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542. पृष्ठ
58 · अल-मुजादिला
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
قَدْ سَمِعَ اللّٰهُ قَوْلَ الَّت۪ي تُجَادِلُكَ فِي زَوْجِهَا وَتَشْتَك۪ٓي اِلَى اللّٰهِۗ وَاللّٰهُ يَسْمَعُ تَحَاوُرَكُمَاۜ اِنَّ اللّٰهَ سَم۪يعٌ بَص۪يرٌ1
अल्लाह ने उस स्त्री की बात सुन ली जो अपने पति के विषय में तुमसे झगड़ रही है और अल्लाह से शिकायत किए जाती है। अल्लाह तुम दोनों की बातचीत सुन रहा है। निश्चय ही अल्लाह सब कुछ सुननेवाला, देखनेवाला है
اَلَّذ۪ينَ يُظَاهِرُونَ مِنْكُمْ مِنْ نِسَٓائِهِمْ مَا هُنَّ اُمَّهَاتِهِمْۜ اِنْ اُمَّهَاتُهُمْ اِلَّا الّٰٓـ۪ٔي وَلَدْنَهُمْۜ وَاِنَّهُمْ لَيَقُولُونَ مُنْكَرًا مِنَ الْقَوْلِ وَزُورًاۜ وَاِنَّ اللّٰهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٌ2
तुममें से जो लोग अपनी स्त्रियों से ज़िहार करते हैं, उनकी माएँ वे नहीं है, उनकी माएँ तो वही है जिन्होंने उनको जन्म दिया है। यह अवश्य है कि वे लोग एक अनुचित बात और झूठ कहते है। और निश्चय ही अल्लाह टाल जानेवाला अत्यन्त क्षमाशील है
وَالَّذ۪ينَ يُظَاهِرُونَ مِنْ نِسَٓائِهِمْ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا قَالُوا فَتَحْر۪يرُ رَقَبَةٍ مِنْ قَبْلِ اَنْ يَتَمَٓاسَّاۜ ذٰلِكُمْ تُوعَظُونَ بِه۪ۜ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَب۪يرٌ3
जो लोग अपनी स्त्रियों से ज़िहार करते हैं; फिर जो बात उन्होंने कही थी उससे रुजू करते है, तो इससे पहले कि दोनों एक-दूसरे को हाथ लगाएँ एक गर्दन आज़ाद करनी होगी। यह वह बात है जिसकी तुम्हें नसीहत की जाती है, और तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसकी ख़बर रखता है
فَمَنْ لَمْ يَجِدْ فَصِيَامُ شَهْرَيْنِ مُتَتَابِعَيْنِ مِنْ قَبْلِ اَنْ يَتَمَٓاسَّاۚ فَمَنْ لَمْ يَسْتَطِعْ فَاِطْعَامُ سِتّ۪ينَ مِسْك۪ينًاۜ ذٰلِكَ لِتُؤْمِنُوا بِاللّٰهِ وَرَسُولِه۪ۜ وَتِلْكَ حُدُودُ اللّٰهِۜ وَلِلْكَافِر۪ينَ عَذَابٌ اَل۪يمٌ4
किन्तु जिस किसी को ग़ुलाम प्राप्त न हो तो वह निरन्तर दो माह रोज़े रखे, इससे पहले कि वे दोनों एक-दूसरे को हाथ लगाएँ और जिस किसी को इसकी भी सामर्थ्य न हो तो साठ मुहताजों को भोजन कराना होगा। यह इसलिए कि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमानवाले सिद्ध हो सको। ये अल्लाह की निर्धारित की हुई सीमाएँ है। और इनकार करनेवाले के लिए दुखद यातना है
اِنَّ الَّذ۪ينَ يُحَٓادُّونَ اللّٰهَ وَرَسُولَهُ كُبِتُوا كَمَا كُبِتَ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْ وَقَدْ اَنْزَلْنَٓا اٰيَاتٍ بَيِّنَاتٍۜ وَلِلْكَافِر۪ينَ عَذَابٌ مُه۪ينٌۚ5
जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते हैं, वे अपमानित और तिरस्कृत होकर रहेंगे, जैसे उनसे पहले के लोग अपमानित और तिरस्कृत हो चुके है। हमने स्पष्ट आयतें अवतरित कर दी है और इनकार करनेवालों के लिए अपमानजनक यातना है
يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللّٰهُ جَم۪يعًا فَيُنَبِّئُهُمْ بِمَا عَمِلُواۜ اَحْصٰيهُ اللّٰهُ وَنَسُوهُۜ وَاللّٰهُ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ شَه۪يدٌ۟6
जिस दिन अल्लाह उन सबको उठा खड़ा करेगा और जो कुछ उन्होंने किया होगा, उससे उन्हें अवगत करा देगा। अल्लाह ने उसकी गणना कर रखी है, और वे उसे भूले हुए है, और अल्लाह हर चीज़ का साक्षी है