547. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
59 · अल-हश्र
وَالَّذ۪ينَ جَٓاؤُ۫ مِنْ بَعْدِهِمْ يَقُولُونَ رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا وَلِاِخْوَانِنَا الَّذ۪ينَ سَبَقُونَا بِالْا۪يمَانِ وَلَا تَجْعَلْ ف۪ي قُلُوبِنَا غِلًّا لِلَّذ۪ينَ اٰمَنُوا رَبَّنَٓا اِنَّكَ رَؤُ۫فٌ رَح۪يمٌ۟10
और (इस माल में उनका भी हिस्सा है) जो उनके बाद आए, वे कहते है, "ऐ हमारे रब! हमें क्षमा कर दे और हमारे उन भाइयों को भी जो ईमानलाने में हमसे अग्रसर रहे और हमारे दिलों में ईमानवालों के लिए कोई विद्वेष न रख। ऐ हमारे रब! तू निश्चय ही बड़ा करुणामय, अत्यन्त दयावान है।"
اَلَمْ تَرَ اِلَى الَّذ۪ينَ نَافَقُوا يَقُولُونَ لِاِخْوَانِهِمُ الَّذ۪ينَ كَفَرُوا مِنْ اَهْلِ الْكِتَابِ لَئِنْ اُخْرِجْتُمْ لَنَخْرُجَنَّ مَعَكُمْ وَلَا نُط۪يعُ ف۪يكُمْ اَحَدًا اَبَدًاۙ وَاِنْ قُوتِلْتُمْ لَنَنْصُرَنَّكُمْۜ وَاللّٰهُ يَشْهَدُ اِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ11
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिन्होंने कपटाचार की नीति अपनाई हैं, वे अपने किताबवाले उन भाइयों से, जो इनकार की नीति अपनाए हुए है, कहते है, "यदि तुम्हें निकाला गया तो हम भी अवश्य ही तुम्हारे साथ निकल जाएँगे और तुम्हारे मामले में किसी की बात कभी भी नहीं मानेंगे। और यदि तुमसे युद्ध किया गया तो हम अवश्य तुम्हारी सहायता करेंगे।" किन्तु अल्लाह गवाही देता है कि वे बिलकुल झूठे है
لَئِنْ اُخْرِجُوا لَا يَخْرُجُونَ مَعَهُمْۚ وَلَئِنْ قُوتِلُوا لَا يَنْصُرُونَهُمْۚ وَلَئِنْ نَصَرُوهُمْ لَيُوَلُّنَّ الْاَدْبَارَ۠ ثُمَّ لَا يُنْصَرُونَ12
यदि वे निकाले गए तो वे उनके साथ नहीं निकलेंगे और यदि उनसे युद्ध हुआ तो वे उनकी सहायता कदापि न करेंगे और यदि उनकी सहायता करें भी तो पीठ फेंर जाएँगे। फिर उन्हें कोई सहायता प्राप्त न होगी
لَاَنْتُمْ اَشَدُّ رَهْبَةً ف۪ي صُدُورِهِمْ مِنَ اللّٰهِۜ ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ قَوْمٌ لَا يَفْقَهُونَ13
उनके दिलों में अल्लाह से बढ़कर तुम्हारा भय समाया हुआ है। यह इसलिए कि वे ऐसे लोग है जो समझते नहीं
لَا يُقَاتِلُونَكُمْ جَم۪يعًا اِلَّا ف۪ي قُرًى مُحَصَّنَةٍ اَوْ مِنْ وَرَٓاءِ جُدُرٍۜ بَاْسُهُمْ بَيْنَهُمْ شَد۪يدٌۜ تَحْسَبُهُمْ جَم۪يعًا وَقُلُوبُهُمْ شَتّٰىۜ ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ قَوْمٌ لَا يَعْقِلُونَۚ14
वे इकट्ठे होकर भी तुमसे (खुले मैदान में) नहीं लड़ेगे, क़िलाबन्द बस्तियों या दीवारों के पीछ हों तो यह और बात है। उनकी आपस में सख़्त लड़ाई है। तुम उन्हें इकट्ठा समझते हो! हालाँकि उनके दिल फटे हुए है। यह इसलिए कि वे ऐसे लोग है जो बुद्धि से काम नहीं लेते
كَمَثَلِ الَّذ۪ينَ مِنْ قَبْلِهِمْ قَر۪يبًا ذَاقُوا وَبَالَ اَمْرِهِمْۚ وَلَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌۚ15
उनकी हालत उन्हीं लोगों जैसी है जो उनसे पहले निकट काल में अपने किए के वबाल का मज़ा चख चुके है, और उनके लिए दुखद यातना भी है
كَمَثَلِ الشَّيْطَانِ اِذْ قَالَ لِلْاِنْسَانِ اكْفُرْۚ فَلَمَّا كَفَرَ قَالَ اِنّ۪ي بَر۪ٓيءٌ مِنْكَ اِنّ۪ٓي اَخَافُ اللّٰهَ رَبَّ الْعَالَم۪ينَ16
इनकी मिसाल शैतान जैसी है कि जब उसने मनुष्य से कहा, "क़ुफ़्र कर!" फिर जब वह कुफ़्र कर बैठा तो कहने लगा, "मैं तुम्हारी ज़िम्मेदारी से बरी हूँ। मैं तो सारे संसार के रब अल्लाह से डरता हूँ।"