540. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

540. पृष्ठ
57 · अल-हदीद
وَالَّذ۪ينَ اٰمَنُوا بِاللّٰهِ وَرُسُلِه۪ٓ اُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الصِّدّ۪يقُونَۗ وَالشُّهَدَٓاءُ عِنْدَ رَبِّهِمْۜ لَهُمْ اَجْرُهُمْ وَنُورُهُمْۜ وَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَٓا اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ الْجَح۪يمِ۟19
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए, वही अपने रब के यहाण सिद्दीक और शहीद है। उनके लिए उनका प्रतिदान और उनका प्रकाश है। किन्तु जिन लोगों ने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही भड़कती आगवाले हैं
اِعْلَمُٓوا اَنَّمَا الْحَيٰوةُ الدُّنْيَا لَعِبٌ وَلَهْوٌ وَز۪ينَةٌ وَتَفَاخُرٌ بَيْنَكُمْ وَتَكَاثُرٌ فِي الْاَمْوَالِ وَالْاَوْلَادِۜ كَمَثَلِ غَيْثٍ اَعْجَبَ الْكُفَّارَ نَبَاتُهُ ثُمَّ يَه۪يجُ فَتَرٰيهُ مُصْفَرًّا ثُمَّ يَكُونُ حُطَامًاۜ وَفِي الْاٰخِرَةِ عَذَابٌ شَد۪يدٌۙ وَمَغْفِرَةٌ مِنَ اللّٰهِ وَرِضْوَانٌۜ وَمَا الْحَيٰوةُ الدُّنْيَٓا اِلَّا مَتَاعُ الْغُرُورِ20
जान लो, सांसारिक जीवन तो बस एक खेल और तमाशा है और एक साज-सज्जा, और तुम्हारा आपस में एक-दूसरे पर बड़ाई जताना, और धन और सन्तान में परस्पर एक-दूसरे से बढ़ा हुआ प्रदर्शित करना। वर्षा का मिसाल की तरह जिसकी वनस्पति ने किसान का दिल मोह लिया। फिर वह पक जाती है; फिर तुम उसे देखते हो कि वह पीली हो गई। फिर वह चूर्ण-विचूर्ण होकर रह जाती है, जबकि आख़िरत में कठोर यातना भी है और अल्लाह की क्षमा और प्रसन्नता भी। सांसारिक जीवन तो केवल धोखे की सुख-सामग्री है
سَابِقُٓوا اِلٰى مَغْفِرَةٍ مِنْ رَبِّكُمْ وَجَنَّةٍ عَرْضُهَا كَعَرْضِ السَّمَٓاءِ وَالْاَرْضِۙ اُعِدَّتْ لِلَّذ۪ينَ اٰمَنُوا بِاللّٰهِ وَرُسُلِه۪ۜ ذٰلِكَ فَضْلُ اللّٰهِ يُؤْت۪يهِ مَنْ يَشَٓاءُۜ وَاللّٰهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظ۪يمِ21
अपने रब की क्षमा और उस जन्नत की ओर अग्रसर होने में एक-दूसरे से बाज़ी ले जाओ, जिसका विस्तार आकाश और धरती के विस्तार जैसा है, जो उन लोगों के लिए तैयार की गई है जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए हों। यह अल्लाह का उदार अनुग्रह है, जिसे चाहता है प्रदान करता है। अल्लाह बड़े उदार अनुग्रह का मालिक है
مَٓا اَصَابَ مِنْ مُص۪يبَةٍ فِي الْاَرْضِ وَلَا ف۪ٓي اَنْفُسِكُمْ اِلَّا ف۪ي كِتَابٍ مِنْ قَبْلِ اَنْ نَبْرَاَهَاۜ اِنَّ ذٰلِكَ عَلَى اللّٰهِ يَس۪يرٌۚ22
जो मुसीबतें भी धरती में आती है और तुम्हारे अपने ऊपर, वह अनिवार्यतः एक किताब में अंकित है, इससे पहले कि हम उसे अस्तित्व में लाएँ - निश्चय ही यह अल्लाह के लिए आसान है -
لِكَيْلَا تَاْسَوْا عَلٰى مَا فَاتَكُمْ وَلَا تَفْرَحُوا بِمَٓا اٰتٰيكُمْۜ وَاللّٰهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخْتَالٍ فَخُورٍۙ23
(यह बात तुम्हें इसलिए बता दी गई) ताकि तुम उस चीज़ का अफ़सोस न करो जो तुम पर जाती रहे और न उसपर फूल जाओ जो उसने तुम्हें प्रदान की हो। अल्लाह किसी इतरानेवाले, बड़ाई जतानेवाले को पसन्द नहीं करता
اَلَّذ۪ينَ يَبْخَلُونَ وَيَاْمُرُونَ النَّاسَ بِالْبُخْلِۜ وَمَنْ يَتَوَلَّ فَاِنَّ اللّٰهَ هُوَ الْغَنِيُّ الْحَم۪يدُ24
जो स्वयं कंजूसी करते है और लोगों को भी कंजूसी करने पर उकसाते है, और जो कोई मुँह मोड़े तो अल्लाह तो निस्पृह प्रशंसनीय है