٍ بَيِّنَاتٍ لِيُخْرِجَكُمْ مِنَ الظُّلُمَاتِ اِلَى النُّورِۜ وَاِنَّ اللّٰهَ بِكُمْ لَرَؤُ۫فٌ رَح۪يمٌ9
वही है जो अपने बन्दों पर स्पष्ट आयतें उतार रहा है, ताकि वह तुम्हें अंधकारों से प्रकाश की ओर ले आए। और वास्तविकता यह है कि अल्लाह तुमपर अत्यन्त करुणामय, दयावान है
وَمَا لَكُمْ اَلَّا تُنْفِقُوا ف۪ي سَب۪يلِ اللّٰهِ وَلِلّٰهِ م۪يرَاثُ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِۜ لَا يَسْتَو۪ي مِنْكُمْ مَنْ اَنْفَقَ مِنْ قَبْلِ الْفَتْحِ وَقَاتَلَۜ اُو۬لٰٓئِكَ اَعْظَمُ دَرَجَةً مِنَ الَّذ۪ينَ اَنْفَقُوا مِنْ بَعْدُ وَقَاتَلُواۜ وَكُلًّا وَعَدَ اللّٰهُ الْحُسْنٰىۜ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَب۪يرٌ۟10
और तुम्हें क्यो हुआ है कि तुम अल्लाह के मार्ग में ख़र्च न करो, हालाँकि आकाशों और धरती की विरासत अल्लाह ही के लिए है? तुममें से जिन लोगों ने विजय से पूर्व ख़र्च किया और लड़े वे परस्पर एक-दूसरे के समान नहीं है। वे तो दरजे में उनसे बढ़कर है जिन्होंने बाद में ख़र्च किया और लड़े। यद्यपि अल्लाह ने प्रत्येक से अच्छा वादा किया है। अल्लाह उसकी ख़बर रखता है, जो कुछ तुम करते हो
مَنْ ذَا الَّذ۪ي يُقْرِضُ اللّٰهَ قَرْضًا حَسَنًا فَيُضَاعِفَهُ لَهُ وَلَهُٓ اَجْرٌ كَر۪يمٌۚ11
कौन है जो अल्लाह को ऋण दे, अच्छा ऋण कि वह उसे उसके लिए कई गुना कर दे। और उसके लिए सम्मानित प्रतिदान है