556. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
64 · अत-तग़ाबुन
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
يُسَبِّحُ لِلّٰهِ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَمَا فِي الْاَرْضِۚ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُۘ وَهُوَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌ1
अल्लाह की तसबीह कर रही है हर वह चीज़ जो आकाशों में है और जो धरती में है। उसी की बादशाही है और उसी के लिए प्रशंसा है और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
هُوَ الَّذ۪ي خَلَقَكُمْ فَمِنْكُمْ كَافِرٌ وَمِنْكُمْ مُؤْمِنٌۜ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَص۪يرٌ2
वही है जिसने तुम्हें पैदा किया, फिर तुममें से कोई तो इनकार करनेवाला है और तुममें से कोई ईमानवाला है, और तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उसे देख रहा होता है
خَلَقَ السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضَ بِالْحَقِّ وَصَوَّرَكُمْ فَاَحْسَنَ صُوَرَكُمْۚ وَاِلَيْهِ الْمَص۪يرُ3
उसने आकाशों और धरती को हक़ के साथ पैदा किया और तुम्हारा रूप बनाया, तो बहुत ही अच्छे बनाए तुम्हारे रूप और उसी की ओर अन्ततः जाना है
يَعْلَمُ مَا فِي السَّمٰوَاتِ وَالْاَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُسِرُّونَ وَمَا تُعْلِنُونَۜ وَاللّٰهُ عَل۪يمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ4
वह जानता है जो कुछ आकाशों और धरती में है और उसे भी जानता है जो कुछ तुम छिपाते हो और जो कुछ तुम प्रकट करते हो। अल्लाह तो सीनों में छिपी बात तक को जानता है
اَلَمْ يَاْتِكُمْ نَبَؤُا الَّذ۪ينَ كَفَرُوا مِنْ قَبْلُۘ فَذَاقُوا وَبَالَ اَمْرِهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ اَل۪يمٌ5
क्या तुम्हें उन लोगों की ख़बर नहीं पहुँची जिन्होंने इससे पहले इनकार किया था, फिर उन्होंने अपने कर्म के वबाल का मज़ा चखा और उनके लिए एक दुखद यातना भी है
ذٰلِكَ بِاَنَّهُ كَانَتْ تَاْت۪يهِمْ رُسُلُهُمْ بِالْبَيِّنَاتِ فَقَالُٓوا اَبَشَرٌ يَهْدُونَنَاۘ فَكَفَرُوا وَتَوَلَّوْا وَاسْتَغْنَى اللّٰهُۜ وَاللّٰهُ غَنِيٌّ حَم۪يدٌ6
यह इस कारण कि उनके पास उनके रसूल स्पष्ट प्रमाण लेकर आते रहे, किन्तु उन्होंने कहा, "क्या मनुष्य हमें मार्ग दिखाएँगे?" इस प्रकार उन्होंने इनकार किया और मुँह फेर लिया, तब अल्लाह भी उनसे बेपरवाह हो गया। अल्लाह तो है ही निस्पृह, अपने आप में स्वयं प्रशंसित
زَعَمَ الَّذ۪ينَ كَفَرُٓوا اَنْ لَنْ يُبْعَثُواۜ قُلْ بَلٰى وَرَبّ۪ي لَتُبْعَثُنَّ ثُمَّ لَتُنَبَّؤُ۬نَّ بِمَا عَمِلْتُمْۜ وَذٰلِكَ عَلَى اللّٰهِ يَس۪يرٌ7
जिन लोगों ने इनकार किया उन्होंने दावा किया वे मरने के पश्चात कदापि न उठाए जाएँगे। कह दो, "क्यों नहीं, मेरे रब की क़सम! तुम अवश्य उठाए जाओगे, फिर जो कुछ तुमने किया है उससे तुम्हें अवगत करा दिया जाएगा। और अल्लाह के लिए यह अत्यन्त सरल है।"
فَاٰمِنُوا بِاللّٰهِ وَرَسُولِه۪ وَالنُّورِ الَّذ۪ٓي اَنْزَلْنَاۜ وَاللّٰهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَب۪يرٌ8
अतः ईमान लाओ, अल्लाह पर और उसके रसूल पर और उस प्रकाश पर जिसे हमने अवतरित किया है। तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है
يَوْمَ يَجْمَعُكُمْ لِيَوْمِ الْجَمْعِ ذٰلِكَ يَوْمُ التَّغَابُنِۜ وَمَنْ يُؤْمِنْ بِاللّٰهِ وَيَعْمَلْ صَالِحًا يُكَفِّرْ عَنْهُ سَيِّـَٔاتِه۪ وَيُدْخِلْهُ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُ خَالِد۪ينَ ف۪يهَٓا اَبَدًاۜ ذٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظ۪يمُ9
इकट्ठा होने के दिन वह तुम्हें इकट्ठा करेगा, वह परस्पर लाभ-हानि का दिन होगा। जो भी अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छा कर्म करे उसकी बुराईयाँ अल्लाह उससे दूर कर देगा और उसे ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी, उनमें वे सदैव रहेंगे। यही बड़ी सफलता है