539. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

539. पृष्ठ
57 · अल-हदीद
يَوْمَ تَرَى الْمُؤْمِن۪ينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ يَسْعٰى نُورُهُمْ بَيْنَ اَيْد۪يهِمْ وَبِاَيْمَانِهِمْ بُشْرٰيكُمُ الْيَوْمَ جَنَّاتٌ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُ خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۜ ذٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظ۪يمُۚ12
जिस दिन तुम मोमिन पुरुषों और मोमिन स्त्रियों को देखोगे कि उनका प्रकाश उनके आगे-आगे दौड़ रहा है और उनके दाएँ हाथ में है। (कहा जाएगा,) "आज शुभ सूचना है तुम्हारे लिए ऐसी जन्नतों की जिनके नीचे नहरें बह रही है, जिनमें सदैव रहना है। वही बड़ी सफलता है।"
يَوْمَ يَقُولُ الْمُنَافِقُونَ وَالْمُنَافِقَاتُ لِلَّذ۪ينَ اٰمَنُوا انْظُرُونَا نَقْتَبِسْ مِنْ نُورِكُمْ ق۪يلَ ارْجِعُوا وَرَٓاءَكُمْ فَالْتَمِسُوا نُورًاۜ فَضُرِبَ بَيْنَهُمْ بِسُورٍ لَهُ بَابٌۜ بَاطِنُهُ ف۪يهِ الرَّحْمَةُ وَظَاهِرُهُ مِنْ قِبَلِهِ الْعَذَابُۜ13
जिस दिन कपटाचारी पुरुष और कपटाचारी स्त्रियाँ मोमिनों से कहेंगी, "तनिक हमारी प्रतिक्षा करो। हम भी तुम्हारे प्रकाश मे से कुछ प्रकाश ले लें!" कहा जाएगा, "अपने पीछे लौट जाओ। फिर प्रकाश तलाश करो!" इतने में उनके बीच एक दीवार खड़ी कर दी जाएगी, जिसमें एक द्वार होगा। उसके भीतर का हाल यह होगा कि उसमें दयालुता होगी और उसके बाहर का यह कि उस ओर से यातना होगी
يُنَادُونَهُمْ اَلَمْ نَكُنْ مَعَكُمْۜ قَالُوا بَلٰى وَلٰكِنَّكُمْ فَتَنْتُمْ اَنْفُسَكُمْ وَتَرَبَّصْتُمْ وَارْتَبْتُمْ وَغَرَّتْكُمُ الْاَمَانِيُّ حَتّٰى جَٓاءَ اَمْرُ اللّٰهِ وَغَرَّكُمْ بِاللّٰهِ الْغَرُورُ14
वे उन्हें पुकारकर कहेंगे, "क्या हम तुम्हारे साथी नहीं थे?" वे कहेंगे, "क्यों नहीं? किन्तु तुमने तो अपने आपको फ़ितने (गुमराही) में डाला और प्रतीक्षा करते रहे और सन्देह में पड़े रहे और कामनाओं ने तुम्हें धोखे में डाले रखा है
فَالْيَوْمَ لَا يُؤْخَذُ مِنْكُمْ فِدْيَةٌ وَلَا مِنَ الَّذ۪ينَ كَفَرُواۜ مَاْوٰيكُمُ النَّارُۜ هِيَ مَوْلٰيكُمْۜ وَبِئْسَ الْمَص۪يرُ15
"अब आज न तुमसे कोई फ़िदया (मुक्ति-प्रतिदान) लिया जाएगा और न उन लोगों से जिन्होंने इनकार किया। तुम्हारा ठिकाना आग है, और वही तुम्हारी संरक्षिका है। और बहुत ही बुरी जगह है अन्त में पहुँचने की!"
اَلَمْ يَاْنِ لِلَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اَنْ تَخْشَعَ قُلُوبُهُمْ لِذِكْرِ اللّٰهِ وَمَا نَزَلَ مِنَ الْحَقِّۙ وَلَا يَكُونُوا كَالَّذ۪ينَ اُو۫تُوا الْكِتَابَ مِنْ قَبْلُ فَطَالَ عَلَيْهِمُ الْاَمَدُ فَقَسَتْ قُلُوبُهُمْۜ وَكَث۪يرٌ مِنْهُمْ فَاسِقُونَ16
क्या उन लोगों के लिए, जो ईमान लाए, अभी वह समय नहीं आया कि उनके दिल अल्लाह की याद के लिए और जो सत्य अवतरित हुआ है उसके आगे झुक जाएँ? और वे उन लोगों की तरह न हो जाएँ, जिन्हें किताब दी गई थी, फिर उनपर दीर्ध समय बीत गया। अन्ततः उनके दिल कठोर हो गए और उनमें से अधिकांश अवज्ञाकारी रहे
اِعْلَمُٓوا اَنَّ اللّٰهَ يُحْيِ الْاَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَاۜ قَدْ بَيَّنَّا لَكُمُ الْاٰيَاتِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ17
जान लो, अल्लाह धरती को उसकी मृत्यु के पश्चात जीवन प्रदान करता है। हमने तुम्हारे लिए आयतें खोल-खोलकर बयान कर दी है, ताकि तुम बुद्धि से काम लो
اِنَّ الْمُصَّدِّق۪ينَ وَالْمُصَّدِّقَاتِ وَاَقْرَضُوا اللّٰهَ قَرْضًا حَسَنًا يُضَاعَفُ لَهُمْ وَلَهُمْ اَجْرٌ كَر۪يمٌ18
निश्चय ही जो सदका देनेवाले पुरुष और सदका देनेवाली स्त्रियाँ है और उन्होंने अल्लाह को अच्छा ऋण दिया, उसे उसके लिए कई गुना कर दिया जाएगा। और उनके लिए सम्मानित प्रतिदान है