554. पृष्ठ - कुरान पढ़ें

554. पृष्ठ
62 · अल-जुमुआ
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اِذَا نُودِيَ لِلصَّلٰوةِ مِنْ يَوْمِ الْجُمُعَةِ فَاسْعَوْا اِلٰى ذِكْرِ اللّٰهِ وَذَرُوا الْبَيْعَۜ ذٰلِكُمْ خَيْرٌ لَكُمْ اِنْ كُنْتُمْ تَعْلَمُونَ9
ऐ ईमान लानेवालो, जब जुमा के दिन नमाज़ के लिए पुकारा जाए तो अल्लाह की याद की ओर दौड़ पड़ो और क्रय-विक्रय छोड़ दो। यह तुम्हारे लिए अच्छा है, यदि तुम जानो
فَاِذَا قُضِيَتِ الصَّلٰوةُ فَانْتَشِرُوا فِي الْاَرْضِ وَابْتَغُوا مِنْ فَضْلِ اللّٰهِ وَاذْكُرُوا اللّٰهَ كَث۪يرًا لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ10
फिर जब नमाज़ पूरी हो जाए तो धरती में फैल जाओ और अल्लाह का उदार अनुग्रह (रोजी) तलाश करो, और अल्लाह को बहुत ज़्यादा याद करते रहो, ताकि तुम सफल हो। -
وَاِذَا رَاَوْا تِجَارَةً اَوْ لَهْوًاۨ انْفَضُّٓوا اِلَيْهَا وَتَرَكُوكَ قَٓائِمًاۜ قُلْ مَا عِنْدَ اللّٰهِ خَيْرٌ مِنَ اللَّهْوِ وَمِنَ التِّجَارَةِۜ وَاللّٰهُ خَيْرُ الرَّازِق۪ينَ11
किन्तु जब वे व्यवहार और खेल-तमाशा देखते है तो उसकी ओर टूट पड़ते है और तुम्हें खड़ा छोड़ देते है। कह दो, "जो कुछ अल्लाह के पास है वह तमाशे और व्यापार से कहीं अच्छा है। और अल्लाह सबसे अच्छा आजीविका प्रदान करनेवाला है।"
63 · अल-मुनाफ़िक़ून
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
اِذَا جَٓاءَكَ الْمُنَافِقُونَ قَالُوا نَشْهَدُ اِنَّكَ لَرَسُولُ اللّٰهِۢ وَاللّٰهُ يَعْلَمُ اِنَّكَ لَرَسُولُهُۜ وَاللّٰهُ يَشْهَدُ اِنَّ الْمُنَافِق۪ينَ لَكَاذِبُونَۚ1
जब मुनाफ़िक (कपटाचारी) तुम्हारे पास आते है तो कहते है, "हम गवाही देते है कि निश्चय ही आप अल्लाह के रसूल है।" अल्लाह जानता है कि निस्संदेह तुम उसके रसूल हो, किेन्तु अल्लाह गवाही देता है कि ये मुनाफ़िक बिलकुल झूठे है
اِتَّخَذُٓوا اَيْمَانَهُمْ جُنَّةً فَصَدُّوا عَنْ سَب۪يلِ اللّٰهِۜ اِنَّهُمْ سَٓاءَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ2
उन्होंने अपनी क़समों को ढाल बना रखा है, इस प्रकार वे अल्लाह के मार्ग से रोकते है। निश्चय ही बुरा है जो वे कर रहे है
ذٰلِكَ بِاَنَّهُمْ اٰمَنُوا ثُمَّ كَفَرُوا فَطُبِعَ عَلٰى قُلُوبِهِمْ فَهُمْ لَا يَفْقَهُونَ3
यह इस कारण कि वे ईमान लाए, फिर इनकार किया, अतः उनके दिलों पर मुहर लगा दी गई, अब वे कुछ नहीं समझते
وَاِذَا رَاَيْتَهُمْ تُعْجِبُكَ اَجْسَامُهُمْۜ وَاِنْ يَقُولُوا تَسْمَعْ لِقَوْلِهِمْۜ كَاَنَّهُمْ خُشُبٌ مُسَنَّدَةٌۜ يَحْسَبُونَ كُلَّ صَيْحَةٍ عَلَيْهِمْۜ هُمُ الْعَدُوُّ فَاحْذَرْهُمْۜ قَاتَلَهُمُ اللّٰهُۘ اَنّٰى يُؤْفَكُونَ4
तुम उन्हें देखते हो तो उनके शरीर (बाह्य रूप) तुम्हें अच्छे लगते है, औरयदि वे बात करें तो उनकी बात तुम सुनते रह जाओ। किन्तु यह ऐसा ही है मानो वे लकड़ी के कुंदे है, जिन्हें (दीवार के सहारे) खड़ा कर दिया गया हो। हर ज़ोर की आवाज़ को वे अपने ही विरुद्ध समझते है। वही वास्तविक शत्रु हैं, अतः उनसे बचकर रहो। अल्लाह की मार उनपर। वे कहाँ उल्टे फिरे जा रहे है!