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559. पृष्ठ
65 · अत-तलाक
اَسْكِنُوهُنَّ مِنْ حَيْثُ سَكَنْتُمْ مِنْ وُجْدِكُمْ وَلَا تُضَٓارُّوهُنَّ لِتُضَيِّقُوا عَلَيْهِنَّۜ وَاِنْ كُنَّ اُو۬لَاتِ حَمْلٍ فَاَنْفِقُوا عَلَيْهِنَّ حَتّٰى يَضَعْنَ حَمْلَهُنَّۚ فَاِنْ اَرْضَعْنَ لَكُمْ فَاٰتُوهُنَّ اُجُورَهُنَّۚ وَاْتَمِرُوا بَيْنَكُمْ بِمَعْرُوفٍۚ وَاِنْ تَعَاسَرْتُمْ فَسَتُرْضِعُ لَهُٓ اُخْرٰىۜ6
अपनी हैसियत के अनुसार यहाँ तुम स्वयं रहते हो उन्हें भी उसी जगह रखो। और उन्हें तंग करने के लिए उन्हें हानि न पहुँचाओ। और यदि वे गर्भवती हो तो उनपर ख़र्च करते रहो जब तक कि उनका शिशु-प्रसव न हो जाए। फिर यदि वे तुम्हारे लिए (शिशु को) दूध पिलाएँ तो तुम उन्हें उनका पारिश्रामिक दो और आपस में भली रीति से परस्पर बातचीत के द्वार कोई बात तय कर लो। और यदि तुम दोनों में कोई कठिनाई हो तो फिर कोई दूसरी स्त्री उसके लिए दूध पिला देगी
لِيُنْفِقْ ذُو سَعَةٍ مِنْ سَعَتِه۪ۜ وَمَنْ قُدِرَ عَلَيْهِ رِزْقُهُ فَلْيُنْفِقْ مِمَّٓا اٰتٰيهُ اللّٰهُۜ لَا يُكَلِّفُ اللّٰهُ نَفْسًا اِلَّا مَٓا اٰتٰيهَاۜ سَيَجْعَلُ اللّٰهُ بَعْدَ عُسْرٍ يُسْرًا۟7
चाहिए कि समाई (सामर्थ्य) वाला अपनी समाई के अनुसार ख़र्च करे और जिसे उसकी रोज़ी नपी-तुली मिली हो तो उसे चाहिए कि अल्लाह ने उसे जो कुछ भी दिया है उसी में से वह ख़र्च करे। जितना कुछ दिया है उससे बढ़कर अल्लाह किसी व्यक्ति पर ज़िम्मेदारी का बोझ नहीं डालता। जल्द ही अल्लाह कठिनाई के बाद आसानी पैदा कर देगा
وَكَاَيِّنْ مِنْ قَرْيَةٍ عَتَتْ عَنْ اَمْرِ رَبِّهَا وَرُسُلِه۪ فَحَاسَبْنَاهَا حِسَابًا شَد۪يدًا وَعَذَّبْنَاهَا عَذَابًا نُكْرًا8
कितनी ही बस्तियाँ हैं जिन्होंने रब और उसके रसूलों के आदेश के मुक़ाबले में सरकशी की, तो हमने उनकी सख़्त पकड़ की और उन्हें बुरी यातना दी
فَذَاقَتْ وَبَالَ اَمْرِهَا وَكَانَ عَاقِبَةُ اَمْرِهَا خُسْرًا9
अतः उन्होंने अपने किए के वबाल का मज़ा चख लिया और उनकी कार्य-नीति का परिणाम घाटा ही रहा
اَعَدَّ اللّٰهُ لَهُمْ عَذَابًا شَد۪يدًا فَاتَّقُوا اللّٰهَ يَٓا اُو۬لِي الْاَلْبَابِۚۛ اَلَّذ۪ينَ اٰمَنُواۚۛ قَدْ اَنْزَلَ اللّٰهُ اِلَيْكُمْ ذِكْرًاۙ10
अल्लाह ने उनके लिए कठोर यातना तैयार कर रखी है। अतः ऐ बुद्धि और समझवालो जो ईमान लाए हो! अल्लाह का डर रखो। अल्लाह ने तुम्हारी ओर एक याददिहानी उतार दी है
رَسُولًا يَتْلُوا عَلَيْكُمْ اٰيَاتِ اللّٰهِ مُبَيِّنَاتٍ لِيُخْرِجَ الَّذ۪ينَ اٰمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ مِنَ الظُّلُمَاتِ اِلَى النُّورِۜ وَمَنْ يُؤْمِنْ بِاللّٰهِ وَيَعْمَلْ صَالِحًا يُدْخِلْهُ جَنَّاتٍ تَجْر۪ي مِنْ تَحْتِهَا الْاَنْهَارُ خَالِد۪ينَ ف۪يهَٓا اَبَدًاۜ قَدْ اَحْسَنَ اللّٰهُ لَهُ رِزْقًا11
(अर्थात) एक रसूल जो तुम्हें अल्लाह की स्पष्ट आयतें पढ़कर सुनाता है, ताकि वह उन लोगों को, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, अँधेरों से निकालकर प्रकाश की ओर ले आए। जो कोई अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छा कर्म करे, उसे वह ऐसे बाग़़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होगी - ऐसे लोग उनमें सदैव रहेंगे - अल्लाह ने उनके लिए उत्तम रोज़ी रखी है
اَللّٰهُ الَّذ۪ي خَلَقَ سَبْعَ سَمٰوَاتٍ وَمِنَ الْاَرْضِ مِثْلَهُنَّۜ يَتَنَزَّلُ الْاَمْرُ بَيْنَهُنَّ لِتَعْلَمُٓوا اَنَّ اللّٰهَ عَلٰى كُلِّ شَيْءٍ قَد۪يرٌۙ وَاَنَّ اللّٰهَ قَدْ اَحَاطَ بِكُلِّ شَيْءٍ عِلْمًا12
अल्लाह ही है जिसने सात आकाश बनाए और उन्ही के सदृश धरती से भी। उनके बीच (उसका) आदेश उतरता रहता है ताकि तुम जान लो कि अल्लाह को हर चीज़ का सामर्थ्य प्राप्त है और यह कि अल्लाह हर चीज़ को अपनी ज्ञान-परिधि में लिए हुए है