544. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

544. पृष्ठ
58 · अल-मुजादिला
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اِذَا نَاجَيْتُمُ الرَّسُولَ فَقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيْ نَجْوٰيكُمْ صَدَقَةًۜ ذٰلِكَ خَيْرٌ لَكُمْ وَاَطْهَرُۜ فَاِنْ لَمْ تَجِدُوا فَاِنَّ اللّٰهَ غَفُورٌ رَح۪يمٌ12
ऐ ईमान लानेवालो! जब तुम रसूल से अकेले में बात करो तो अपनी गुप्त वार्ता से पहले सदक़ा दो। यह तुम्हारे लिए अच्छा और अधिक पवित्र है। फिर यदि तुम अपने को इसमें असमर्थ पाओ, तो निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
ءَاَشْفَقْتُمْ اَنْ تُقَدِّمُوا بَيْنَ يَدَيْ نَجْوٰيكُمْ صَدَقَاتٍۜ فَاِذْ لَمْ تَفْعَلُوا وَتَابَ اللّٰهُ عَلَيْكُمْ فَاَق۪يمُوا الصَّلٰوةَ وَاٰتُوا الزَّكٰوةَ وَاَط۪يعُوا اللّٰهَ وَرَسُولَهُۜ وَاللّٰهُ خَب۪يرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ۟13
क्या तुम इससे डर गए कि अपनी गुप्त वार्ता से पहले सदक़े दो? जो जब तुमने यह न किया और अल्लाह ने तुम्हें क्षमा कर दिया. तो नमाज़ क़ायम करो, ज़कात देते रहो और अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो। और तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है
اَلَمْ تَرَ اِلَى الَّذ۪ينَ تَوَلَّوْا قَوْمًا غَضِبَ اللّٰهُ عَلَيْهِمْۜ مَا هُمْ مِنْكُمْ وَلَا مِنْهُمْۙ وَيَحْلِفُونَ عَلَى الْكَذِبِ وَهُمْ يَعْلَمُونَ14
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिन्होंने ऐसे लोगों को मित्र बनाया जिनपर अल्लाह का प्रकोप हुआ है? वे न तुममें से है और न उनमें से। और वे जानते-बूझते झूठी बात पर क़सम खाते है
اَعَدَّ اللّٰهُ لَهُمْ عَذَابًا شَد۪يدًاۜ اِنَّهُمْ سَٓاءَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ15
अल्लाह ने उनके लिए कठोर यातना तैयार कर रखी है। निश्चय ही बुरा है जो वे कर रहे है
اِتَّخَذُٓوا اَيْمَانَهُمْ جُنَّةً فَصَدُّوا عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِ فَلَهُمْ عَذَابٌ مُه۪ينٌ16
उन्होंने अपनी क़समों को ढाल बना रखा है। अतः वे अल्लाह के मार्ग से (लोगों को) रोकते है। तो उनके लिए रुसवा करनेवाली यातना है
لَنْ تُغْنِيَ عَنْهُمْ اَمْوَالُهُمْ وَلَٓا اَوْلَادُهُمْ مِنَ اللّٰهِ شَيْـًٔاۜ اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ النَّارِۚ هُمْ ف۪يهَا خَالِدُونَ17
अल्लाह से बचाने के लिए न उनके माल उनके कुछ काम आएँगे और न उनकी सन्तान। वे आगवाले हैं। उसी में वे सदैव रहेंगे
يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللّٰهُ جَم۪يعًا فَيَحْلِفُونَ لَهُ كَمَا يَحْلِفُونَ لَكُمْ وَيَحْسَبُونَ اَنَّهُمْ عَلٰى شَيْءٍۜ اَلَٓا اِنَّهُمْ هُمُ الْكَاذِبُونَ18
जिस दिन अल्लाह उन सबको उठाएगा तो वे उसके सामने भी इसी तरह क़समें खाएँगे, जिस तरह तुम्हारे सामने क़समें खाते है और समझते हैं कि वे किसी बुनियाद पर है। सावधान रहो, निश्चय ही वही झूठे है!
اِسْتَحْوَذَ عَلَيْهِمُ الشَّيْطَانُ فَاَنْسٰيهُمْ ذِكْرَ اللّٰهِۜ اُو۬لٰٓئِكَ حِزْبُ الشَّيْطَانِۜ اَلَٓا اِنَّ حِزْبَ الشَّيْطَانِ هُمُ الْخَاسِرُونَ19
उनपर शैतान ने पूरी तरह अपना प्रभाव जमा लिया है। अतः उसने अल्लाह की याद को उनसे भुला दिया। वे शैतान की पार्टीवाले हैं। सावधान रहो शैतान की पार्टीवाले ही घाटे में रहनेवाले हैं!
اِنَّ الَّذ۪ينَ يُحَٓادُّونَ اللّٰهَ وَرَسُولَهُٓ اُو۬لٰٓئِكَ فِي الْاَذَلّ۪ينَ20
निश्चय ही जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते है वे अत्यन्त अपमानित लोगों में से है
كَتَبَ اللّٰهُ لَاَغْلِبَنَّ اَنَا۬ وَرُسُل۪يۜ اِنَّ اللّٰهَ قَوِيٌّ عَز۪يزٌ21
अल्लाह ने लिए दिया है, "मैं और मेरे रसूल ही विजयी होकर रहेंगे।" निस्संदेह अल्लाह शक्तिमान, प्रभुत्वशाली है