545. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
58 · अल-मुजादिला59 · अल-हश्र
لَا تَجِدُ قَوْمًا يُؤْمِنُونَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ يُوَٓادُّونَ مَنْ حَٓادَّ اللّٰهَ وَرَسُولَهُ وَلَوْ كَانُٓوا اٰبَٓاءَهُمْ اَوْ اَبْنَٓاءَهُمْ اَوْ اِخْوَانَهُمْ اَوْ عَش۪يرَتَهُمْۜ اُو۬لٰٓئِكَ كَتَبَ ف۪ي قُلُوبِهِمُ الْا۪يمَانَ وَاَيَّدَهُمْ بِرُوحٍ مِنْهُۜ وَيُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُ خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۜ رَضِيَ اللّٰهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا عَنْهُۜ اُو۬لٰٓئِكَ حِزْبُ اللّٰهِۜ اَلَٓا اِنَّ حِزْبَ اللّٰهِ هُمُ الْمُفْلِحُونَ22
तुम उन लोगों को ऐसा कभी नहीं पाओगे जो अल्लाह और अन्तिम दि पर ईमान रखते है कि वे उन लोगों से प्रेम करते हो जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का विरोध किया, यद्यपि वे उनके अपने बाप हों या उनके अपने बेटे हो या उनके अपने भाई या उनके अपने परिवारवाले ही हो। वही लोग हैं जिनके दिलों में अल्लाह ने ईमान को अंकित कर दिया है और अपनी ओर से एक आत्मा के द्वारा उन्हें शक्ति दी है। और उन्हें वह ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी; जहाँ वे सदैव रहेंगे। अल्लाह उनसे राज़ी हुआ और वे भी उससे राज़ी हुए। वे अल्लाह की पार्टी के लोग है। सावधान रहो, निश्चय ही अल्लाह की पार्टीवाले ही सफल है
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
سَبَّحَ لِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِۚ وَهُوَ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ1
अल्लाह की तसबीह की है हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है, और वही प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है
هُوَ الَّذ۪ٓي اَخْرَجَ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا مِنْ اَهْلِ الْكِتَابِ مِنْ دِيَارِهِمْ لِاَوَّلِ الْحَشْرِۜ مَا ظَنَنْتُمْ اَنْ يَخْرُجُوا وَظَنُّٓوا اَنَّهُمْ مَانِعَتُهُمْ حُصُونُهُمْ مِنَ اللّٰهِ فَاَتٰيهُمُ اللّٰهُ مِنْ حَيْثُ لَمْ يَحْتَسِبُوا وَقَذَفَ ف۪ي قُلُوبِهِمُ الرُّعْبَ يُخْرِبُونَ بُيُوتَهُمْ بِاَيْد۪يهِمْ وَاَيْدِي الْمُؤْمِن۪ينَ فَاعْتَبِرُوا يَٓا اُو۬لِي الْاَبْصَارِ2
वही है जिसने किताबवालों में से उन लोगों को जिन्होंने इनकार किया, उनके घरों से पहले ही जमावड़े में निकल बाहर किया। तुम्हें गुमान न था कि उनकी गढ़ियाँ अल्लाह से उन्हें बचा लेंगी। किन्तु अल्लाह उनपर वहाँ से आया जिसका उन्हें गुमान भी न था। और उसने उनके दिलों में रोब डाल दिया कि वे अपने घरों को स्वयं अपने हाथों और ईमानवालों के हाथों भी उजाड़ने लगे। अतः शिक्षा ग्रहण करो, ऐ दृष्टि रखनेवालो!
وَلَوْلَٓا اَنْ كَتَبَ اللّٰهُ عَلَيْهِمُ الْجَلَٓاءَ لَعَذَّبَهُمْ فِي الدُّنْيَاۜ وَلَهُمْ فِي الْاٰخِرَةِ عَذَابُ النَّارِ3
यदि अल्लाह ने उनके लिए देश निकाला न लिख दिया होता तो दुनिया में ही वह उन्हें अवश्य यातना दे देता, और आख़िरत में तो उनके लिए आग की यातना है ही