557. पृष्ठ - कुरान पढ़ें
64 · अत-तग़ाबुन
وَالَّذ۪ينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِاٰيَاتِنَٓا اُو۬لٰٓئِكَ اَصْحَابُ النَّارِ خَالِد۪ينَ ف۪يهَاۜ وَبِئْسَ الْمَص۪يرُ۟10
रहे वे लोग जिन्होंने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही आगवाले है जिसमें वे सदैव रहेंगे। अन्ततः लौटकर पहुँचने की वह बहुत ही बुरी जगह है
مَٓا اَصَابَ مِنْ مُص۪يبَةٍ اِلَّا بِاِذْنِ اللّٰهِۜ وَمَنْ يُؤْمِنْ بِاللّٰهِ يَهْدِ قَلْبَهُۜ وَاللّٰهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَل۪يمٌ11
अल्लाह की अनुज्ञा के बिना कोई भी मुसीबत नहीं आती। जो अल्लाह पर ईमान ले आए अल्लाह उसके दिल को मार्ग दिखाता है, और अल्लाह हर चीज को भली-भाँति जानता है
وَاَط۪يعُوا اللّٰهَ وَاَط۪يعُوا الرَّسُولَۚ فَاِنْ تَوَلَّيْتُمْ فَاِنَّمَا عَلٰى رَسُولِنَا الْبَلَاغُ الْمُب۪ينُ12
अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और रसूल की आज्ञा का पालन करो, किन्तु यदि तुम मुँह मोड़ते हो तो हमारे रसूल पर बस स्पष्ट रूप से (संदेश) पहुँचा देने की ज़िम्मेदारी है
اَللّٰهُ لَٓا اِلٰهَ اِلَّا هُوَۜ وَعَلَى اللّٰهِ فَلْيَتَوَكَّلِ الْمُؤْمِنُونَ13
अल्लाह वह है जिसके सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। अतः अल्लाह ही पर ईमानवालों को भरोसा करना चाहिए
يَٓا اَيُّهَا الَّذ۪ينَ اٰمَنُٓوا اِنَّ مِنْ اَزْوَاجِكُمْ وَاَوْلَادِكُمْ عَدُوًّا لَكُمْ فَاحْذَرُوهُمْۚ وَاِنْ تَعْفُوا وَتَصْفَحُوا وَتَغْفِرُوا فَاِنَّ اللّٰهَ غَفُورٌ رَح۪يمٌ14
ऐ ईमान लानेवालो, तुम्हारी पत्नियों और तुम्हारी सन्तान में से कुछ ऐसे भी है जो तुम्हारे शत्रु है। अतः उनसे होशियार रहो। और यदि तुम माफ़ कर दो और टाल जाओ और क्षमा कर दो निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है
اِنَّمَٓا اَمْوَالُكُمْ وَاَوْلَادُكُمْ فِتْنَةٌۜ وَاللّٰهُ عِنْدَهُٓ اَجْرٌ عَظ۪يمٌ15
तुम्हारे माल और तुम्हारी सन्तान तो केवल एक आज़माइश है, और अल्लाह ही है जिसके पास बड़ा प्रतिदान है
فَاتَّقُوا اللّٰهَ مَا اسْتَطَعْتُمْ وَاسْمَعُوا وَاَط۪يعُوا وَاَنْفِقُوا خَيْرًا لِاَنْفُسِكُمْۜ وَمَنْ يُوقَ شُحَّ نَفْسِه۪ فَاُو۬لٰٓئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ16
अतः जहाँ तक तुम्हारे बस में हो अल्लाह का डर रखो और सुनो और आज्ञापालन करो और ख़र्च करो अपनी भलाई के लिए। और जो अपने मन के लोभ एवं कृपणता से सुरक्षित रहा तो ऐसे ही लोग सफल है
اِنْ تُقْرِضُوا اللّٰهَ قَرْضًا حَسَنًا يُضَاعِفْهُ لَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْۜ وَاللّٰهُ شَكُورٌ حَل۪يمٌۙ17
यदि तुम अल्लाह को अच्छा ऋण दो तो वह उसे तुम्हारे लिए कई गुना बढ़ा देगा और तुम्हें क्षमा कर देगा। अल्लाह बड़ा गुणग्राहक और सहनशील है,
عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ الْعَز۪يزُ الْحَك۪يمُ18
परोक्ष और प्रत्यक्ष को जानता है, प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है